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अरे वाह! 30 सालों बाद आज देखा है कालिंदी को इतना निर्मल
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टूंडला के रसूलाबाद घाट पर कालिंदी का निर्मल जल
- फोटो : TUNDLA
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टूंडला। अरे वाह! कालिंदी का जल इतना निर्मल। पिछले 30 साल से नहीं देखा। केंद्र सरकार द्वारा यमुना जल शुद्धिकरण के लिए तमाम प्रयास किए। भाकियू भानु व संतों ने भी यमुना बचाओ अभियान चलाया, किंतु सब कुछ असफल रहा। अब कालिंदी का जल इतना निर्मल हो गया है, कि उसमें कण-कण दिखने लगा है। इसके शुद्धीकरण के पीछे संपूर्ण लॉकडाउन ही है। यह देख तटीय लोग अचंभित ही नहीं खुश भी हैं।
जिन शहरों के गंदे नालों व कारखानों का प्रदूषित केमिकलयुक्त पानी यमुना नदी में आता था। वह 35 दिन से बंद है। यमुना की साफ-सफाई को लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन यमुना साफ नहीं हो पाई। लॉकडाउन के दौरान यमुना में जो नजारा देखने को मिला वह काफी अचंभित करने वाला है। यमुना का जल पूरी तरह से निर्मल और शुद्ध हो चुका है। यमुना का जल जहां आचमन करने योग्य नहीं था, वहां लोग इस जल को शुद्ध देखकर चौंक रहे हैं।
कालिंदी में बदबूदार पानी हुआ करता था। वह पानी आज साफ सुथरा प्रतीत हो रहा है। कुछ लोग यमुना के जल को पीने योग्य मान रहे हैं। सन 2015 में भारतीय किसान यूनियन भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह भानु व संतों ने यमुना जल शुद्धिकरण के लिए वृंदावन से दिल्ली तक जन समूह लेकर मार्च व जंतरमंतर पर धरना दिया था, लेकिन न तो हथिनी कुंड वैराज से यमुना को पानी छोड़ा गया और न यमुना किनारे नाले का निर्माण कराया गया।
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कोराना महामारी के बीच कालिंदी के दिन बहुर गए हैं। कालिंदी का पानी एकदम निर्मल हो चला है। 40 प्रतिशत जल शुद्ध हो गया है। गांव रसूलाबाद घाट पर बैठे समाजसेवी दिलावर व लख्मीचंद ने बताया कि 30 वर्ष पूर्व जिस यमुना का पानी इतना निर्मल था की लोग पानी पीते थे। उसके बाद तो पानी पीना तो दूर की बात प्रतिवर्ष लाखों मछलियां मरतीं हैं, पशु बीमार होते हैं तथा तटीय लोग को त्वचा संबंधी बीमारियां होती हैं। उन्होंने कहा कि यदि फैक्टरी से निकलने वाला विषैला पानी बंद हो जाए व हथिनी कुंड वैराज से यमुना में जल छोड़ा जाय तो यमुना का पानी पुन: पीने योग्य हो जाएगा।
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जिन शहरों के गंदे नालों व कारखानों का प्रदूषित केमिकलयुक्त पानी यमुना नदी में आता था। वह 35 दिन से बंद है। यमुना की साफ-सफाई को लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन यमुना साफ नहीं हो पाई। लॉकडाउन के दौरान यमुना में जो नजारा देखने को मिला वह काफी अचंभित करने वाला है। यमुना का जल पूरी तरह से निर्मल और शुद्ध हो चुका है। यमुना का जल जहां आचमन करने योग्य नहीं था, वहां लोग इस जल को शुद्ध देखकर चौंक रहे हैं।
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कालिंदी में बदबूदार पानी हुआ करता था। वह पानी आज साफ सुथरा प्रतीत हो रहा है। कुछ लोग यमुना के जल को पीने योग्य मान रहे हैं। सन 2015 में भारतीय किसान यूनियन भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह भानु व संतों ने यमुना जल शुद्धिकरण के लिए वृंदावन से दिल्ली तक जन समूह लेकर मार्च व जंतरमंतर पर धरना दिया था, लेकिन न तो हथिनी कुंड वैराज से यमुना को पानी छोड़ा गया और न यमुना किनारे नाले का निर्माण कराया गया।
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कोराना महामारी के बीच कालिंदी के दिन बहुर गए हैं। कालिंदी का पानी एकदम निर्मल हो चला है। 40 प्रतिशत जल शुद्ध हो गया है। गांव रसूलाबाद घाट पर बैठे समाजसेवी दिलावर व लख्मीचंद ने बताया कि 30 वर्ष पूर्व जिस यमुना का पानी इतना निर्मल था की लोग पानी पीते थे। उसके बाद तो पानी पीना तो दूर की बात प्रतिवर्ष लाखों मछलियां मरतीं हैं, पशु बीमार होते हैं तथा तटीय लोग को त्वचा संबंधी बीमारियां होती हैं। उन्होंने कहा कि यदि फैक्टरी से निकलने वाला विषैला पानी बंद हो जाए व हथिनी कुंड वैराज से यमुना में जल छोड़ा जाय तो यमुना का पानी पुन: पीने योग्य हो जाएगा।