{"_id":"575b1fed4f1c1bca389c6d53","slug":"when-will-free-tajnagri-s-jawaharlal-bagh","type":"story","status":"publish","title_hn":"कब मुक्त होंगे ताजनगरी के ‘जवाहर बाग’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कब मुक्त होंगे ताजनगरी के ‘जवाहर बाग’
अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 11 Jun 2016 01:45 AM IST
विज्ञापन
कब मुक्त होंगे ताजनगरी के ‘जवाहर बाग’
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एडीए के ईडब्ल्यूएस भवनों में सालों से अवैध रूप से रह रहे सैकड़ों लोग
जवाहरपुरम में चिह्नित किए जा चुके हैं लोग, फिर भी नहीं हो पा रही कार्रवाई
मथुरा के जवाहर बाग की चारदीवारी के पीछे क्या चल रहा था, यहां कौन लोग रह रहे थे, किस तरह की गतिविधि को अंजाम दे रहे थे? ऐसे तमाम सवालों से जब दो साल बाद पर्दा उठा तो सच्चाई जानने के बाद आम लोग तो दूर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी तक हैरान रह गए। ऐसे ही तमाम अनजान लोगों ने शहर के ‘जवाहर बागों’ पर कब्जा कर रखा है।
निर्बल आय वर्ग के लिए आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने कालिंदी विहार में ईडब्ल्यूएस क्वार्टर बनाए थे। कुछ क्वार्टरों का आवंटन करने के बाद एडीए ने इस ओर मुड़कर नहीं देखा। स्थिति ये है कि कालिंदी विहार के सी ब्लॉक में बने लगभग 150 क्वार्टरों में से अधिकांश पर कब्जा हो चुका है। ये लोेग सालों से आवास घेरे बैठे हैं। ये लोग कौन हैं और किस आधार पर रह रहे हैं, एडीए ने ये कभी जानने की कोशिश नहीं की। स्थानीय लोगों की मानें तो एडीए के अधिकारी कई बार क्षेत्र में तो आए लेकिन सिर्फ कब्जेधारकों को क्वार्टर खाली करने की चेतावनी देकर लौट गए। बताया जा रहा है कि इन क्वार्टरों में सैकड़ों लोग परिवार सहित रह रहे हैं। ऐसे में मुश्किल ये है कि सालों से हाथ पर हाथ रखे बैठे एडीए अधिकारियों के लिए अब ये मथुरा का जवाहर बाग न बन जाए।
शहीद नगर में भी अवैध कब्जे
एडीए द्वारा शहीद नगर में भी बनाए गए अधिकांश ईडब्ल्यूएस क्वार्टरों पर कब्जे हो चुके हैं। इसका खुलासा पिछले साल एक ईडब्ल्यूएस क्वार्टर ध्वस्त होने के बाद हुआ। इस हादसे में मां-बेटी की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। इसके बाद एडीए ने इन क्वार्टरों में रहने वालों का रिकॉर्ड तैयार किया था, तब पता चला था कि अधिकांश क्वार्टरों में आवंटी नहीं रह रहे। हालांकि इस फाइल को दबा दिया गया है। हादसे की जांच भी पूरी नहीं हो पाई है।
विज्ञापन
जवाहरपुरम में तीन दर्जन भवनों पर कब्जे
कालिंदी विहार और शहीद नगर के ईडब्ल्यूएस क्वार्टरों पर अवैध कब्जे का रिकॉर्ड भले ही एडीए के पास न हो लेकिन जवाहरपुरम का रिकॉर्ड तैयार कर लिया गया है। यहां तीन दर्जन से अधिक भवनों पर अवैध कब्जे हैं। हालांकि इन्हें खाली कराने के लिए मथुरा की तरह यहां भी लंबे समय से कवायद चल रही है लेकिन अब तक इन्हें खाली नहीं कराया जा सका है।
क्वार्टर खरीदने के लिए हमने किसी व्यक्ति को 30 हजार रुपये दिए थे। रकम लेने के बाद वह गायब हो गया। यहां हम काफी दिनों से रह रहे हैं। ये क्वार्टर फिलहाल हमारे नाम आवंटित नहीं है।
- तुलसी, कालिंदी विहार, सी ब्लॉक
हमारे पास इस क्वार्टर का आवंटन नहीं है। न ही हम किसी को किराया देते। काफी दिनों से हम यहां रह रहे हैं।
- भंवर सिंह, कालिंदी विहार, सी ब्लॉक
मैं अपने बहन के क्वार्टर में रह रही हूं। ब्लॉक के बाकी क्वार्टरों में लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। हम नहीं जानते कि ये कौन लोग हैं और कहां से आए हैं।
- विमलेश, कालिंदी विहार, सी ब्लॉक
जवाहरपुरम में एडीए के भवनों में रह रहे अवैध लोगों को चिह्नित किया गया है। जल्द ही यहां के भवनों को खाली कराया जाएगा। कालिंदी विहार और शहीद नगर के भवनों की भी जल्द जांच कराई जाएगी।
- बाबू सिंह, अपर सचिव, एडीए
बरसों पुरानी जमीन पर रेल विभाग ने लिया कब्जा
मथुरा के जवाहर बाग कांड से सबक लेकर रेल विभाग ने भी जमीनों को कब्जामुक्त करने का अभियान शुरू कर दिया है। शुक्रवार की सुबह रेलवे अधिकारियों ने पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के साथ बरसों पुरानी जमीन को कब्जा मुक्त कराया। बाद में रेल विभाग ने जमीन को कब्जे में लेकर सील लगा दी।
बता दें, यमुना ब्रिज इलाके में हाथी घाट के पास बरसों पहले लीज पर दी गई जमीन को एक के बाद दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित कर दिया गया। इस जमीन पर ट्रांसपोर्ट कंपनी का दफ्तर चल रहा था। इस जमीन को लेकर न्यायालय में वाद चल रहा था, जिसका फैसला रेल विभाग के पक्ष में हो चुका था। शुक्रवार को रेलवे की इंजीनियरिंग शाखा के अधिकारी, आरपीएफ, जीआरपी के साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट रेखा एस. चौहान, सीओ छत्ता बीएस त्यागी के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने जमीन से अतिक्रमण हटाने के बाद कब्जा मुक्त करा लिया।
विज्ञापन
जवाहरपुरम में चिह्नित किए जा चुके हैं लोग, फिर भी नहीं हो पा रही कार्रवाई
मथुरा के जवाहर बाग की चारदीवारी के पीछे क्या चल रहा था, यहां कौन लोग रह रहे थे, किस तरह की गतिविधि को अंजाम दे रहे थे? ऐसे तमाम सवालों से जब दो साल बाद पर्दा उठा तो सच्चाई जानने के बाद आम लोग तो दूर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी तक हैरान रह गए। ऐसे ही तमाम अनजान लोगों ने शहर के ‘जवाहर बागों’ पर कब्जा कर रखा है।
निर्बल आय वर्ग के लिए आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने कालिंदी विहार में ईडब्ल्यूएस क्वार्टर बनाए थे। कुछ क्वार्टरों का आवंटन करने के बाद एडीए ने इस ओर मुड़कर नहीं देखा। स्थिति ये है कि कालिंदी विहार के सी ब्लॉक में बने लगभग 150 क्वार्टरों में से अधिकांश पर कब्जा हो चुका है। ये लोेग सालों से आवास घेरे बैठे हैं। ये लोग कौन हैं और किस आधार पर रह रहे हैं, एडीए ने ये कभी जानने की कोशिश नहीं की। स्थानीय लोगों की मानें तो एडीए के अधिकारी कई बार क्षेत्र में तो आए लेकिन सिर्फ कब्जेधारकों को क्वार्टर खाली करने की चेतावनी देकर लौट गए। बताया जा रहा है कि इन क्वार्टरों में सैकड़ों लोग परिवार सहित रह रहे हैं। ऐसे में मुश्किल ये है कि सालों से हाथ पर हाथ रखे बैठे एडीए अधिकारियों के लिए अब ये मथुरा का जवाहर बाग न बन जाए।
विज्ञापन
शहीद नगर में भी अवैध कब्जे
एडीए द्वारा शहीद नगर में भी बनाए गए अधिकांश ईडब्ल्यूएस क्वार्टरों पर कब्जे हो चुके हैं। इसका खुलासा पिछले साल एक ईडब्ल्यूएस क्वार्टर ध्वस्त होने के बाद हुआ। इस हादसे में मां-बेटी की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। इसके बाद एडीए ने इन क्वार्टरों में रहने वालों का रिकॉर्ड तैयार किया था, तब पता चला था कि अधिकांश क्वार्टरों में आवंटी नहीं रह रहे। हालांकि इस फाइल को दबा दिया गया है। हादसे की जांच भी पूरी नहीं हो पाई है।
विज्ञापन
जवाहरपुरम में तीन दर्जन भवनों पर कब्जे
कालिंदी विहार और शहीद नगर के ईडब्ल्यूएस क्वार्टरों पर अवैध कब्जे का रिकॉर्ड भले ही एडीए के पास न हो लेकिन जवाहरपुरम का रिकॉर्ड तैयार कर लिया गया है। यहां तीन दर्जन से अधिक भवनों पर अवैध कब्जे हैं। हालांकि इन्हें खाली कराने के लिए मथुरा की तरह यहां भी लंबे समय से कवायद चल रही है लेकिन अब तक इन्हें खाली नहीं कराया जा सका है।
क्वार्टर खरीदने के लिए हमने किसी व्यक्ति को 30 हजार रुपये दिए थे। रकम लेने के बाद वह गायब हो गया। यहां हम काफी दिनों से रह रहे हैं। ये क्वार्टर फिलहाल हमारे नाम आवंटित नहीं है।
- तुलसी, कालिंदी विहार, सी ब्लॉक
हमारे पास इस क्वार्टर का आवंटन नहीं है। न ही हम किसी को किराया देते। काफी दिनों से हम यहां रह रहे हैं।
- भंवर सिंह, कालिंदी विहार, सी ब्लॉक
मैं अपने बहन के क्वार्टर में रह रही हूं। ब्लॉक के बाकी क्वार्टरों में लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। हम नहीं जानते कि ये कौन लोग हैं और कहां से आए हैं।
- विमलेश, कालिंदी विहार, सी ब्लॉक
जवाहरपुरम में एडीए के भवनों में रह रहे अवैध लोगों को चिह्नित किया गया है। जल्द ही यहां के भवनों को खाली कराया जाएगा। कालिंदी विहार और शहीद नगर के भवनों की भी जल्द जांच कराई जाएगी।
- बाबू सिंह, अपर सचिव, एडीए
बरसों पुरानी जमीन पर रेल विभाग ने लिया कब्जा
मथुरा के जवाहर बाग कांड से सबक लेकर रेल विभाग ने भी जमीनों को कब्जामुक्त करने का अभियान शुरू कर दिया है। शुक्रवार की सुबह रेलवे अधिकारियों ने पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के साथ बरसों पुरानी जमीन को कब्जा मुक्त कराया। बाद में रेल विभाग ने जमीन को कब्जे में लेकर सील लगा दी।
बता दें, यमुना ब्रिज इलाके में हाथी घाट के पास बरसों पहले लीज पर दी गई जमीन को एक के बाद दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित कर दिया गया। इस जमीन पर ट्रांसपोर्ट कंपनी का दफ्तर चल रहा था। इस जमीन को लेकर न्यायालय में वाद चल रहा था, जिसका फैसला रेल विभाग के पक्ष में हो चुका था। शुक्रवार को रेलवे की इंजीनियरिंग शाखा के अधिकारी, आरपीएफ, जीआरपी के साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट रेखा एस. चौहान, सीओ छत्ता बीएस त्यागी के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने जमीन से अतिक्रमण हटाने के बाद कब्जा मुक्त करा लिया।