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वात्सल्य दिवस के रूप में मनाया साध्वी ऋतंभरा का जन्मदिन
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मथुरा। वात्सल्य दिवस पर सांस्कृतिक प्रस्तुतति देतीं छात्राएं और मौजूद साध्वी ऋतम्भरा।
- फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन (मथुरा)। वात्सल्य ग्राम में दीदी मां साध्वी ऋतंभरा के जन्मदिन को वात्सल्य दिवस के रूप में मनाया गया। शुभारंभ दीप जलाकर व सभी को 2021 की शुभकामनाएं देकर किया।
इस मौके पर साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि मनुष्य का जीवन कामना और करुणा पर आधारित होता है, जो लोग कामना का चयन करते हैं वह सदैव अपने ही बारे में सोचते हैं। जो लोग करुणा का चयन करते हैं वे दूसरे के बारे में सोचते हैं। कहा कि व्यक्ति की पहचान उसके सद्गुणों से होती है न कि रूप लावण्य से। सोने के कलश में रखा हुआ विष त्याज्य होता है और मिट्टी के घड़े में रखा हुआ अमृत स्वीकार्य होता है। इसीलिए हमें अपने रूप-सौंदर्य पर अधिक ध्यान न देकर अपनी वाणी, कार्म और व्यवहार को मधुर बनाना चाहिए।
इस अवसर पर समविद् गुरुकुलम की छात्राओं ने भजन एवं मीरा माधव की नाटिका प्रस्तुति की। मनोज मोहन शास्त्री ने कविता, किशन भैया सिरसा वालों के सुमधुर भजनों से बधाई दी। इस अवसर पर संजय गुप्ता, जय भगवान अग्रवाल, अशोक सरीन, ओम प्रकाश गोयंका, सुभाष जग्गा, महेश खण्डेलवाल, सुमन लता, शिशुपाल सिंह, आस्था भारद्वाज, स्वामी सत्यशील मौजूद रहे। संचालन साध्वी सत्यप्रिया ने किया।
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इस मौके पर साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि मनुष्य का जीवन कामना और करुणा पर आधारित होता है, जो लोग कामना का चयन करते हैं वह सदैव अपने ही बारे में सोचते हैं। जो लोग करुणा का चयन करते हैं वे दूसरे के बारे में सोचते हैं। कहा कि व्यक्ति की पहचान उसके सद्गुणों से होती है न कि रूप लावण्य से। सोने के कलश में रखा हुआ विष त्याज्य होता है और मिट्टी के घड़े में रखा हुआ अमृत स्वीकार्य होता है। इसीलिए हमें अपने रूप-सौंदर्य पर अधिक ध्यान न देकर अपनी वाणी, कार्म और व्यवहार को मधुर बनाना चाहिए।
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इस अवसर पर समविद् गुरुकुलम की छात्राओं ने भजन एवं मीरा माधव की नाटिका प्रस्तुति की। मनोज मोहन शास्त्री ने कविता, किशन भैया सिरसा वालों के सुमधुर भजनों से बधाई दी। इस अवसर पर संजय गुप्ता, जय भगवान अग्रवाल, अशोक सरीन, ओम प्रकाश गोयंका, सुभाष जग्गा, महेश खण्डेलवाल, सुमन लता, शिशुपाल सिंह, आस्था भारद्वाज, स्वामी सत्यशील मौजूद रहे। संचालन साध्वी सत्यप्रिया ने किया।
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