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Agra News: संक्रमण से बच्चेदानी बीमार, बार-बार गर्भपात से बांझपन

Mon, 10 Aug 2026 02:03 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2026 02:03 AM IST
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Uterine disease due to infection; infertility resulting from recurrent miscarriages.
क्लीनिकल एम्ब्रियोलॉजिस्ट की कार्यशाला
आगरा। बच्चेदानी में बढ़ते संक्रमण से भी महिलाओं की कोख सूनी रह रही है। बच्चेदानी भ्रूण का भार नहीं सह पा रही। बार-बार गर्भपात हो रहा है। बांझपन से जूझ रही 15 फीसदी महिलाओं में यही वजह मिल रही है। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में एकेडमी ऑफ क्लीनिकल एम्ब्रियोलॉजिस्ट की कार्यशाला के अंतिम दिन डॉक्टरों ने इस पर चिंता जताई।
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ऑब्स एंड गाइनी सोसाइटी की सचिव प्रो. मीनल जैन ने बताया कि 15-20 दंपती बांझपन से जूझ रहे हैं। इसमें शुक्राणुओं और अंडाणुओं कम बनना, खराब गुणवत्ता समेत अन्य वजह है। इसमें एक वजह बच्चेदानी कमजोर होना भी है। इसे चिकित्सकीय भाषा में एंडोमेट्रियल रिसेप्टिविटी बोलते हैं। यह असुरक्षित यौन संबंध, बच्चेदानी में टीबी, रसौली समेत अन्य वजहों से हो सकता है।
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राहत की बात है कि इलाज कराने से 30-40 फीसदी की ये परेशानी दूर हो जाती है। आयोजन सचिव डॉ. केशव मल्होत्रा ने बताया कि बांझपन में महिला-पुरुषों की संख्या लगभग बराबर ही है। पुरुषों की संख्या अब बढ़ रही है। इसकी बड़ी वजह धूम्रपान, अल्कोहल, तनाव, मोटापा और देर से शादी करना है। इससे शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता दोनों ही प्रभावित हो रही हैं। यही स्थिति महिलाओं में है, इनमें भी 30-32 की उम्र में शादी और बच्चों के लिए दो-तीन साल बाद के चलन से बांझपन बढ़ा है।
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कार्यशाला के समापन पर सभी को प्रमाणपत्र दिए गए। कार्यशाला में संस्था अध्यक्ष डॉ. गौरव मजूमदार, डॉ. सुनीता रामाकृष्णनन, डॉ. परशुराम गोपीनाथ, डॉ. जयदीप मल्होत्रा, डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, डॉ. रजनी पचौरी, डॉ. अनुपम गुप्ता, डॉ. किया पाराशर, डॉ. सुधा बंसल आदि मौजूद रहे।


महिलाओं में नशे की प्रवृत्ति से भी समस्या

-डॉ. निहारिका मल्होत्रा ने बताया कि महिलाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति भी बांझपन की बड़ी वजह बनती जा रही है। खासतौर से मेट्रो शहरों में इसकी दर अधिक है। धूम्रपान, अल्कोहल के साथ ही देर रात तक डिजिटल उपकरण इस्तेमाल करने से भी जैविक चक्र बिगड़ गया है। यही हाल पुरुषों का है। दिल्ली की अधिवक्ता राधिका थापर ने बताया कि आईवीएफ तकनीक के दौरान सैंपल बदलने की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने दंपती और चिकित्सकों को पारदर्शिता बरतने के साथ ही कानूनी अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी।
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