15 फीट गहरे बोरवेल से आ रही थीं रोने की अजीब आवाजें, किसानों ने झांककर देखा तो रह गए हैरान
- आगरा जिले के बड़ौदा सदर गांव में गुरुवार को 15 फीट गहरे बोरवेल में एक सियार गिर गया। उसको वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने सुरक्षित बहार निकाला और ऑनसाइट मेडिकल परिक्षण के बाद उसे वापस जंगल में छोड़ दिया गया।
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आगरा जिले के बड़ौदा सदर गांव में गुरुवार की सुबह काम पर जा रहे किसानों ने बोरवेल के अंदर से अजीब सी रोने की आवाज आती सुनी, जब पास जाकर देखा तो किसान हैरान रह गए। बोरवेल में सियार का एक शावक पड़ा था, जो बाहर आने का प्रयास कर रहा था। किसानों ने तुरंत वाइल्डलाइफ एसओएस को इसकी सूचना दी।
वन्यजीव संरक्षण संस्था से तीन सदस्यों का बचाव दल उपकरणों के साथ घटनास्थल पर पहुंचा। सियार के शावक को बाहर निकाला। टीम ने वहीं पर उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया। इसके बाद शावक को वापस पास ही के जंगल में छोड़ दिया गया।
किसान राम किशन सोलंकी ने बताया कि यह संभव है कि सियार रात के समय बोरवेल में गिर गया होगा। हमने तुरंत वाइल्डलाइफ एसओएस को बुलाया क्योंकि उन्होंने अक्सर हमारे खेतों में घूमने वाले जानवरों की मदद की है और उन्हें ऐसी ही अलग-अलग परिस्थितियों से बचाया है।
इंसान और जानवर के लिए खुले कुएं एवं बोरवेल हैं खतरा
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि खुले कुएं एवं बोरवेल न केवल वन्यजीवों के लिए बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए भी बहुत बड़ा खतरा हैं। कुओं को ढंकने की तत्काल आवश्यकता है, विशेष रूप से वे जो मानव बस्तियों के नजदीक हैं।
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजुराज एम.वी, ने कहा, “एक जंगली जानवर को बचाने के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। वाइल्डलाइफ एसओएस की रेस्क्यू टीम प्रशिक्षित हैं और आपातकालीन स्थितियों को विभिन्न रूपों से संभालने में सक्षम हैं। ”
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी ने बताया कि बोरवेल से निकाला गया सियार गोल्डन जैकाल या इंडियन जैकाल के रूप में भी जाना जाता है। यह प्रजाति अपने प्राकृतिक आवास के विनाश और शिकार की आपूर्ति जैसे प्राथमिक खतरों का सामना कर रही है। शिकार की तलाश इसे शहरी आवासों के करीब ले आई है, जिसके कारण वह संघर्ष के शिकार होते हैं।