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त्रिस्तरीय होगा जनता की शिकायत और जवाब का सत्यापन
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मैनपुरी। जनता की शिकायतों की गहनता से जांच कर उनका गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराने के लिए सीडीओ ने नई व्यवस्था शुरू की है। अब शिकायत और जवाब का त्रिस्तरीय सत्यापन कराया जाएगा। इसके पीछे मंशा एक बार में ही शिकायत का निस्तारण कर शिकायतकर्ता को संतुष्ट करने की है।
विकास भवन में बड़ी संख्या में विभिन्न विभागों की शिकायतें आती हैं। इसमें ऑनलाइन शिकायतों के साथ ही ऑफलाइन शिकायतें भी शामिल हैं। अक्सर इन शिकायतों के निस्तारण पर शिकायतकर्ता सवाल खड़े करते रहते हैं। इसमें सुधार के लिए सीडीओ विनोद कुमार ने नई व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत परियोजना निदेशक केके सिंह और उपायुक्त मनरेगा पीसी राम को प्रथम चरण पर जवाब के जांच के लिए नामित किया गया है। दोनों अधिकारी सत्यापन में ये देखेंगे कि शिकायत के संबंध में अधीनस्थ स्तर से जो जवाब उपलब्ध कराया गया है वह संतोषजनक है या नहीं। इसके बाद डीपीआरओ कार्यालय से शिकायकर्ता को फोन कर उनका फीडबैक लिया जाएगा। यहां जो भी फीडबैक होगा वह दर्ज कर दिया जाएगा। तीसरे और अंतिम स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी खुद इन जवाब और फीडबैक को परखेंगे। उनके संतुष्ट होने पर ही शिकायत को निस्तारित माना जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी ने तत्काल ये व्यवस्था लागू कर दी है।
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शिकायतकर्ता होगा संतुष्ट तो खत्म हो जाएगी शिकायत
मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि शिकायत के निस्तारण में ये जानना जरूरी है कि शिकायत किस प्रकार की है। अगर वह किसी गड़बड़ी, पात्रता या अन्य के संबंध में शिकायत है तो तत्काल उसमें कार्रवाई जरूरी है। वहीं अगर शिकायत मांग से जुड़ी है तो उसे मांग में दर्ज किया जाए और शासन के आदेश या उपलब्धता के अनुसार मांग पूरी करने के संबंध में शिकायकर्ता को अवगत कराया जाए। ऐसे में शिकायकर्ता जब संतुष्ट हो जाएगा तो एक ही बार में शिकायत खत्म हो जाएगी।
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-प्रयास है कि सभी शिकायतों का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक है। इसी के चलते सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई है। अभी केवल ग्राम्य विकास विभाग संबंधी शिकायतों में इसे लागू किया गया है। जल्द ही सभी विभागों को इसी आधार पर शिकायतों का निस्तारण करना होगा।
विनोद कुमार, मुख्य विकास अधिकारी।
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विकास भवन में बड़ी संख्या में विभिन्न विभागों की शिकायतें आती हैं। इसमें ऑनलाइन शिकायतों के साथ ही ऑफलाइन शिकायतें भी शामिल हैं। अक्सर इन शिकायतों के निस्तारण पर शिकायतकर्ता सवाल खड़े करते रहते हैं। इसमें सुधार के लिए सीडीओ विनोद कुमार ने नई व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत परियोजना निदेशक केके सिंह और उपायुक्त मनरेगा पीसी राम को प्रथम चरण पर जवाब के जांच के लिए नामित किया गया है। दोनों अधिकारी सत्यापन में ये देखेंगे कि शिकायत के संबंध में अधीनस्थ स्तर से जो जवाब उपलब्ध कराया गया है वह संतोषजनक है या नहीं। इसके बाद डीपीआरओ कार्यालय से शिकायकर्ता को फोन कर उनका फीडबैक लिया जाएगा। यहां जो भी फीडबैक होगा वह दर्ज कर दिया जाएगा। तीसरे और अंतिम स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी खुद इन जवाब और फीडबैक को परखेंगे। उनके संतुष्ट होने पर ही शिकायत को निस्तारित माना जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी ने तत्काल ये व्यवस्था लागू कर दी है।
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शिकायतकर्ता होगा संतुष्ट तो खत्म हो जाएगी शिकायत
मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि शिकायत के निस्तारण में ये जानना जरूरी है कि शिकायत किस प्रकार की है। अगर वह किसी गड़बड़ी, पात्रता या अन्य के संबंध में शिकायत है तो तत्काल उसमें कार्रवाई जरूरी है। वहीं अगर शिकायत मांग से जुड़ी है तो उसे मांग में दर्ज किया जाए और शासन के आदेश या उपलब्धता के अनुसार मांग पूरी करने के संबंध में शिकायकर्ता को अवगत कराया जाए। ऐसे में शिकायकर्ता जब संतुष्ट हो जाएगा तो एक ही बार में शिकायत खत्म हो जाएगी।
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-प्रयास है कि सभी शिकायतों का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक है। इसी के चलते सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई है। अभी केवल ग्राम्य विकास विभाग संबंधी शिकायतों में इसे लागू किया गया है। जल्द ही सभी विभागों को इसी आधार पर शिकायतों का निस्तारण करना होगा।
विनोद कुमार, मुख्य विकास अधिकारी।