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 90 हजार मार्कशीट का सत्यापन अटका

Thu, 02 Jun 2016 02:13 AM IST
अमर उजाला अागरा
अमर उजाला अागरा Updated Thu, 02 Jun 2016 02:13 AM IST
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Verification of 90, 000 marksheet recumbence
मथुरा में भी पेपर लीक
मार्कशीट-डिग्री न मिलने से सैकड़ों छात्र जॉब से वंचित तो हुए ही, अब सत्यापन न होने से लगी लगाई नौकरी भी जाती दिख रही है। बात कर रहे हैं डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की, यहां करीब 90 हजार मार्कशीट सत्यापन को अटकी हुई हैं। सर्वाधिक संख्या बीएड की है, जो करीब 65 हजार हैं, स्नातक-परास्नातक के लगभग 25 हजार मामले हैं। सत्यापन की पैरवी में लगे आवेदक बार-बार यहां चक्कर काटने को मजबूर हैं। वजह बीएड के कई सत्रों के चार्ट एसआइटी (बीएड फर्जी मार्कशीट की जांच करने वाली) तो कुछेक सत्रों के चार्ट रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी ने उपलब्ध नहीं कराए हैं। दरअसल, बीएड, बीए, बीएससी, बीकाम के अलावा एमए, एमएससी, एमकाम की मार्कशीट सत्यापन को हर महीने 5000 आवेदन आते हैं। इनमें से अधिकांश का सत्यापन नहीं किया जाता, पिछले एक साल से एसआइटी की जांच में तेजी आने से सत्यापन लगभग ठप ही पड़ा है। कुलसचिव केएन सिंह का कहना है कि एसआईटी के पास भी चार्ट हैं, कइयों की कार्बन कापी मौजूद हैं, सत्यापन में देरी हो रही है, शिकायत मिल रही हैं। विभाग से पता कराकर इनका निपटारा कराया जाएगा।
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इन सत्रों के नहीं हैं चार्ट: 
बीएड 2005 से 2015 तक के चार्ट एसआईटी को दिए जाने की बात कही जाती है, जबकि 2013 में फर्जी अभ्यर्थियों को शामिल करने की जांच चल रही है। इस कारण आवेदनों पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जाती।
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कई सत्रों के चार्ट पर स्कैन साइन 
बीएड के 1998 से 2010 तक के चार्ट पर अधिकारियों के स्कैन साइन हैं। स्नातक और परास्नातक के 2010 से 2015 के चार्ट भी ऐसी ही हालत में हैं। इससे इनके फर्जी होने की संभावना पर संबंधित विभाग सत्यापन नहीं करता। 
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सरकारी नौकरी तो 20 हजार दो
सत्यापन के नाम पर कर्मचारी चांदी काट रहे हैं। जिन सत्रों के चार्ट हैं, उनके सत्यापन भी नहीं किए जाते। अगर सत्यापन किसी सरकारी विभाग से आया तो, कर्मचारियों की लॉटरी समझो। सत्यापन न होने पर लाभार्थी जानकारी को पहुंचता है, उससे चार्ट न होने का हवाला देकर नौकरी छूटने का भय दिखाया जाता है। ऐसे में 20 या फिर उससे अधिक रुपये लेकर सत्यापन कर दिया जाता है। 


फर्जीवाड़े से बढ़ी सत्यापन के आवेदन
बीएड, स्नातक-परास्नातक की मार्कशीट फर्जी पाए जाने के बाद सत्यापन के आवेदन में तेजी आई है। सरकारी संस्थान के अलावा निजी कंपनियां भी इसकी पड़ताल करा रही हैं। निजी कंपनी के सत्यापन कराने पर 300 रुपये प्रति कोर्स शुल्क लगता है, सरकारी विभाग के लिए नि:शुल्क है। अभ्यर्थी निजी तौर पर सत्यापन नहीं करा सकता। 
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