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World Mental Health Day: कोरोना काल में बढ़ रहे तनाव के मरीज, ऐसे करें अपना बचाव

Sat, 10 Oct 2020 09:56 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 10 Oct 2020 09:56 AM IST
सार

  • कोरोना के बारे में ज्यादा सोचने से बन गए तनाव के मरीज
  • पहले स्वास्थ्य की चिंता में डूबे रहे, फिर कारोबार-नौकरी की, अब करा रहे उपचार

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World Mental Health Day 2020:: Mental stress patients increasing due to Coronavirus
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की ओपीडी में रोजाना आठ से दस नए मरीज आ रहे हैं। कोरोना काल से पहले इन्हें तनाव की बीमारी नहीं थी। इनमें से दो से तीन अवसाद में मिल रहे हैं। परिजन इन्हें तब लेकर आए जब तनाव के कारण इन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया या फिर बहुत कम कर दिया। चिकित्सकों ने कोरोना संकट काल में तनाव से बचने के उपाए भी बता रहे हैं। 

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नौकरी जाने का डर सताने लगा
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की ओपीडी में दो बार आ चुके शाहगंज के 30 वर्षीय युवक को सपने में भी यही डर सताता है कि उसकी नौकरी चली जाएगी। वह दिल्ली में निजी कंपनी में काम करता है। कोरोना काल से पहले कभी ऐसा नहीं हुआ।
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कारोबार के तनाव ने दी गंभीर मानसिक परेशानी
कमला नगर के 48 साल के व्यक्ति का चांदी का कारोबार है। कोरोना वायरस के कारण उधारी फंस गई है, नए आर्डर आना भी कम हो गए हैं। बैंक लोन के कारण वह तनावग्रस्त रहने लगे, हालत बिगड़ने पर परिजनों ने चिकित्सकों को दिखाया, जिसमें उनकी मानसिक परेशानी गंभीर मिली।

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नौकरी जाने के भय से बढ़ गया तनाव
आवास विकास कॉलोनी में प्राइवेट कंपनी में लोन विभाग में जॉब करने वाले 36 साल के युवक को लॉकडाउन में कंपनी ने जैसे-तैसे वेतन दिया, इसके बाद टारगेट तीन गुना कर दिया। कोरोना वायरस के कारण यह संभव नहीं हुआ। जॉब न छूट जाए, परिवार का कैसे गुजारा करूंगा, इससे मानसिक रूप से परेशान रहने लगा।

एक ही सवाल घूमता है दिमाग में, कब जाएगा कोरोना
चिकित्सकों की पूछताछ में कई मरीजों ने बताया कि उनके दिमाग में यह सवाल घूमता रहता है कि कोरोना कब जाएगा? तीमारदारों से पता चला कि शुरुआत में इन बातों को नजरअंदाज किया, लेकिन बाद में घबराहट, भूख न लगना, गुमसुम रहने की परेशानी होने पर अस्पताल लाना पड़ा।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. पीके शर्मा ने बताया कि कोरोना महामारी में मानसिक परेशानी के नए मरीज बढ़े हैं। फोन पर भी कई मरीज परामर्श ले रहे हैं, उनकी काउंसिलिंग भी की जा रही है। ओपीडी में रोजाना 150 से 180 मरीज आ रहे हैं। इसमें से हर दूसरे मरीज को तनाव, चिंता, अवसाद की परेशानी है।

 

तनाव की नई वजह सामने आई: डॉ. राठौर
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि कोरोना में मानसिक रोग की नई वजह सामने आई है। मरीज संक्रमण, व्यापार-धंधे, नौकरी के लिए चिंतित रहने से तनावग्रस्त हो गए। परिजनों ने शुरुआत में नजरअदांज किया। लंबे समय तक ऐसे हालातों से गंभीर स्थिति बनी।

हताशा खतरनाक, सकारात्मक बातों से करें प्रेरित: डॉ. गुरनानी
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. केसी गुरनानी ने बताया कि सामान्य दिनों के मुकाबले कोरोना महामारी में हताशा, चिंता, तनाव और अवसाद के मामले बढ़े हैं। फोन पर रोजाना 10 से 15 मरीज परामर्श लेते हैं। परिजन-मित्रों को प्रेरित करें कि बीमारी से जीवन का अंत नहीं, फिर से माहौल सामान्य होगा।

इन बातों का रखें ध्यान
- बीमारी, आर्थिक परेशानी के कारण घर का सदस्य चिंतित है तो उससे सकारात्मक बातें करें।
- चिंता और तनाव से बचने के लिए योग, संगीत, पेंटिंग, बागवानी, लेखन में समय बिताएं।
- भूख न लगना, हताशा, चिंतित होने पर उसको अकेला न छोड़े, उसके साथ समय बिताएं।
- मानसिक रोगी हैं तो उनकी निगरानी, चिकित्सकों से परामर्श और काउंसिलिंग कराते रहें।

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