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10 साल से शौचालय बनवाने की जंग लड़ रही ये महिला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 21 Jan 2018 01:06 PM IST
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सुमन
- फोटो : अमर उजाला
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स्वच्छ भारत मिशन, खुले में शौच मुक्त अभियान के नाम पर शासन और प्रशासन बड़े दावे कर रहे हैं। नगर निगम अधिकारी बड़े आंकड़े गिनाते हैं, लेकिन आगरा में हकीकत इससे इतर है।
शहर के प्रमुख मोहल्ले काजीपाड़ा के टीला शेख मनु में शौचालय के निर्माण को एक महिला पिछले करीब 10 वर्ष से जंग लड़ रही है, लेकिन अभी तक उसके मोहल्ले में शौचालय नहीं बना है। पार्षद से सांसद तक का दरवाजा खटखटाया है, लेकिन कहीं उसे वोट न देने का ताना मिला तो कहीं कोरा आश्वासन।
शहर का प्रमुख क्षेत्र है काजीपाड़ा। यहां एक ही एक मलिन बस्ती है टीला शेख मनु, यहां सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इसकी आबादी करीब 2500 है। शौचालय न होने के कारण बस्ती के लोगों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
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शहर के प्रमुख मोहल्ले काजीपाड़ा के टीला शेख मनु में शौचालय के निर्माण को एक महिला पिछले करीब 10 वर्ष से जंग लड़ रही है, लेकिन अभी तक उसके मोहल्ले में शौचालय नहीं बना है। पार्षद से सांसद तक का दरवाजा खटखटाया है, लेकिन कहीं उसे वोट न देने का ताना मिला तो कहीं कोरा आश्वासन।
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शहर का प्रमुख क्षेत्र है काजीपाड़ा। यहां एक ही एक मलिन बस्ती है टीला शेख मनु, यहां सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इसकी आबादी करीब 2500 है। शौचालय न होने के कारण बस्ती के लोगों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
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इस शर्मनाक स्थिति को देखकर बस्ती की महिला सुमन कश्यप ने वहां शौचालय बनवाने का बीड़ा तो उठा लिया है, लेकिन उसे क्या पता था सरकारी तंत्र के मकड़जाल से शौचालय निकालना इतना मुश्किल होगा।
पिछले 10 वर्ष से सुमन शहर के नेताओं और नगर निगम में चक्कर काट रही हैं, लेकिन उसकी मांग पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। एक बार कुछ कर्मचारी मोहल्ले में गए थे तो जिस स्थान पर सुमन शौचालय बनवाना चाहती थी।
उस जगह को रेलवे की बताकर प्रस्ताव खारिज कर दिया। तब सुमन ने पास के ही जर्जर शौचालय के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव दिया, लेकिन वहां भी उसकी कोई मदद नहीं हुई, लेकिन सुमन ने हार नहीं मानी है।
वह अब भी नगर निगम के चक्कर काट रही है। गुरुवार को सुमन ने नगर आयुक्त अरुण प्रकाश को पत्र देकर वहां शौचालय निर्माण की मांग की है।
पिछले 10 वर्ष से सुमन शहर के नेताओं और नगर निगम में चक्कर काट रही हैं, लेकिन उसकी मांग पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। एक बार कुछ कर्मचारी मोहल्ले में गए थे तो जिस स्थान पर सुमन शौचालय बनवाना चाहती थी।
उस जगह को रेलवे की बताकर प्रस्ताव खारिज कर दिया। तब सुमन ने पास के ही जर्जर शौचालय के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव दिया, लेकिन वहां भी उसकी कोई मदद नहीं हुई, लेकिन सुमन ने हार नहीं मानी है।
वह अब भी नगर निगम के चक्कर काट रही है। गुरुवार को सुमन ने नगर आयुक्त अरुण प्रकाश को पत्र देकर वहां शौचालय निर्माण की मांग की है।
अपना दुख भूल गई
सुमन के भाई महेश कश्यप ने बताया कि सुमन के पति की मौत एक हादसे में हो गई थी। उसके बाद से वह ससुराल छोड़कर मायके (महेश के पास) में आकर रहने लगी है।
महेश अपने बड़े भाई की दुकान पर काम करते हैं। महेश का कहना है कि पति की मौत के बाद सुमन पर तो दु:खों को पहाड़ का टूट पड़ा था, लेकिन अब वह अपने दु:ख को भूलकर बस्ती वालों के कुछ करना चाहती है।
सुमन का कहना है कि बड़ी शर्मनाक स्थिति होती है, जब बस्ती की महिलाओं को रेल की पटरियों पर बैठना पड़ता है। सुमन कश्यप का कहना है कि बस्ती का शौचालय जर्जर हो चुका है। जिस जगह उन्होंने प्रस्ताव दिया है, वह रेलवे की है।
इसलिए पुराने शौचालय को ही नए सिरे से बनाने के लिए नगर निगम के चक्कर काट रही हैं। नगर आयुक्त आनंद वर्धन, राम विशाल मिश्र, विनय शंकर पांडे, डीके सिंह, इंद्र विक्रम सिंह आदि को शिकायत की है।
महेश अपने बड़े भाई की दुकान पर काम करते हैं। महेश का कहना है कि पति की मौत के बाद सुमन पर तो दु:खों को पहाड़ का टूट पड़ा था, लेकिन अब वह अपने दु:ख को भूलकर बस्ती वालों के कुछ करना चाहती है।
सुमन का कहना है कि बड़ी शर्मनाक स्थिति होती है, जब बस्ती की महिलाओं को रेल की पटरियों पर बैठना पड़ता है। सुमन कश्यप का कहना है कि बस्ती का शौचालय जर्जर हो चुका है। जिस जगह उन्होंने प्रस्ताव दिया है, वह रेलवे की है।
इसलिए पुराने शौचालय को ही नए सिरे से बनाने के लिए नगर निगम के चक्कर काट रही हैं। नगर आयुक्त आनंद वर्धन, राम विशाल मिश्र, विनय शंकर पांडे, डीके सिंह, इंद्र विक्रम सिंह आदि को शिकायत की है।
इसे कर चुकी शिकायत
पार्षद लेकर पूर्व विधायक गुटियारी लाल दुबेश, विधायक योगेंद्र उपाध्याय, विधायक जीएस धर्मेश, सांसद रामशंकर कठेरिया को भी समस्या बताई है। उन्होंने बताया कि एक विधायक ने तो यहां तक कह दिया तुम्हारे लोगों ने तो मुझे वोट ही नहीं दिए तो मैं क्यों वहां शौचालय क्यों बनवाऊं।
सुमन कश्यप का कहना है कि बस्ती में शौचालय न होने की वजह से बच्चे नालियों पर बैठते हैं। महिलाओं और पुरुषों को को रेल पटरी पर जाना पड़ता है। यह स्थिति बड़ी शर्मनाक होती है। सरकार खुले में शौच से मुक्ति दिलाने की बात कह रही है।
लेकिन मैं पिछले करीब 10 वर्ष से नेताओं और नगर निगम के चक्कर काट रही हूं, लेकिन बस्ती में शौचालय की व्यवस्था नहीं हो रही है, परंतु मैं हार मानने वाली नहीं हूं।
नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने कहा कि अब यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। यदि बस्ती में शौचालय नहीं है और स्थान उपलब्ध है तो वहां नया शौचालय बनाया जाएगा और यदि पुराने शौचालय को नए तरीके से बनवाने से समस्या का समाधान होता है तो उसकी मरम्मत कराएंगे।
सुमन कश्यप का कहना है कि बस्ती में शौचालय न होने की वजह से बच्चे नालियों पर बैठते हैं। महिलाओं और पुरुषों को को रेल पटरी पर जाना पड़ता है। यह स्थिति बड़ी शर्मनाक होती है। सरकार खुले में शौच से मुक्ति दिलाने की बात कह रही है।
लेकिन मैं पिछले करीब 10 वर्ष से नेताओं और नगर निगम के चक्कर काट रही हूं, लेकिन बस्ती में शौचालय की व्यवस्था नहीं हो रही है, परंतु मैं हार मानने वाली नहीं हूं।
नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने कहा कि अब यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। यदि बस्ती में शौचालय नहीं है और स्थान उपलब्ध है तो वहां नया शौचालय बनाया जाएगा और यदि पुराने शौचालय को नए तरीके से बनवाने से समस्या का समाधान होता है तो उसकी मरम्मत कराएंगे।