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जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस आज, नतीजे का करना पड़ेगा इंतजार
Fri, 12 Jul 2019 11:56 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 12 Jul 2019 11:56 AM IST
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जिला पंचायत कार्यालय के बाहर पुलिस व अन्य लोग
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा के जिला पंचायत अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह उर्फ राकेश बघेल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वालों को हाईकोर्ट ने झटका दे दिया है। अविश्वास प्रस्ताव पर आज सदन में बहस तो होगी, लेकिन इसमें पारित होने वाला प्रस्ताव बिना कोर्ट की अनुमति के प्रभावी नहीं होगा। यानी कोर्ट के अगले आदेश तक अध्यक्ष की कमान प्रबल प्रताप पर ही रहेगी।
जिला पंचायत के 28 सदस्यों ने 21 जून को जिलाधिकारी को शपथ पत्र मय नोटरी के साथ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। 12 जुलाई को पंचायत परिसर में बैठक और उसके बाद आवश्यकता हो तो मतदान के लिए समय निर्धारित किया गया।
इसी बीच प्रबल प्रताप सिंह अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में हाईकोर्ट चले गए। उन्होंने अविश्वास प्रक्रिया में अनियमितताएं होने पर सवाल उठाते हुए इसे रोकने की अपील की। उनका तर्क था कि अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस के 15 दिन के अंदर ही बैठक बुला ली है। जो कि गलत है।
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जिला पंचायत के 28 सदस्यों ने 21 जून को जिलाधिकारी को शपथ पत्र मय नोटरी के साथ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। 12 जुलाई को पंचायत परिसर में बैठक और उसके बाद आवश्यकता हो तो मतदान के लिए समय निर्धारित किया गया।
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इसी बीच प्रबल प्रताप सिंह अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में हाईकोर्ट चले गए। उन्होंने अविश्वास प्रक्रिया में अनियमितताएं होने पर सवाल उठाते हुए इसे रोकने की अपील की। उनका तर्क था कि अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस के 15 दिन के अंदर ही बैठक बुला ली है। जो कि गलत है।
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हाईकोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली बैठक पर रोक तो नहीं लगाई लेकिन इसमें पारित होने वाले प्रस्ताव को कोर्ट के अगले आदेश तक पारित होने से रोकने को जरूर कहा है। इसके चलते आज अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक होगी। इसमें ये प्रस्ताव गिरता है या पास होता है, वो कोर्ट के आदेश के बिना प्रभावी नहीं होगा। ऐसे में विपक्ष को झटका लगा है।
अंदरखाने भाजपा में दो खेमों में बटी
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर भाजपा में ही घमासान मचा हुआ है। क्योंकि वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा से जुड़े हुए हैं और जिनके द्वारा ये प्रस्ताव लाया गया है, वो भी भाजपा का ही हिस्सा हैं। मगर, दोनों अलग-अलग खेमों से हैं।
ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष के तख्ता पलट के खेल में दोनों खेमों ने अपनी-अपनी ताकत झोंक दी है। एक खेमा इस कुर्सी को बचाने में जुटा है तो एक गिराने में। जिला पंचायत अध्यक्ष को हटाने में सपा भी भाजपा के दूसरे खेमे के समर्थन में आ गई है।
अंदरखाने भाजपा में दो खेमों में बटी
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर भाजपा में ही घमासान मचा हुआ है। क्योंकि वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा से जुड़े हुए हैं और जिनके द्वारा ये प्रस्ताव लाया गया है, वो भी भाजपा का ही हिस्सा हैं। मगर, दोनों अलग-अलग खेमों से हैं।
ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष के तख्ता पलट के खेल में दोनों खेमों ने अपनी-अपनी ताकत झोंक दी है। एक खेमा इस कुर्सी को बचाने में जुटा है तो एक गिराने में। जिला पंचायत अध्यक्ष को हटाने में सपा भी भाजपा के दूसरे खेमे के समर्थन में आ गई है।
26 सदस्यों के समर्थन की जरूरत
जिला पंचायत अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह उर्फ राकेश बघेल
- फोटो : अमर उजाला
जिला पंचायत में 51 सदस्य हैं। इसमें अविश्वास प्रस्ताव को पास कराने के लिए 26 सदस्यों का समर्थन चाहिए या फिर कुर्सी बचाने के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष को भी 26 सदस्यों का समर्थन साबित करना होगा। हालांकि, दोनों पक्ष 26-26 सदस्यों का समर्थन प्राप्त होने का दावा कर रहे हैं। यदि अविश्वास प्रस्ताव की बैठक में 26 सदस्य उपस्थित नहीं रह सके तो यह प्रस्ताव स्वत: ही गिर जाएगा।
जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति हमें मिल गई है। अविश्वास प्रस्ताव पर शुक्रवार को बैठक होगी। लेकिन इस बैठक में जो भी प्रस्ताव पारित किया जाएगा, वो कोर्ट के आदेश के बिना प्रभावी नहीं होगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के लिए कई अनियमितताएं बरती गई थीं। इसके खिलाफ हम हाईकोर्ट गए थे। अगले आदेश तक मतदान का परिणाम घोषित नहीं होगा।
जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति हमें मिल गई है। अविश्वास प्रस्ताव पर शुक्रवार को बैठक होगी। लेकिन इस बैठक में जो भी प्रस्ताव पारित किया जाएगा, वो कोर्ट के आदेश के बिना प्रभावी नहीं होगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के लिए कई अनियमितताएं बरती गई थीं। इसके खिलाफ हम हाईकोर्ट गए थे। अगले आदेश तक मतदान का परिणाम घोषित नहीं होगा।