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आगरा: बुखार के लक्षणों से चिकित्सक हैरान चार-पांच दिन में नहीं टूट रहा, बरतें ये सावधानी
Wed, 08 Sep 2021 11:36 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 08 Sep 2021 11:36 AM IST
सार
एसएन मेडिकल कॉलेज में तीन से आठ साल के बच्चों की संख्या सबसे अधिक है, बच्चों की ओपीडी में रोजाना तीन से पांच बच्चों को चिकित्सक अस्पताल में भर्ती करा रहे हैं।
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एसएन का बाल रोग विभाग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डॉक्टर साहब, बच्चे का चार-पांच दिन से बुखार नहीं टूट रहा, उल्टी भी कर रहा है। कोई दवा लिख दो। एसएन मेडिकल कॉलेज की बाल रोग विभाग की ओपीडी में वायरल फीवर से पीड़ित बच्चों को लेकर परिजन डॉक्टरों को यही बता रहे हैं। बाल रोग की ओपीडी में तीन से आठ साल तक के बच्चों की संख्या सबसे अधिक है।
बाल रोग विभाग के डॉ. नीरज यादव ने बताया कि ओपीडी में बीते सप्ताह से औसतन 143 से 150 बच्चे आ रहे हैं। इनमें से 90 से 110 बच्चों को बुखार-खांसी है। मरीज बढ़ने से चिकित्सक ओपीडी में अतिरिक्त समय भी दे रहे हैं। अधिकांश परिजन बच्चे के बुखार आने के एक-दो दिन बाद ओपीडी में दिखाने ला रहे हैं। इनको दवा देने के साथ तीसरे दिन फॉलोअप में बुलाया जा रहा है। उल्टी करने से हालत खराब होने पर तीन से पांच बच्चों को इमरजेंसी में भर्ती कराया जा रहा है।
ये बरतें सावधानी:
- बच्चों को कूलर में न सुलाएं।
- बच्चों को लेकर खुले में न सोएं।
- बाथरूम को साफ रखें, मच्छर न पनपने दें।
- किचिन-बाथरूम में पानी ढककर रखें।
- छह माह तक के शिशु को स्तनपान ही कराएं।
- बच्चों को पौष्टिक आहार दें
- बच्चों को फुल बाजू के कपडे़ पहनाकर रखें।
- रात में सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करें।
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बाल रोग विभाग के डॉ. नीरज यादव ने बताया कि ओपीडी में बीते सप्ताह से औसतन 143 से 150 बच्चे आ रहे हैं। इनमें से 90 से 110 बच्चों को बुखार-खांसी है। मरीज बढ़ने से चिकित्सक ओपीडी में अतिरिक्त समय भी दे रहे हैं। अधिकांश परिजन बच्चे के बुखार आने के एक-दो दिन बाद ओपीडी में दिखाने ला रहे हैं। इनको दवा देने के साथ तीसरे दिन फॉलोअप में बुलाया जा रहा है। उल्टी करने से हालत खराब होने पर तीन से पांच बच्चों को इमरजेंसी में भर्ती कराया जा रहा है।
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ये बरतें सावधानी:
- बच्चों को कूलर में न सुलाएं।
- बच्चों को लेकर खुले में न सोएं।
- बाथरूम को साफ रखें, मच्छर न पनपने दें।
- किचिन-बाथरूम में पानी ढककर रखें।
- छह माह तक के शिशु को स्तनपान ही कराएं।
- बच्चों को पौष्टिक आहार दें
- बच्चों को फुल बाजू के कपडे़ पहनाकर रखें।
- रात में सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करें।
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