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जल निगम की चूक से हाईवे पर 'अटक' गया आधे शहर का 'गंगाजल'
Sun, 20 Jan 2019 06:57 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 20 Jan 2019 06:57 PM IST
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आगरा में गंगाजल सिकंदरा वाटर वर्क्स तक तो पहुंच गया है, लेकिन जीवनी मंडी वाटर वर्क्स तक की राह में कई रोड़े हैं। सबसे बड़ी अड़चन नेशनल हाईवे अथॉरिटी (एनएचएआई) की ओर से है।
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जब तक एनएचएआई की अनुमति नहीं मिलेगी तब तक पाइप लाइन नहीं डाली जा सकेगी। जीवनी मंडी वाटर वर्क्स को गंगाजल से कनेक्ट करने के लिए करीब 160 मीटर लंबी इस पाइप लाइन का जुड़ना जरूरी है।
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बुलंदशहर के पालड़ा फाल से 150 क्यूसेक गंगाजल लिया जा रहा है। इसमें से 10 क्यूसेक मथुरा को दिया जा रहा है। शेष 140 क्यूसेक गंगाजल को सिकंदरा वाटर वर्क्स और जीवनी मंडी वाटर वर्क्स तक पहुंचना है।
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160 मीटर करनी है खोदाई
यहां गंगाजल में यमुना का ट्रीटेड जल मिलाकर जनता को आपूर्ति किया जाएगा। सिकंदरा वाटर वर्क्स से करीब 72 एमएलडी गंगाजल की आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है। जीवनी मंडी वाटर वर्क्स तक गंगाजल नहीं पहुंच पा रहा है।
यहां तक पानी पहुंचाने के लिए सिकंदरा से कमला नगर, बल्केश्वर तक तो राइजिंग मैन डाल दी गई है लेकिन हाईवे को क्रास करने के लिए करीब 160 मीटर खोदाई करके पाइप लाइन डालनी है।
गंगाजल प्रोजेक्ट के तहत अधिकारियों की सबसे बड़ी लापरवाही यह रही है कि हाईवे अथारिटी की अनुमति पहले से नहीं ली गई। अब जब गंगाजल आ गया है, तब अफसरों को याद आई है।
यहां तक पानी पहुंचाने के लिए सिकंदरा से कमला नगर, बल्केश्वर तक तो राइजिंग मैन डाल दी गई है लेकिन हाईवे को क्रास करने के लिए करीब 160 मीटर खोदाई करके पाइप लाइन डालनी है।
गंगाजल प्रोजेक्ट के तहत अधिकारियों की सबसे बड़ी लापरवाही यह रही है कि हाईवे अथारिटी की अनुमति पहले से नहीं ली गई। अब जब गंगाजल आ गया है, तब अफसरों को याद आई है।
जल निगम ने मांगी एनओसी
जल निगम और गंगाजल प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी से एनओसी मांगी है। हाईवे अथारिटी के सामने संकट यह है कि चलते हाईवे पर खोदाई की इजाजत कैसे दें। जल निगम के पत्र पर हाईवे अथारिटी भी विकल्पों की तलाश में लगी है।
90 एमएलडी प्लांट के जीर्णोद्धार की गति बढ़ी
गंगाजल प्रोजेक्ट के तहत जीवनी मंडी वाटर वर्क्स का जीर्णोद्धार भी किया जाना है। यहां तीन 45 और तीन 90-90 एमएलडी के प्लांट हैं। वोल्टास कंपनी ने 45 एमएलडी के प्लांट का जीर्णोद्धार कर दिया है।
अब 90 एमएलडी के एक प्लांट पर काम चल रहा है। इसके बाद दूसरे 90 एमएलडी के प्लांट का सुधार होगा। वोल्टास कंपनी के कर्मचारियों ने काम तेज कर दिया है।
90 एमएलडी प्लांट के जीर्णोद्धार की गति बढ़ी
गंगाजल प्रोजेक्ट के तहत जीवनी मंडी वाटर वर्क्स का जीर्णोद्धार भी किया जाना है। यहां तीन 45 और तीन 90-90 एमएलडी के प्लांट हैं। वोल्टास कंपनी ने 45 एमएलडी के प्लांट का जीर्णोद्धार कर दिया है।
अब 90 एमएलडी के एक प्लांट पर काम चल रहा है। इसके बाद दूसरे 90 एमएलडी के प्लांट का सुधार होगा। वोल्टास कंपनी के कर्मचारियों ने काम तेज कर दिया है।
गिरते जलस्तर ने बढ़ाई परेशानी
जलकल विभाग के अधिकारियों को भीषण सर्दी में पसीना आ रहा है। यमुना नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। जीवनी मंडी वाटर वर्क्स के इंटेकवेल तक यमुना जल पहुंचाने के लिए बनाई नहर भी कारगर नहीं है। पानी न्यूनतम स्तर (480 फुट) पर पहुंच गया है।
यदि पानी और घटा तो वाटर वर्क्स ठप हो जाएगा। इस स्थिति से निपटने के लिए नहर में लगातार ड्रेजिंग की जा रही है। तब जाकर पानी पहुंच रहा है। 90 एमएलडी का एक प्लांट पहले से ही बंद है। अब पर्याप्त रा वाटर न मिल पाने से समस्या और बढ़ गई है।
यमुना नदी के गिरते जलस्तर पर मेयर, जिलाधिकारी और सिंचाई विभाग को पत्र लिखा गया है लेकिन गोकुल बैराज से अभी तक पानी का डिस्चार्ज नहीं बढ़ा है। इसकी वजह से परेशानी हो रही है।
-आरएस यादव, जीएम जलकल
यदि पानी और घटा तो वाटर वर्क्स ठप हो जाएगा। इस स्थिति से निपटने के लिए नहर में लगातार ड्रेजिंग की जा रही है। तब जाकर पानी पहुंच रहा है। 90 एमएलडी का एक प्लांट पहले से ही बंद है। अब पर्याप्त रा वाटर न मिल पाने से समस्या और बढ़ गई है।
यमुना नदी के गिरते जलस्तर पर मेयर, जिलाधिकारी और सिंचाई विभाग को पत्र लिखा गया है लेकिन गोकुल बैराज से अभी तक पानी का डिस्चार्ज नहीं बढ़ा है। इसकी वजह से परेशानी हो रही है।
-आरएस यादव, जीएम जलकल