वृंदावन कुंभ मेला 2021: श्रद्धालु बोले- अभी और साफ होना चाहिए यमुना मइया का जल
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वृंदावन कुंभ में आए संत-महात्माओं के साथ अब श्रद्धालुओं का नित्य यमुना स्नान करने का दौर आरंभ हो गया है। कुंभ क्षेत्र में बने यमुना के कच्चे-पक्के घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं को डुबकी लगाते हुए देखा जा सकता है। धार्मिक आस्था से वशीभूत ये संत और श्रद्धालु यमुना में प्रदूषित जल पर चर्चा न करते हुए फिलहाल कुंभ के लिए और स्वच्छ जल की इच्छा अवश्य रखते हैं।
कुंभ संतों का संगम है। इसकी पहली आवश्यकता स्नान के लिए शुद्ध जल की रहती है। वृंदावन में इसी आवश्यकता के लिए कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक आरंभ होने से पहले ही यमुना के जल को लेकर संतों ने चिंता जताई थी। इसी कारण यमुना में एक फरवरी से 500 क्यूसेक गंगाजल अतिरिक्त छोड़ा जा रहा है।
गंगाजल की यह मात्रा वृंदावन में यमुना के प्रदूषण को खत्म करने में नाकाफी साबित हो रही है। हालांकि इससे यमुना जल में अंतर अवश्य देखने को मिला है। कुंभ से पूर्व यमुना जल में उठती दुर्गंध अब नहीं आ रही है। यह कहना यहां नियमित स्नान करने वाले श्रद्धालुओं का है। वे कहते हैं कि अभी और स्वच्छ जल यमुना को चाहिए।
श्रद्धालुओं ने यमुना में किया स्नान
दिल्ली से आईं श्रद्धालु रश्मि ने कहा कि एक वर्ष पहले भी यमुना में स्नान किया था। अब फिर वृंदावन कुंभ के दौरान यहां आकर यमुना में डुबकी लगाने का मौका मिला है। पहले और अब यमुना जल में अंतर है, लेकिन अभी और शुद्ध जल यमुना को चाहिए।
आगरा निवासी रोशनी ने बताया कि आगरा से तो वृंदावन में यमुना का जल लाख गुना अच्छा है। आगरा में तो यमुना को देखकर ही लोगों की भावनाएं आहत होती हैं, लेकिन ये धार्मिक नगरी है। यहां और स्वच्छ और निर्मल जल का प्रबंध यमुना के लिए होना चाहिए।
गोधूलिपुरम वृंदावन निवासी प्रियंका ने कहा कि एक माह पहले तक यमुना के जल में आचमन और स्नान करने के दौरान दुर्गंध आती थी, लेकिन अब इतनी गनीमत है कि पानी से दुर्गंध नहीं आ रही है। कुंभ के लिए गंगाजल छोड़े जाने के बाद काफी कुछ सुधार आया है। शाही स्नान से पहले कुछ सुधार और हो जाए।
अलीगढ़ से आईं भावना ने कहा कि पहली बार यमुना में स्नान का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। बहुत अच्छा लग रहा है। बाहर से देखकर जल को लेकर चिंता हो रही थी, लेकिन डुबकी लगाते अन्य लोगों को देखकर प्रदूषित या फिर प्रदूषण रहित जल का विचार ही खत्म हो गया।
यमुना मैया का श्रीबांकेबिहारी करेंगे बेड़ा पार
अयोध्या हनुमानगढ़ी के श्रीमहंत धर्मदास महाराज कहते हैं कि यह तो कहा ही नहीं कहा जा सकता है कि यमुना जल ठीक नहीं है। शुद्ध नहीं है। मां यमुना को लेकर कैसा भी प्रश्न नहीं खड़ा किया जा सकता है। यह तो खुद यमुना मैया, श्रीबांकेबिहारी जी को तय करना है। उनकी जैसी इच्छा है उसी में हम इस पवित्र धरा पर आचमन और स्नान कर रहे हैं। हां, खुद कुछ कर सकते हैं तो कीजिए।
उन्होंने कहा कि नदियों की धारा को रोकने का अधिकार किसी को नहीं है। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में जल बंटवारे के नाम पर जो कुछ यह हो रहा है, उसी का परिणाम यमुना जल के इस रूप में यहां देखने को मिल रहा है। सरकारों को चाहिए कि शहरों का जल यमुना में जाने से रोंके। यमुना का जल खुद ही निर्मल हो जाएगा।
निर्माणी अनी अखाड़े के श्रीमहंत धर्मदास ने सरकारी मशीनरी के काम काज पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि एक सड़क को बार-बार अलग-अलग आवश्यकताओं के लिए खोदते हुए धन को व्यर्थ करना ही इनकी इंजीनियरिंग है। यहां कोई योजना के तहत काम नहीं करता है। यमुना महारानी का बेड़ा तो वे खुद और श्रीबांकेबिहारी पार लगाएंगे। यह तय है कि एक दिन यमुना मैया का जल शुद्ध और निर्मल अवश्य होगा।