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जल संस्थान में जलकर की आड़ में लाखों रुपये का ‘खेल’

Sat, 23 Jan 2016 01:49 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो, अमर उजाला, आगरा Updated Sat, 23 Jan 2016 01:49 AM IST
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Water Institute, under the destroyed millions of rupees 'game'
जल संस्थान में हर साल लाखों रुपये का ‘खेल’ हो रहा है। हजारों रुपये के बिल ले-देकर निपटाए जा रहे हैं। चुनिंदा अधिकारियों और कर्मचारियों की शह पर यह खेल चल रहा है। यही वजह है कि तमाम कोशिशों के बावजूद विभाग का खजाना नहीं भर पा रहा है।
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शहर की प्यास बुझाने में नाकामयाब जल संस्थान के कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपने जेबें भरने में लगे हैं। इसके कुछ उदाहरण आपके सामने हैं। ये तो बानगीभर है। जलकर में घोटालों के अनगिनत मामले हैं। व्यवसायिक उपयोग में वसूले जाने वाले जलकर में तो इससे भी बड़े ‘खेल’ हो रहे हैं। ये कुछ उदाहरण तो उन रिहायशी क्षेत्र के लोगों के हैं जो घरेलू काम के लिए जल संस्थान का पानी लेते हैं। इसी में हजारों रुपये का घोटाला हो गया।
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250 बिलों की जांच की मांग
उत्तर प्रदेश नगर निगम, जल संस्थान कर्मचारी महासंघ ने भी ऐसे ही तमाम घोटालों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने नगर आयुक्त को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि वर्ष 2013 से 2014 के बीच में जलकर जमा न करने पर 1200 लोगों की आरसी काटी गई थीं। इसमें से तहसील से 600 आरसी लौटा दी गईं। महासंघ के महामंत्री यतेंद्र सिंह का कहना है कि महाप्रबंधक व अवर अभियंता ने इनमें संशोधन किए। उनका कहना है कि 77 हजार रुपये के बिल मात्र 15 हजार रुपये में ही निपटा दिए। ऐसे लगभग 200 से 250 बिलों की जांच की मांग की है।
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वेतन के पड़ रहे लाल
शायद ही कोई महीना ऐसा गुजरता होगा, जिस महीने जल संस्थान के अधिकांश कर्मचारियों को वेतन के लिए प्रदर्शन न करना पड़ता हो। महाप्रबंधक हर बार विभाग की वित्तीय हालत खस्ता होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेती हैं। उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही कर्मचारियों को वेतन मिल पाता है।

तबादले के बाद भी नहीं छोड़ा चार्ज
महासंघ ने अवर अभियंता विजय बहादुर सिंह को जोन अधिकारी एवं राजस्व प्रभारी बनाए जाने पर आपत्ति दर्ज की है। महासंघ की ओर से नगर आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि विजय बहादुर का 23 सितंबर 2015 को नगर पालिका, जलेसर में स्थानांतरण हो चुका है, इसके बावजूद उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा। वहीं, महासंघ का यह भी कहना है कि जल संस्थान में एक अधिशासी अभियंता, तीन सहायक अभियंता एवं चार अवर अभियंता हैं लेकिन महाप्रबंधक ने इन सभी को कार्यविहीन करते हुए कनिष्ठ अवर अभियंता विजय बहादुर सिंह को जोन अधिकारी एवं राजस्व प्रभारी बना रखा है।
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