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जानबूझकर नहीं भेजी गई समितियों पर यूरिया, जांच शुरू
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अमर उजाला में 24 अगस्त को प्रकाशित खबर
- फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। सहकारी समितियों पर यूरिया की उपलब्धता न होने को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिम्मेदारों द्वारा जानबूझकर यूरिया की आपूर्ति न कराने के चलते उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। वहीं मुख्य विकास अधिकारी ने दो अधिकारियों की समिति गठित कर पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।
धान और मक्का की फसल में यूरिया की खपत के चलते पूरे प्रदेश से यूरिया की कमी की सूचना मिल रही थी। इस पर शासन ने यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित कराने और ओवररेटिंग रोकने के लिए प्रशासन को आदेश दिया था। कृषि विभाग द्वारा इसके लिए अभियान भी चलाया गया, जिसमें बाजार में निजी दुकानदारों के यहां पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध मिल, लेकिन सहकारी समितियों पर यूरिया का टोटा ही रहा।
जिले में संचालित 58 समितियों में से 24 समितियों पर अगस्त के अंत तक यूरिया भेजी ही नहीं गई। पीसीएफ (प्रादेशिक कॉपरेटिव फेडरेशन) द्वारा इसकी आपूर्ति की जाती है। अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई के लिए सीडीओ ईशा प्रिया को आदेश दिए थे।
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मुख्य विकास अधिकारी ने मामले में दो अधिकारियों की संयुक्त समिति गठित करके जांच के आदेश दिए हैं। इसमें आचार्य ग्राम्य विकास संस्थान धीरेंद्र कुमार और उप कृषि निदेशक डीवी सिंह को शामिल किया गया।
अधिकारियों को भी दिए नोटिस
मुख्य विकास अधिकारी ने सहायक निबंधक एवं सहायक आयुक्त अंकिता उप्रेती और पीसीएफ के जिला प्रबंधक शैलेंद्र सिंह को नोटिस जारी किया है। उन्हें समितियों पर यूरिया न भेजने का कारण सहित जवाब उपलब्ध कराना होगा।
भरपूर था पीसीएफ के पास स्टॉक
पूरे प्रदेश में जब यूरिया की किल्लत को लेकर समस्या चल रही थी, तो मैनपुरी में पीसीएफ के पास पर्याप्त स्टॉक था। अगस्त के पहले पखवाड़े तक पीसीएफ के पास करीब 3200 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध थी तो वहीं 21 अगस्त को तीन हजार मीट्रिक टन के स्टॉक में से भी 1700 मीट्रिक टन यूरिया का आवंटन पीसीएफ को किया गया। ऐसे में करीब 4900 मीट्रिक टन यूरिया पीसीएफ के पास उपलब्ध थी।
यूरिया वाली खबर में किसानों की बात
समितियों पर यूरिया न होने से निजी दुकानदार रेट बढ़ा देते हैं। ऐसे में किसानों को मजबूरन अधिक दामों पर ही यूरिया की खरीद करनी पड़ती है।
राधाकृष्ण
धान और मक्का की फसल में यूरिया की जरूरत है। समितियों पर खाद उपलब्ध न होने से दुकानों पर भीड़ हो जाती है। इसी से यूरिया की कमी होने लगती है।
रामचंद्र
सरकार सहकारी समितियों पर समय से उर्वरक उपलब्ध नहीं कराती हैं। अगर यूरिया सभी समितियों पर होती तो किसानों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
शिवराम
समितियों पर जो किसान सदस्य हैं, उन्हें ऋण पर उर्वरक और बीज मिल जाता है। ऐसे में फसल बिकने पर वे धनराशि चुका देते हैं। इस बार उन किसानों को परेशानी हुई।
सुधीर कुमार
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धान और मक्का की फसल में यूरिया की खपत के चलते पूरे प्रदेश से यूरिया की कमी की सूचना मिल रही थी। इस पर शासन ने यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित कराने और ओवररेटिंग रोकने के लिए प्रशासन को आदेश दिया था। कृषि विभाग द्वारा इसके लिए अभियान भी चलाया गया, जिसमें बाजार में निजी दुकानदारों के यहां पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध मिल, लेकिन सहकारी समितियों पर यूरिया का टोटा ही रहा।
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जिले में संचालित 58 समितियों में से 24 समितियों पर अगस्त के अंत तक यूरिया भेजी ही नहीं गई। पीसीएफ (प्रादेशिक कॉपरेटिव फेडरेशन) द्वारा इसकी आपूर्ति की जाती है। अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई के लिए सीडीओ ईशा प्रिया को आदेश दिए थे।
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मुख्य विकास अधिकारी ने मामले में दो अधिकारियों की संयुक्त समिति गठित करके जांच के आदेश दिए हैं। इसमें आचार्य ग्राम्य विकास संस्थान धीरेंद्र कुमार और उप कृषि निदेशक डीवी सिंह को शामिल किया गया।
अधिकारियों को भी दिए नोटिस
मुख्य विकास अधिकारी ने सहायक निबंधक एवं सहायक आयुक्त अंकिता उप्रेती और पीसीएफ के जिला प्रबंधक शैलेंद्र सिंह को नोटिस जारी किया है। उन्हें समितियों पर यूरिया न भेजने का कारण सहित जवाब उपलब्ध कराना होगा।
भरपूर था पीसीएफ के पास स्टॉक
पूरे प्रदेश में जब यूरिया की किल्लत को लेकर समस्या चल रही थी, तो मैनपुरी में पीसीएफ के पास पर्याप्त स्टॉक था। अगस्त के पहले पखवाड़े तक पीसीएफ के पास करीब 3200 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध थी तो वहीं 21 अगस्त को तीन हजार मीट्रिक टन के स्टॉक में से भी 1700 मीट्रिक टन यूरिया का आवंटन पीसीएफ को किया गया। ऐसे में करीब 4900 मीट्रिक टन यूरिया पीसीएफ के पास उपलब्ध थी।
यूरिया वाली खबर में किसानों की बात
समितियों पर यूरिया न होने से निजी दुकानदार रेट बढ़ा देते हैं। ऐसे में किसानों को मजबूरन अधिक दामों पर ही यूरिया की खरीद करनी पड़ती है।
राधाकृष्ण
धान और मक्का की फसल में यूरिया की जरूरत है। समितियों पर खाद उपलब्ध न होने से दुकानों पर भीड़ हो जाती है। इसी से यूरिया की कमी होने लगती है।
रामचंद्र
सरकार सहकारी समितियों पर समय से उर्वरक उपलब्ध नहीं कराती हैं। अगर यूरिया सभी समितियों पर होती तो किसानों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
शिवराम
समितियों पर जो किसान सदस्य हैं, उन्हें ऋण पर उर्वरक और बीज मिल जाता है। ऐसे में फसल बिकने पर वे धनराशि चुका देते हैं। इस बार उन किसानों को परेशानी हुई।
सुधीर कुमार