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डॉल्फिन की तलाश को गंगानदी में उतरीं डब्ल्यू डब्ल्यू एफ की टीमें
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कासगंज। जलीय जीवों के संरक्षण के लिए विशेष मुहिम छिड़ गई है। वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की टीमें गंगा में डॉल्फिन की तलाश में जुट गई हैं। वरिष्ठ अफसरों के नेतृत्व में बिजनौर और कानपुर से क्रॉस निरीक्षण के लिए गंगा में उतरी हैं। यह टीमें चार दिसंबर को नदी में विशेष नौका से उतरी हैं। जिले की सीमा में बिजनौर की ओर से आ रही टीम 11 दिसंबर को पहुंचेगी, जो 12 दिसंबर तक डॉल्फिन की तलाश करेगी। उसके बाद इसकी गणना का डाटा जारी करेगी।
जलीय जीवों का संरक्षण हो सके और उनकी अठखेलियां गंगा में आकर्षण का केंद्र बनें, इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग संयुक्त रूप से प्रयास कर रहे हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ दिल्ली के परियोजना निदेशक शाहनवाज खान के नेतृत्व में विशेष नौका से एक टीम बिजनौर से तलाश करती हुई नरौरा तक पहुंच गई है। जबकि दूसरी तरफ से क्रॉस तलाश के लिए एक टीम कानपुर के फतेहपुर से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कोआर्डिनेटर हिमांशु कुमार के नेतृत्व में उतरी है। सर्वेक्षण कर गणना की जाएगी कि गंगा में कितनी डॉल्फिन हैं। क्योंकि अब तक विशेषज्ञों ने माना है कि पूर्व में प्रदूषण के कारण गंगा से जलीय जीव विलुप्त होते जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नमामि गंगे योजना के बाद से गंगानदी में जलीय जीवों को संरक्षण मिलने लगा है, जिससे मगरमच्छ, कछुए ही नहीं बल्कि डॉल्फिन जैसे जलीय जीवों की संख्या भी बढना शुरू हो गई है।
इन जिलों में टीमें करेंगी गणना
बिजनौर, मुजफ्फरनगर, हापुड़, मेरठ, संभल, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, बदायूं फर्रुखाबाद की ओर परियोजना निदेशक की टीम बढ़ रही है। जबकि कोआर्डिनेटर की टीम कानपुर, फतेहपुर, रायबरेली, प्रयागराज, कौशांबी, कन्नौज, उन्नाव से होती हुई जिले की ओर आ रही है।
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कई जगह देखने को मिली डॉल्फिन
अब तक टीमों द्वारा जो सर्वेक्षण किया गया है उसमें फतेहपुर और मेरठ की ओर कई जगह डॉल्फिन देखने को मिली हैं। टीमों का मानना है कि कासगंज जिले की सीमा में कछला गंगा में निश्चित ही डॉॅल्फिन होंगी। इसलिए यहां गहनता से गणना की जाएगी।
पूर्व में देखा जा चुका डॉल्फिन
निचली हजारा गंगा नहर में पिछले साल दिसंबर माह में डॉल्फिन कुनबा देखने को मिला था। यहां तत्कालीन डीएफओ दिवाकर वशिष्ठ ने इस परिवार के संरक्षण के लिए निगरानी कराई। यह परिवार काफी दिनों तक झाल के गहरे पानी में रहकर अठखेलियां करता रहा।
आंकड़े की नजर से-
- 17 जिलों में डॉल्फिन की गणना के लिए निकली हैं टीमें।
- 75 किलोमीटर क्षेत्रफल में कासगंज जिले की सीमा में होगा सर्वेक्षण।
- 11 व 12 दिसंबर को जिले में रहेंगी डब्ल्यू डब्ल्यू एफ की टीमें।
- परियोजना अधिकारी के नेतृत्व में डॉल्फिन के संरक्षण के लिए टीमें निकली हुई हैं। जल्द ही सर्वेक्षण पूरा कर गणना की जाएगी। अब तक कई जगह डॉल्फिन देखने को मिली हैं। - हिमांशु कुमार, कोआर्डिनेटर, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, दिल्ली।
- जिले में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीमों के सहयोग के लिए दो कर्मचारी नामित कर दिए हैं। 11 व 12 दिसंबर को जिले में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम पहुंच रही है- हरि शुक्ला, डीएफओ।
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जलीय जीवों का संरक्षण हो सके और उनकी अठखेलियां गंगा में आकर्षण का केंद्र बनें, इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग संयुक्त रूप से प्रयास कर रहे हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ दिल्ली के परियोजना निदेशक शाहनवाज खान के नेतृत्व में विशेष नौका से एक टीम बिजनौर से तलाश करती हुई नरौरा तक पहुंच गई है। जबकि दूसरी तरफ से क्रॉस तलाश के लिए एक टीम कानपुर के फतेहपुर से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कोआर्डिनेटर हिमांशु कुमार के नेतृत्व में उतरी है। सर्वेक्षण कर गणना की जाएगी कि गंगा में कितनी डॉल्फिन हैं। क्योंकि अब तक विशेषज्ञों ने माना है कि पूर्व में प्रदूषण के कारण गंगा से जलीय जीव विलुप्त होते जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नमामि गंगे योजना के बाद से गंगानदी में जलीय जीवों को संरक्षण मिलने लगा है, जिससे मगरमच्छ, कछुए ही नहीं बल्कि डॉल्फिन जैसे जलीय जीवों की संख्या भी बढना शुरू हो गई है।
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इन जिलों में टीमें करेंगी गणना
बिजनौर, मुजफ्फरनगर, हापुड़, मेरठ, संभल, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, बदायूं फर्रुखाबाद की ओर परियोजना निदेशक की टीम बढ़ रही है। जबकि कोआर्डिनेटर की टीम कानपुर, फतेहपुर, रायबरेली, प्रयागराज, कौशांबी, कन्नौज, उन्नाव से होती हुई जिले की ओर आ रही है।
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कई जगह देखने को मिली डॉल्फिन
अब तक टीमों द्वारा जो सर्वेक्षण किया गया है उसमें फतेहपुर और मेरठ की ओर कई जगह डॉल्फिन देखने को मिली हैं। टीमों का मानना है कि कासगंज जिले की सीमा में कछला गंगा में निश्चित ही डॉॅल्फिन होंगी। इसलिए यहां गहनता से गणना की जाएगी।
पूर्व में देखा जा चुका डॉल्फिन
निचली हजारा गंगा नहर में पिछले साल दिसंबर माह में डॉल्फिन कुनबा देखने को मिला था। यहां तत्कालीन डीएफओ दिवाकर वशिष्ठ ने इस परिवार के संरक्षण के लिए निगरानी कराई। यह परिवार काफी दिनों तक झाल के गहरे पानी में रहकर अठखेलियां करता रहा।
आंकड़े की नजर से-
- 17 जिलों में डॉल्फिन की गणना के लिए निकली हैं टीमें।
- 75 किलोमीटर क्षेत्रफल में कासगंज जिले की सीमा में होगा सर्वेक्षण।
- 11 व 12 दिसंबर को जिले में रहेंगी डब्ल्यू डब्ल्यू एफ की टीमें।
- परियोजना अधिकारी के नेतृत्व में डॉल्फिन के संरक्षण के लिए टीमें निकली हुई हैं। जल्द ही सर्वेक्षण पूरा कर गणना की जाएगी। अब तक कई जगह डॉल्फिन देखने को मिली हैं। - हिमांशु कुमार, कोआर्डिनेटर, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, दिल्ली।
- जिले में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीमों के सहयोग के लिए दो कर्मचारी नामित कर दिए हैं। 11 व 12 दिसंबर को जिले में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम पहुंच रही है- हरि शुक्ला, डीएफओ।