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वृंदावन कुंभ मेला: संतों को जमीन आवंटन का कार्य शुरू

Wed, 27 Jan 2021 12:04 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 27 Jan 2021 12:04 AM IST
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Vrimdavan Kumbh Mela 2021: Land For Saint In Vrindavan Mela
वृंदावन कुंभ मेला 2021: कुंभ को लेकर होता कार्य - फोटो : अमर उजाला
वृंदावन कुंभ मेला बैठक में विभिन्न अखाड़ा सहित संतों के लिए जमीन आवंटन प्रारंभ हो गया है। सोमवार को प्रमुख अखाड़ों ने अपनी पसंद की जमीन प्रशासनिक अफसरों को बता दी है।
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सोमवार को एडीएम प्रशासन सतीश त्रिपाठी वृंदावन पहुंचे।

एसडीएम सदर क्रांतिशेखर के साथ मेला स्थल का जायजा लिया। संतों के शिविरों के लिए आवंटित स्थल को देखा। इसके नक्शा को भी देखा। मौके पर पहुंचे संतों ने अपनी पसंद की जमीन आवंटन के लिए चिन्हित करते हुए अफसरों को बता दी।
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गौरतलब रहे मेला स्थल पर 137 प्लॉट ही बन रहे हैं। आम संत और अन्य सामाजिक संस्थाओं के लिए जमीन का अभाव देखने को मिल रहा है। महंत हरिशंकर दास नागा ने बताया कि 450 खालसों के लिए शिविर की जमीन अफसरों को बता दी है।
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वृंदावन में लगने वाले कुंभ को संत समागम बताने वाले सरकारी बयान पर उन्होंने कहा कि वास्तव में कुंभ आयोजन का वास्तविक अर्थ संत समागम ही होता है। इसलिए कुंभ के स्थान पर संत समागम के नाम से इस आयोजन का नया नामकरण नहीं होना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि जहां भी कुंभ कलश से अमृत की बूंदें गिरी थीं, वहां सभी जगह कुंभ का आयोजन होता है। इसी क्रम में पुराणों में यह वर्णित है कि गरुड़ भगवान ने कुंभ कलश के साथ यमुना किनारे पर कदंब वृक्ष पर विश्राम किया था। उस दौरान अमृत की कुछ बूंदें यहां भी छलकी थीं। इसी मान्यता को धारण कर वैष्णव, रसिक संत एवं हरिभक्त सदा सर्वदा से कुंभ का आयोजन करते आ रहे हैं।
 
कुंभ के लिए भूमि सुरक्षित करने की मांग
उन्होंने दोहराया कि आज प्रदेश में एक संत की ही सरकार है, लिहाजा इस कुंभ को विधिवत कुंभ के रूप में ही घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने 50 एकड़ भूमि को कुंभ के लिए सुरक्षित एवं संरक्षित करने की मांग को संशोधित कर भविष्य का ध्यान रखते हुए कम से कम 100 एकड़ भूमि को कुंभ के लिए संरक्षित किए जाने की मांग भी की। 

संन्यासी अखाड़ों द्वारा इस बार से वृंदावन कुंभ में अपनी सहभागिता किए जाने की घोषणा पर उन्होंने कहा कि नई परंपरा प्रारंभ किए जाने की कोई वजह जान नहीं पड़ती। वैसे तो सभी आएं, दर्शन करें, स्नान करें, लेकिन नई परंपरा के तहत यदि वृंदावन में संन्यासी अखाड़े अपने कैंप लगाते हैं, तो उतना स्थान भी वृंदावन में नहीं है। 
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