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ताजमहल के शहर में धरती की सेहत से खिलवाड़, दो साल में छीना 'श्रृंगार', पेड़-पौधों पर कुल्हाड़ी से वार
Wed, 22 Apr 2020 01:05 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 22 Apr 2020 01:05 PM IST
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world earth day 2020
- फोटो : ट्विटर
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आज विश्व धरती दिवस है। पर, ताजमहल के शहर में धरती की सेहत से ही खिलवाड़ किया जा रहा है। महज दो साल के अंदर आगरा की धरती से 10 वर्ग किलोमीटर हरियाली छीन ली गई।
वह पौधे जो धरती मां का श्रृंगार करते हैं। पर्यावरण को सहेजते हैं, ऐसे 10 किलोमीटर जंगल को कुल्हाड़ी से काट दिया गया। ये हम नहीं कह रहें। आंकड़े बल्कि फॉरेस्ट सर्वे इंस्टिट्यूट देहरादून की हालिया रिपोर्ट में पेश किए गए है।
आगरा में साल 2017 की तुलना में 2019 की रिपोर्ट के अनुसार 9.38 वर्ग किलोमीटर वन आवरण कम हो गया। यह कमी मध्यम घनत्व वाले जंगलों में 0.32 वर्ग किलोमीटर और खुले जंगल में 9.06 वर्ग किलोमीटर आई है। जो खुले जंगल थे। वे झाड़ियों में बदल गए।
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झाड़ियों वाला क्षेत्रफल जो 2017 में 64 वर्ग किलोमीटर था। वह 2019 में बढ़कर 75.14 वर्ग किलोमीटर हो गया। खुला जंगल वह है, जहां पेडों की कैनोपी का आवरण 10 प्रतिशत से 40 प्रतिशत है और झड़ियों का क्षेत्र वह कहलाता है जहां 10 प्रतिशत कैनोपी का आवरण कवर से भी कम है।
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वह पौधे जो धरती मां का श्रृंगार करते हैं। पर्यावरण को सहेजते हैं, ऐसे 10 किलोमीटर जंगल को कुल्हाड़ी से काट दिया गया। ये हम नहीं कह रहें। आंकड़े बल्कि फॉरेस्ट सर्वे इंस्टिट्यूट देहरादून की हालिया रिपोर्ट में पेश किए गए है।
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आगरा में साल 2017 की तुलना में 2019 की रिपोर्ट के अनुसार 9.38 वर्ग किलोमीटर वन आवरण कम हो गया। यह कमी मध्यम घनत्व वाले जंगलों में 0.32 वर्ग किलोमीटर और खुले जंगल में 9.06 वर्ग किलोमीटर आई है। जो खुले जंगल थे। वे झाड़ियों में बदल गए।
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झाड़ियों वाला क्षेत्रफल जो 2017 में 64 वर्ग किलोमीटर था। वह 2019 में बढ़कर 75.14 वर्ग किलोमीटर हो गया। खुला जंगल वह है, जहां पेडों की कैनोपी का आवरण 10 प्रतिशत से 40 प्रतिशत है और झड़ियों का क्षेत्र वह कहलाता है जहां 10 प्रतिशत कैनोपी का आवरण कवर से भी कम है।
हर साल एक व्यक्ति, एक पेड़ लगाए
आगरा डवलपमेंट फाउंडेशन (एडीएफ) के सचिव केसी जैन के मुताबिक हर साल एक व्यक्ति एक पेड़ लगाए और जो सरकारी एजेंसियां पेड़ लगाने का दावा करती हैं, उसमें पारदर्शिता बरती जाए। उसका एक-एक आंकड़ा फोटो के साथ वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जा सके।
जियो टैगिंग के जरिए कभी भी उन्हें जांचा जा सके। टीटीजेड अथॉरिटी के सदस्य इंजीनियर उमेश शर्मा का कहना है कि आगरा के जंगलों में विलायती बबूल पूरी तरह से छा गया है। इन जंगलों से बबूल हटाकर देशी प्रजाति के वृक्षों को लगाया जाए, ताकि जैव विविधता कायम रहे। पौधारोपण एक दिन के स्थान पर दो माह का कार्यक्रम होना चाहिए।
आगरा डवलपमेंट फाउंडेशन (एडीएफ) के सचिव केसी जैन के मुताबिक हर साल एक व्यक्ति एक पेड़ लगाए और जो सरकारी एजेंसियां पेड़ लगाने का दावा करती हैं, उसमें पारदर्शिता बरती जाए। उसका एक-एक आंकड़ा फोटो के साथ वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जा सके।
जियो टैगिंग के जरिए कभी भी उन्हें जांचा जा सके। टीटीजेड अथॉरिटी के सदस्य इंजीनियर उमेश शर्मा का कहना है कि आगरा के जंगलों में विलायती बबूल पूरी तरह से छा गया है। इन जंगलों से बबूल हटाकर देशी प्रजाति के वृक्षों को लगाया जाए, ताकि जैव विविधता कायम रहे। पौधारोपण एक दिन के स्थान पर दो माह का कार्यक्रम होना चाहिए।