प्रशासनिक स्तर पर अब तक नहीं शुरू हुई वृंदावन कुंभ की तैयारियां, संतों ने जताई चिंता
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हरिद्वार से पहले वृंदावन में संतों के कुंभ को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अभी कोई तैयारी शुरू नहीं हुई है। तीन माह बाद आयोजित होने वाले इस समागम में करीब 20 हजार संतों के शामिल होने का अनुमान था, लेकिन कोरोना के चलते अब तक तैयारियों की स्थिति भी संतों को चिंतित कर रही है।
कोरोना संक्रमण से पहले वृंदावन कुंभ मेले को लेकर प्रशासन ही नहीं शासन स्तर पर भी तैयारियों का दौर शुरू हो गया था, लेकिन अब सब कुछ थम गया है। इस आयोजन में महज तीन माह का वक्त है। चयनित यमुना किनारे के क्षेत्र को समतल भी नहीं किया गया है। कहीं पानी भरा हुआ है तो कहीं अवैध कब्जा है। यहां तक कि यमुना में इस दौरान होने वाले स्नान को लेकर भी तैयारियां नहीं हुई हैं।
यमुना में आज भी वृंदावन के गंदे नालों का पानी सीधे गिर रहा है। देशभर से आने वाले संतों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के लिए भी कोई पहल नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि यहां तैयारियों को शुरू करने से पहले प्रशासनिक अधिकारी हरिद्वार पर नजरें गड़ाए हुए हैं।
मुख्य बिंदु-
- मेला क्षेत्र का क्षेत्रफल 41 हेक्टेयर
- संतों की मौजूदगी का अनुमान 20 हजार
- चयनित जमीन पर अतिक्रमण, जलभराव की समस्या
- यमुना में सीधे गिर रहे हैं वृंदावन के गंदे नाले
समय बहुत कम रह गया
वृंदावन के उमा पीठाधीश्वर स्वामी रामदेवानंद सरस्वती ने कहा कि अब तक वृंदावन कुंभ मेला को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां नजर नहीं आ रही हैं। समय बहुत कम रह गया है। ऐसे में प्रशासन को गंभीरता से चिंतन करते हुए मेला की तैयारियों को शुरू कर देना चाहिए। यह कुंभ की परंपरा से जुड़ा हुआ स्थल है।
शांत बैठा है प्रशासन
बड़ा रास मंडल के महंत लाडली शरण ने कहा कि जल्द ही इस मामले को लेकर संतों की बैठक होने जा रही है। अब तक इस मेला को लेकर स्थानीय प्रशासन शांत बैठा हुआ है। ये अच्छी स्थिति नहीं है। इसी माह देशभर के संत वृंदावन में जुटने जा रहे हैं, जो वृंदावन कुंभ को लेकर मंथन करेंगे।
फूलडोल बिहारी दास ने कहा कि अब मेला की तैयारियों में देरी उचित नहीं है। ज्यादा वक्त वृंदावन कुंभ में नहीं रह गया है। यही हालरत रहे तो संतों को यहां असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। यह वृंदावन की छवि को प्रभावित करेगा और संतों की नाराजगी का कारण भी बन सकता है।
देरी उचित नहीं
सिंह पौर हनुमान मंदिर के महंत सुंदर दास ने कहा कि 13-14 अक्तूबर को वृंदावन में स्थानीय संतों की बैठक होने जा रही है। इसके बाद 15 अक्तूबर को अखाड़ा परिषद की बैठक होगी। इन दोनों ही बैठकों में वृंदावन कुंभ को लेकर चर्चा होनी है। स्थानीय स्तर पर मेला की तैयारियों में की जा रही देरी उचित नहीं है।