{"_id":"68e8ce1ef63cf358cb08a211","slug":"up-policeman-gets-3-years-jail-for-forging-judge-s-signature-in-1999-case-2025-10-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP: अपर सत्र न्यायाधीश के किए फर्जी हस्ताक्षर, सिपाही को तीन साल कारावास की सजा; जानें पूरा मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: अपर सत्र न्यायाधीश के किए फर्जी हस्ताक्षर, सिपाही को तीन साल कारावास की सजा; जानें पूरा मामला
Fri, 10 Oct 2025 02:43 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 10 Oct 2025 02:43 PM IST
सार
अपर सत्र न्यायाधीश के फर्जी हस्ताक्षर करने के मामले में सिपाही को तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई है।
विज्ञापन
court new
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फर्जी हस्ताक्षर करने व अन्य आरोपों में फिरोजाबाद के थाना नारखी क्षेत्र के गांव रूधऊ निवासी सिपाही जुगल किशोर को अदालत ने दोषी पाया। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अचल प्रताप सिंह ने तीन साल कारावास के साथ 3 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।
न्यू आगरा थाने में दर्ज केस के अनुसार सीओ अनंत देव ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में नियुक्त कोर्ट मुहर्रिर आरक्षी कमलेश कुमार, आरक्षी जुगल किशोर द्वारा जिला कारागार से पेशी के लिए लाए बन्दियों के वारंट न्यायालय या रीडर के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए। 24 मई 99 को संबंधित पत्रावली से संबंधित बंदियों को वारंट के साथ जिला कारागार से बुलाया गया। कोर्ट मोहर्रिरों ने उन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद अपर सत्र न्यायाधीश आगरा का एक 5 जून 99 में कार्यालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। जिसके अवलोकन में पाया गया कि पत्र में यह लिखा गया है कि इन कर्मचारियों की लापरवाही के संबंध में पूर्व में पत्र लिखा गया था।
जिसमें कर्मचारियों की कोई लापरवाही नहीं है इसलिए इन कर्मचारियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही किए जाने की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है। मगर तब तक न्यायाधीश का स्थानांतरण बिजनौर हो गया। उन्होंने पत्रों की छाया प्रतियां बिजनौर भेज दीं । तब न्यायाधीश ने अवगत कराया कि आरक्षी जुगल किशोर द्वारा जो पत्र दिनांक 4 जून 99 को दाखिल किया गया और उस पर 5 जून 99 को जो हस्ताक्षर किए गए हैं। यह उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। यह हस्ताक्षर फर्जी है। जुगल किशोर ने अपने को बचाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपर सत्र न्यायाधीश आगरा के हस्ताक्षर किए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
न्यू आगरा थाने में दर्ज केस के अनुसार सीओ अनंत देव ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में नियुक्त कोर्ट मुहर्रिर आरक्षी कमलेश कुमार, आरक्षी जुगल किशोर द्वारा जिला कारागार से पेशी के लिए लाए बन्दियों के वारंट न्यायालय या रीडर के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए। 24 मई 99 को संबंधित पत्रावली से संबंधित बंदियों को वारंट के साथ जिला कारागार से बुलाया गया। कोर्ट मोहर्रिरों ने उन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद अपर सत्र न्यायाधीश आगरा का एक 5 जून 99 में कार्यालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। जिसके अवलोकन में पाया गया कि पत्र में यह लिखा गया है कि इन कर्मचारियों की लापरवाही के संबंध में पूर्व में पत्र लिखा गया था।
विज्ञापन
जिसमें कर्मचारियों की कोई लापरवाही नहीं है इसलिए इन कर्मचारियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही किए जाने की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है। मगर तब तक न्यायाधीश का स्थानांतरण बिजनौर हो गया। उन्होंने पत्रों की छाया प्रतियां बिजनौर भेज दीं । तब न्यायाधीश ने अवगत कराया कि आरक्षी जुगल किशोर द्वारा जो पत्र दिनांक 4 जून 99 को दाखिल किया गया और उस पर 5 जून 99 को जो हस्ताक्षर किए गए हैं। यह उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। यह हस्ताक्षर फर्जी है। जुगल किशोर ने अपने को बचाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपर सत्र न्यायाधीश आगरा के हस्ताक्षर किए गए हैं।
विज्ञापन