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यूपीः दम तोड़ गई जननी सुरक्षा योजना, प्रसूता ने सड़क पर जन्मा बच्चा
टीम डिजिटल/अमर उजाला पिनाहट (आगरा)
Updated Sat, 05 Aug 2017 09:13 PM IST
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गर्भवती
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश में एंबुलेंस चालकों की मनमानी से जननी सुरक्षा योजना दम तोड़ गई है। शुक्रवार को मथुरा में एक प्रसूता को बैलगाड़ी में अस्पताल ले जाने का मामला सामने आया था। शनिवार को आगरा के पिनाहट में एंबुलेंस न मिलने से एक गर्भवती महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया।
बता दें कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित जननी सुरक्षा योजना में सरकार ने गर्भवती महिला को सरकारी एंबुलेंस से निशुल्क अस्पताल तक ले जाने की व्यवस्था की है। हाल ही में यूपी में 108 और 102 एंबुलेंस चालकों के मरीजों को लौटाने का मामला सामने आया है। उनका कहना है कि उन्हें डीजल के लिए भुगतान नहीं किया गया।
इसी के चलते शुक्रवार के मथुरा के राया में एक पति अपनी गर्भवती पत्नी को बैलगाड़ी में लेकर अस्पताल आया। वहीं आगरा के पिनाहट में तो हुई घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है।
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पिनाहट में बसई अरेला के गांव बीधापुरा निवासी सुभाष निषाद की 30 वर्षीय पत्नी रामकेशर को शनिवार को सुबह प्रसव पीड़ा हुई तो परिजनों ने आशा और 108 एंबुलेंस को सूचना दी। काफी इंतजार के बाद एंबुलेंस नहीं आई तो सुभाष बाइक से ही पत्नी और एक अन्य महिला को लेकर सीएचसी पिनाहट के लिए चल पड़ा।
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बता दें कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित जननी सुरक्षा योजना में सरकार ने गर्भवती महिला को सरकारी एंबुलेंस से निशुल्क अस्पताल तक ले जाने की व्यवस्था की है। हाल ही में यूपी में 108 और 102 एंबुलेंस चालकों के मरीजों को लौटाने का मामला सामने आया है। उनका कहना है कि उन्हें डीजल के लिए भुगतान नहीं किया गया।
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इसी के चलते शुक्रवार के मथुरा के राया में एक पति अपनी गर्भवती पत्नी को बैलगाड़ी में लेकर अस्पताल आया। वहीं आगरा के पिनाहट में तो हुई घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है।
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पिनाहट में बसई अरेला के गांव बीधापुरा निवासी सुभाष निषाद की 30 वर्षीय पत्नी रामकेशर को शनिवार को सुबह प्रसव पीड़ा हुई तो परिजनों ने आशा और 108 एंबुलेंस को सूचना दी। काफी इंतजार के बाद एंबुलेंस नहीं आई तो सुभाष बाइक से ही पत्नी और एक अन्य महिला को लेकर सीएचसी पिनाहट के लिए चल पड़ा।
रास्ते में खत्म हुआ बाइक का पेट्रोल
पिनाहट से दो किलोमीटर पहले बिजलीघर के पास बाइक में पेट्रोल खत्म हो गया। फरियाद करने पर भी राहगीरों से मदद नहीं मिली। इसी दौरान सुबह 7:20 बजे रामकेशर ने बीच सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद महिला शर्म के मारे रोने लगी। इस बीच परिजनों ने सीएचसी में भी सूचना दी लेकिन कोई नहीं पहुंचा।
एक बार फिर 108 एंबुलेंस सेवा पर फोन किया। इस बार भी एंबुलेंस व्यस्त होने की बात कहकर उधर से फोन काट दिया गया। बाद में परिजन महिला को लेकर निजी वाहन से सीएचसी तक ले गए। वहां 102 एंबुलेंस खड़ी देख परिवारीजन भड़क गए।
उधर, बाह के बासौनी के गुंगावली गांव की पूनम पत्नी रामू को शनिवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया। आधे घंटे के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची तो उसे टेंपो में बैठाकर ही लोग सीएचसी ले जाने लगे।
रास्ते में महिला ने टेंपो में ही बच्ची को जन्म दिया। सूचना पर पहुंचे सीएचसी स्टाफ ने जच्चा-बच्चा को संभाला। सीएचसी अधीक्षक डा. धीरेन्द्र कुमार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि एंबुलेंस का कंट्रोल उनके अधीन नहीं है।
एक बार फिर 108 एंबुलेंस सेवा पर फोन किया। इस बार भी एंबुलेंस व्यस्त होने की बात कहकर उधर से फोन काट दिया गया। बाद में परिजन महिला को लेकर निजी वाहन से सीएचसी तक ले गए। वहां 102 एंबुलेंस खड़ी देख परिवारीजन भड़क गए।
उधर, बाह के बासौनी के गुंगावली गांव की पूनम पत्नी रामू को शनिवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया। आधे घंटे के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची तो उसे टेंपो में बैठाकर ही लोग सीएचसी ले जाने लगे।
रास्ते में महिला ने टेंपो में ही बच्ची को जन्म दिया। सूचना पर पहुंचे सीएचसी स्टाफ ने जच्चा-बच्चा को संभाला। सीएचसी अधीक्षक डा. धीरेन्द्र कुमार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि एंबुलेंस का कंट्रोल उनके अधीन नहीं है।