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गणित को रटाएं नहीं, बच्चों को समझाएं
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सुदिती ग्लोबल स्कूल में गणित की दो दिवसीय कार्यशाला में जानकारी देते शिक्षक।
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद के निर्देशन में नगर के सुदिती ग्लोबल एकेडमी में दो दिवसीय गणित कार्यशाला का शुभारंभ हो गया। कार्यशाला में गणित के विद्वानों ने शिक्षकों को आधुनिक विधियों का ज्ञान कराया गया। विषय विषेशज्ञ डॉ. राजपाल सिंह ने कहा कि हम गणित की पढ़ाई को जिंदगी से जुड़े उदाहरणों से नहीं जोड़ पाते।
किसी भी विषय में मौलिक चीजों को समझना जरूरी होता है। गणित भी ऐसी ही मौलिक चीज है। गिनती का ज्ञान शिक्षा के पहले चरण से ही शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि हर बच्चे को गणित के महत्व की जानकारी होना आवश्यक है। इसके लिए हमें विभिन्न प्रकार की गतिविधियां व क्रियाकलाप कराने चाहिए।
इससे विद्यार्थियों के मन में गणित विषय के बारे में रुचि पैदा हो। बच्चों को शुरू से ही गणित को रटवाने की बजाय उसे समझाकर सिखाना आवश्यक है। केवल मौखिक निर्देश काफी नहीं है। अध्यापक की जटिल भाषा बच्चों को समझ नहीं आती और डर से बच्चा कुछ पूछ नहीं पाता, जिसका नतीजा होता है कि बच्चे के लिए गणित फोबिया बन जाता है।
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बच्चों को इस स्थित से निकालने के लिए उनके मानसिक स्तर के अनुसार उन्हें समझाया जाए। प्रशिक्षक सौरभ शर्मा ने कहा कि अध्यापक अक्सर सोचते हैं कि बच्चों में समझने की क्षमता नहीं है। परिणामस्वरूप बच्चा गणित से डरने लगता है। अत: अध्यापकों को पढ़ाने के नवीन तौर तरीकों को अपनाना चाहिए, ताकि छात्र व अध्यापक के बीच के फासले को कम किया जा सके।
कार्यशाला में मैनपुरी, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, कासगंज एवं एटा के विभिन्न विद्यालयों के 70 से अधिक अध्यापक-अध्यापिकाओं ने सहभागिता की।
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किसी भी विषय में मौलिक चीजों को समझना जरूरी होता है। गणित भी ऐसी ही मौलिक चीज है। गिनती का ज्ञान शिक्षा के पहले चरण से ही शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि हर बच्चे को गणित के महत्व की जानकारी होना आवश्यक है। इसके लिए हमें विभिन्न प्रकार की गतिविधियां व क्रियाकलाप कराने चाहिए।
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इससे विद्यार्थियों के मन में गणित विषय के बारे में रुचि पैदा हो। बच्चों को शुरू से ही गणित को रटवाने की बजाय उसे समझाकर सिखाना आवश्यक है। केवल मौखिक निर्देश काफी नहीं है। अध्यापक की जटिल भाषा बच्चों को समझ नहीं आती और डर से बच्चा कुछ पूछ नहीं पाता, जिसका नतीजा होता है कि बच्चे के लिए गणित फोबिया बन जाता है।
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बच्चों को इस स्थित से निकालने के लिए उनके मानसिक स्तर के अनुसार उन्हें समझाया जाए। प्रशिक्षक सौरभ शर्मा ने कहा कि अध्यापक अक्सर सोचते हैं कि बच्चों में समझने की क्षमता नहीं है। परिणामस्वरूप बच्चा गणित से डरने लगता है। अत: अध्यापकों को पढ़ाने के नवीन तौर तरीकों को अपनाना चाहिए, ताकि छात्र व अध्यापक के बीच के फासले को कम किया जा सके।
कार्यशाला में मैनपुरी, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, कासगंज एवं एटा के विभिन्न विद्यालयों के 70 से अधिक अध्यापक-अध्यापिकाओं ने सहभागिता की।