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आजादी का प्राण गीत: 1976 में गांव-गांव गूंजा था राष्ट्रभक्ति का स्वर, फिर चर्चा में 'वंदे मातरम' की गौरवगाथा
Fri, 08 May 2026 01:31 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 08 May 2026 01:31 PM IST
सार
वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाने से लेकर उठे विवादों का अमर उजाला बना गवाह, शताब्दी वर्ष में 1976 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने की थी समारोह की शुरुआत।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को जन-गण-मन के समान दर्जा देने का निर्णय लिया गया है। केंद्र सरकार ने इसके लिए राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी है। वंदे मातरम देश की आजादी के आंदोलन का प्राण गीत रहा है।
आजादी से पहले वंदे मातरम के गाने पर विवाद के बाद भी विधानसभा, लोकसभा और विधान परिषदों में इसका गायन जारी रहा। वर्ष 1976 में वंदे मातरम के शताब्दी वर्ष पर तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने वाराणसी के भारत माता मंदिर में शताब्दी समारोह की शुरुआत की थी। तब इसे हर गांव, हर स्कूल में सामूहिक रूप से गाया था।
अमर उजाला के पुराने पन्नों में आजादी के बाद वंदे मातरम को राष्ट्रगीत और जन-गण-मन को राष्ट्रगान के रूप में मान्यता देने का निर्णय प्रकाशित किया गया। अमर उजाला ने अपने 28 नवंबर 1949 के अंक में ही यह प्रकाशित कर दिया था कि सरकार ने इन दोनों गीतों को मान्यता दी है। उन दिनों मुस्लिम लीग के साथ एक समुदाय के लोगों ने वंदे मातरम का विरोध किया था। 24 जनवरी 1950 को इसे राष्ट्रगीत बनाया गया।
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तब से लेकर 1973 तक कोई विवाद नहीं हुआ। पहली बार 6 मार्च 1973 को महाराष्ट्र विधान परिषद में वंदे मातरम का विवाद हुआ, जब बंबई (वर्तमान मुंबई) कॉरपोरेशन ने अपने स्कूलों में वंदे मातरम के गायन पर रोक के प्रश्न पर विचार किया। तत्कालीन सभापति वीएस पागे के सामने कांग्रेस विधायकों ने इस निर्णय के खिलाफ वंदे मातरम गाया।
1992 में यूपी विधानसभा में पहली बार गाया वंदे मातरम
अमर उजाला आर्काइव के अनुसार वर्ष 1992 में राष्ट्रीय मोर्चा, वाम मोर्चा और मुस्लिम लीग सांसदों के संसद में वंदे मातरम के गायन का विरोध करने के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने 28 अक्तूबर, 1992 को विधानसभा की कार्रवाई में पहली बार वंदे मातरम गाया। तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष केसरी नाथ त्रिपाठी ने सभी विधायकों के साथ वंदे मातरम से शुरुआत की और राष्ट्रगान से समापन किया।
इसी विवाद को देखते हुए दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना ने 23 जनवरी 1994 को सभी स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य कर दिया। यूपी विधानसभा ने ही 14 जुलाई, 1995 को वंदे मातरम के अपमान पर सपा, बसपा (रा) के सदस्यों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया था। इसके 11 साल बाद 7 सितंबर 2006 को पूरे देश ने एक साथ वंदे मातरम गाकर विवाद का पटाक्षेप कर दिया था।
एक नजर में वंदे मातरम
- 1876 में बंकिम चंद्र ने वंदे मातरम लिखा
- 1882 में आनंद मठ उपन्यास में प्रकाशित
- 1886 में कांग्रेस ने कोलकाता अधिवेशन में गाया
- 1896 में रवींद्र नाथ ठाकुर ने कांग्रेस अधिवेशन में गाया
- 1901 में कांग्रेस ने हर अधिवेशन में वंदे मातरम अनिवार्य किया
- 1905 में बंग-भंग के विरोध में वंदे मातरम 30 हजार लोगों ने गाया
- 1906 में ब्रिटिश सरकार ने वंदे मातरम पर प्रतिबंध लगाया
- 1907 में भीकाजी कामां ने जर्मनी में वंदेमातरम लिखा तिरंगा फहराया
-1937 में विवाद के बाद कांग्रेस ने दो पद ही गाने पर सहमति दी
- 1950 में 24 जनवरी को वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाया गया
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आजादी से पहले वंदे मातरम के गाने पर विवाद के बाद भी विधानसभा, लोकसभा और विधान परिषदों में इसका गायन जारी रहा। वर्ष 1976 में वंदे मातरम के शताब्दी वर्ष पर तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने वाराणसी के भारत माता मंदिर में शताब्दी समारोह की शुरुआत की थी। तब इसे हर गांव, हर स्कूल में सामूहिक रूप से गाया था।
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अमर उजाला के पुराने पन्नों में आजादी के बाद वंदे मातरम को राष्ट्रगीत और जन-गण-मन को राष्ट्रगान के रूप में मान्यता देने का निर्णय प्रकाशित किया गया। अमर उजाला ने अपने 28 नवंबर 1949 के अंक में ही यह प्रकाशित कर दिया था कि सरकार ने इन दोनों गीतों को मान्यता दी है। उन दिनों मुस्लिम लीग के साथ एक समुदाय के लोगों ने वंदे मातरम का विरोध किया था। 24 जनवरी 1950 को इसे राष्ट्रगीत बनाया गया।
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तब से लेकर 1973 तक कोई विवाद नहीं हुआ। पहली बार 6 मार्च 1973 को महाराष्ट्र विधान परिषद में वंदे मातरम का विवाद हुआ, जब बंबई (वर्तमान मुंबई) कॉरपोरेशन ने अपने स्कूलों में वंदे मातरम के गायन पर रोक के प्रश्न पर विचार किया। तत्कालीन सभापति वीएस पागे के सामने कांग्रेस विधायकों ने इस निर्णय के खिलाफ वंदे मातरम गाया।
1992 में यूपी विधानसभा में पहली बार गाया वंदे मातरम
अमर उजाला आर्काइव के अनुसार वर्ष 1992 में राष्ट्रीय मोर्चा, वाम मोर्चा और मुस्लिम लीग सांसदों के संसद में वंदे मातरम के गायन का विरोध करने के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने 28 अक्तूबर, 1992 को विधानसभा की कार्रवाई में पहली बार वंदे मातरम गाया। तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष केसरी नाथ त्रिपाठी ने सभी विधायकों के साथ वंदे मातरम से शुरुआत की और राष्ट्रगान से समापन किया।
इसी विवाद को देखते हुए दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना ने 23 जनवरी 1994 को सभी स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य कर दिया। यूपी विधानसभा ने ही 14 जुलाई, 1995 को वंदे मातरम के अपमान पर सपा, बसपा (रा) के सदस्यों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया था। इसके 11 साल बाद 7 सितंबर 2006 को पूरे देश ने एक साथ वंदे मातरम गाकर विवाद का पटाक्षेप कर दिया था।
एक नजर में वंदे मातरम
- 1876 में बंकिम चंद्र ने वंदे मातरम लिखा
- 1882 में आनंद मठ उपन्यास में प्रकाशित
- 1886 में कांग्रेस ने कोलकाता अधिवेशन में गाया
- 1896 में रवींद्र नाथ ठाकुर ने कांग्रेस अधिवेशन में गाया
- 1901 में कांग्रेस ने हर अधिवेशन में वंदे मातरम अनिवार्य किया
- 1905 में बंग-भंग के विरोध में वंदे मातरम 30 हजार लोगों ने गाया
- 1906 में ब्रिटिश सरकार ने वंदे मातरम पर प्रतिबंध लगाया
- 1907 में भीकाजी कामां ने जर्मनी में वंदेमातरम लिखा तिरंगा फहराया
-1937 में विवाद के बाद कांग्रेस ने दो पद ही गाने पर सहमति दी
- 1950 में 24 जनवरी को वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाया गया