जानिए एमएलसी का पूरा गणित, एक ऐसा चुनाव जिसमें सिर्फ शिक्षित लोग ही डाल सकते हैं वोट
- विधान परिषद यानी एमएलसी का चुनाव किस तरह का चुनाव है। इस चुनाव की आवश्यकता ही क्यों पड़ी। यह कैसे होता है और इसमें कौन मतदान कर सकता है।ऐसे ही तमाम सवालों के उत्तर अमर उजाला आपके लिए लेकर आया है...
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उत्तर प्रदेश देश का एक ऐसा राज्य है जहां विधानसभा के साथ विधान परिषद (एमएलसी ) का भी अस्तित्व है। इसी के लिए मंगलवार को प्रदेश में मतदान हुआ। इसे शिक्षक और स्नातक क्षेत्र के चुनाव भी कहा जाता है। हमारेे देश का संचालन दो सदनों पर निर्भर करता है। केंद्र में इन्हें लोकसभा और राज्यसभा के नाम से जाना जाता है तो राज्य में विधानसभा और विधान परिषद के नाम से। हमारे देश में छह राज्य ऐसे हैं जहां विधान परिषद हैं। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश (100 सीटें), महाराष्ट्र (78 सीटें), कर्नाटक (75 सीटें), बिहार (58 सीटें) और तेलंगाना (40 सीटें) शामिल है।
आखिर क्यों होते हैं ये चुनाव?
हमारे देश का लोकतंत्र प्रतिनिधित्व के सिद्धांत पर चलता है। ऐसे में संविधान निर्माताओं ने इस बात को सुनिश्चित करना चाहा कि भारत के निर्माण में शिक्षकों और स्नातकों की भूमिका होनी चाहिए। विधान परिषद की संरचना और उसका गठन करते समय संविधान निर्माताओं ने इस प्रावधान को शामिल किया था और उसी समय से ये चुनाव हो रहे हैं। शिक्षकों और स्नातकों के कोटे से चुने गए एमएलसी को भी विधायक जितनी ही शक्तियां हासिल होती हैं।
कैसे होता है सदस्यों का चुनाव?
इसके लिए पैमाना निर्धारित है। विधान परिषद में विधानसभा के एक-तिहाई से ज्यादा सदस्य नहीं हो सकते हैं लेकिन इनकी संख्या 40 से कम भी नहीं होनी चाहिए। इसके एक-तिहाई सदस्यों को विधायक मिलकर चुनते हैं। वहीं एक-तिहाई सदस्यों को नगर निगम, जिला बोर्ड वगैरह के सदस्यों द्वारा चुना जाता है। 1/12 सदस्यों को शिक्षक और 1/12 सदस्यों को रजिस्टर्ड स्नातक चुनते हैं। बाकी सदस्यों को मनोनीत करने का राज्यपाल का विशेषाधिकार है। विधान परिषद के जिन सदस्यों को शिक्षक और स्नातक चुनते हैं, उन्हें चुनने की प्रक्रिया को शिक्षक और स्नातक क्षेत्र का चुनाव कहा जाता है।
कौन चुनाव लड़ सकता है?
हाईस्कूल के शिक्षक, प्रधानाचार्य और कॉलेज के प्रोफेसर चुनाव लड़ सकते हैं। चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र सीमा 30 साल है। विधान परिषद के सदस्य का कार्यकाल छह साल के लिए होता है।
किसे है मतदान का अधिकार?
इस चुनाव की रोचक बात यह है कि मतदान पहचान पत्र होने के बाद भी आप इसमें हिस्सा नहीं ले सकते हैं। एमएलसी चुनाव में हाईस्कूल और उसके ऊपर पढ़ाने वाले शिक्षक ही वोट डाल सकते हैं। इसके अलावा मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षक को भी मतदान के अधिकार होते हैं। वो शिक्षक ही मतदान कर सकते हैं जिन्हें कम से कम तीन साल पढ़ाने का अनुभव हो। मतदाता बनने के लिए शिक्षक को एक फॉर्म भरना होता है। इस फॉर्म के साथ इस बात सबूत देना होताा है कि आप शिक्षक हैं। इसके बाद आपका नाम मतदाता सूची में आने के बाद आप मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।
इसी प्रकार स्नातक निर्वाचन सीट के लिए स्नातक करने के तीन साल बाद ही मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया जा सकता है। मतदाता बनने की बाकी सारी प्रक्रिया शिक्षक निर्वाचन की तरह ही होती है। स्नातक निर्वाचन एमएलएसी चुनाव में वही वोट दे सकता है, जो स्नातक हो। इस चुनाव में प्रत्याशी का भी स्नातक होना जरूरी है।
यूपी में शिक्षक निर्वाचन की सीटें
बरेली-मुरादाबाद, लखनऊ, गोरखपुर-फैजाबाद, वाराणसी, इलाहाबाद-झांसी, कानपुर, आगरा, मेरठ।
स्नातक निर्वाचन की सीटें
स्नातक निर्वाचन के लिए यूपी में आठ सीटें हैं। ये सीटे हैं लखनऊ, आगरा, मेरठ, वाराणसी, बरेली-मुरादाबाद, गोरखपुर-फैजाबाद, इलाहाबाद-झांसी, कानपुर।