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World Radio Day 2025: वो दौर जब रेडियो के लिए लेना पड़ता लाइसेंस...अब फिर बढ़ रहे हैं कद्रदान, ऐसा रहा सफर

Thu, 13 Feb 2025 12:36 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अखिलेश कुमार, अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा
अखिलेश कुमार, अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 13 Feb 2025 12:36 PM IST
सार

विश्व रेडियो दिवस 13 जनवरी को मनाया जाता है। एक दौर वो था, जब रेडियो के लिए भी लाइसेंस लेना पड़ता था। समय गुजरी और टेलीविजन के आते ही इसकी बेकद्री होने लगी, लेकिन एक बार फिर युवा दिलों में ये अपनी जगह बनाने लगा है। 

 

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World Radio Day 2025 era when license had to be taken for radio now appreciation is increasing again
रेडियो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महबूब यानी रेडियो वही है...बस वक्त के बदलाव के साथ कद्रदानों की मोहब्बत का अंदाज बदल गया है। रेडियो अब अलमारी से जेब में उतर आया है। अपनी पसंद को सुनना पहले से ज्यादा सहूलियत भरा है। इसी से लोग सुन भी रहे हैं। शहर में एफएम स्टेशनों में इजाफे के साथ सुनने वालों की तादाद भी बढ़ रही है।
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रेडियो खास होता जा रहा है। यह अब एफएम रेडियो और ई-रेडियो है। ऑल इंडिया रेडियो सुनना हाे या एफएम का कोई भी चैनल, मोबाइल में सब मौजूद है। गायक कलाकारों के नाम से भी चैनल मुहैया हैं। शहर में आप की आवाज, आगरा की आवाज, ब्रजवाणी के बाद से सुनने वालों को नया अनुभव मिला। यह एफएम चैनलों के विस्तार के बाद से कायम है। अब कार्यक्रम ज्यादा हैं और प्रस्तुति बेहतर तो लोग रेडियो को वक्त भी ज्यादा दे रहे हैं।
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कमला नगर की रेनू कहती हैं कि रेडियो खत्म नहीं हुआ। इसका अंदाज बदल गया है। पहले घर में एक रेडियो होता था। अब जिसके पास मोबाइल है, उसके पास रेडियो। इस मुकाबले सुनने वाले भी बढ़े हैं। खंदारी के मुकेश सिंह कहते हैं कि रेडियो सुनने का अनुभव अब और बेहतर है। हमारे पास सुनने के ज्यादा विकल्प मौजूद हैं।


 

ये तेरा मेरा साथ
शहर के मऊ में रहने वाले थान सिंह 55 साल के हैं। वर्ष 1980 में शादी में रेडियो मिला था। तब से दीवानगी है। चार रेडियो खरीद चुके हैं। वर्ष 2014 में फिर से नया रेडियो खरीदा। खेती करने वाले थान सिंह बताते हैं कि रोज 4-5 घंटे रेडियो सुनते हैं।

 
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इनसेट
पीडीएफ: 15 जनवरी को प्रकाशित खबर
16 जनवरी 1989 काे शहर में शुरू हुआ था आकाशवाणी केेंद्र
शहर के विभव नगर में 16 जनवरी, 1989 को आकाशवाणी केंद्र की शुरुआत हुई थी। यह रेडियो के कद्रदानों के लिए खास दिन था। 15 जनवरी, 1989 को अमर उजाला में प्रकाशित खबर में संसदीय कार्य एवं सूचना प्रसारण मंत्री हरिकिशन भगत के केंद्र की शुरुआत के लिए पहुंचने की जानकारी दी गई। इंगित किया गया कि देश के 96 वें और प्रदेश के 10 वें केंद्र के कार्यक्रम मीडियम बेव 196.1 और 1530 किलो हर्ट्ज पर सुने जा सकेंगे।

 

ये भी जान लें
.13 फरवरी, 1946 को संयुक्त राष्ट्र रेडियो की स्थापना हुई थी। तभी से इस तारीख को विश्व रेडियो दिवस बतौर मनाया जाता है।
.भारत में रेडियो प्रसारण वर्ष 1923 और 1924 में निजी उद्यम के रूप में शुरू हुआ।
.रेडियो क्लब ने जून, 1923 में भारत का पहला रेडियो कार्यक्रम प्रसारित किया था।
.आकाशवाणी की स्थापना 23 जुलाई, 1927 को हुई।
.पहले रेडियो के लिए लाइसेंस लेना पड़ता था। यह घरेलू रेडियो के लिए 15 और कॉमर्शियल के लिए 25 रुपये सालाना होता था। इसका हर साल डाक विभाग से नवीनीकरण करवाना पड़ता था। वर्ष 1987 में इसे खत्म कर दिया गया।
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