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ओबामा के दिल में पांच साल से ‘धड़क’ रहा है ताज

Fri, 23 Jan 2015 01:51 AM IST
ब्यूराे, अमर उजाला
ब्यूराे, अमर उजाला Updated Fri, 23 Jan 2015 01:51 AM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा जिस ताजमहल को करीब से देखने 27 जनवरी आ रहे हैं, वह उनके दिल में पिछले पांच साल से धड़क रहा है। सबके प्रति प्रेम और कल्याण की भावना रखने वाले भारतीय दर्शन, भगवान बुद्ध की शिक्षाओं, उपनिषद के श्लोक और इसका फारसी में अनुवाद करने वाले दाराशिकोह की जानकारी ने वास्तुकला प्रेमी ओबामा दंपति की ताज दर्शन की उत्सुकता और बढ़ा दी थी। तब भले मौका न मिला पर इस बार भारत आगमन पर उनकी मुराद पूरी होने जा रही है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति के दिल में दबी इस इच्छा की जानकारी आगरा में अधीक्षण पुरातत्वविद् पद पर तैनात रहे एएसआई के पूर्व निदेशक केके मुहम्मद ने दी। दरअसल नवंबर 2010 में भारत आए ओबामा और मिशेल को दिल्ली स्थित हुमायूं का मकबरा दिखाने की जिम्मेदारी मिली थी। चेन्नई से फोन पर उन्होंने अमर उजाला को बताया कि मकबरे की वास्तुकला से पहले उन्होंने मुगल इतिहास की जानकारी ओबामा दंपति को दी। उन्हें बताया कि रेड सैंडस्टोन से बने मकबरे के डबल डोम शिल्प की तर्ज पर ही बाद में सफेद संगमरमर से ताजमहल का निर्माण हुआ। मुहम्मद याद करते हैं कि तब खास तौर से मिशेल ने दोनों की समानता पर खूब सवाल पूछे थे।
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अमेरिकी राष्ट्रपति को मकबरे में दाराशिकोह की कब्र दिखाते समय मुहम्मद ने उन्हें बताया कि उपनिषद के ‘सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया....’ जैसे संदेश को भारतीय संस्कृति की सोच कही जा सकती है। इसी उपनिषद का फारसी में अनुवाद दारा शिकोह ने किया। इसी कड़ी में उन्होंने भगवान बुद्ध का जिक्र किया और बताया कि किस तरह भारत हजारों साल से दुनिया भर को प्रेम, शांति, अहिंसा और भाईचारे का संदेश देता आ रहा है।    उन्हाेंने भगवान बुद्ध के अस्थि कलश की प्रतिकृति में भरी उनसे जुड़े नगरों सारनाथ, कुशीनगर, गया और कपिलवस्तु की मिट्टी ओबामा को भेंट की थी। मानव कल्याण के प्रति कुछ ऐसे ही विचार वाले संगठनों से जुड़े ओबामा तब और प्रभावित हुए जब उन्हें पता चला कि ताजमहल के निर्माण का सपना अनूठी मुहब्बत की बुनियाद पर बुना गया। शायद मौका मिला होता तो वे तभी ताजमहल देख कर जाते।
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मुगल इतिहास और वास्तुकला की अमेरिकी राष्ट्रपति को काफी जानकारी है। वह मकबरे के संरक्षण कार्य में लगे मजदूरों के बच्चों से भी मिले। उनसे कहा कि मन लगाकर पढ़ें तो वे भी ‘ओबामा’ बन सकते हैं। ऐसा अनुभव किसी राष्ट्राध्यक्ष के साथ नहीं हुआ।

केके मोहम्मद, पूर्व निदेशक, एएसआई

परवेज मुशर्रफ को भी दिखाया था ताज
केके मुहम्मद ने ही तत्कालीन पाक राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को ताजमहल दिखाया था। उन्होंने ताज के इतिहास में लाहौर से जुड़े तथ्यों में ज्यादा रूचि दिखाई। शाहजहां-मुमताज का लाहौर फोर्ट में निकाह और मुख्य वास्तुकार अब्दुल हमीद लाहौरी पर कई बार सवाल किए। लाहौर से ताज यह रिश्ता जानकर मुशर्रफ जानकारी करने में निधारित से 20 मिनट ज्यादा समय तक वहां रुके।
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