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आगरा: दलितों की राजधानी में 20 साल में अर्श से फर्श पर आई बसपा, पिछले दो चुनावों में खिसका जनाधार

Thu, 03 Feb 2022 02:09 PM IST
Abhishek Saxena अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 03 Feb 2022 02:09 PM IST
सार

पांच साल में बसपा के पुराने सिपहसालार भी हाथी का साथ छोड़ गए। 2017 में एत्मादपुर से बसपा की टिकट पर लड़े डॉ. धर्मपाल सिंह और खेरागढ़ से भगवान सिंह कुशवाह इस बार भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।

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Up Assembly Election: Bsp won Six Seats In 2012 Up Elections
बसपा

विस्तार

बहुजन समाज पार्टी की स्टार प्रचारक मायावती ने बुधवार को कोठी मीना बाजार में सभा की है। दलितों की राजधानी कही जाने वाली ताजनगरी में 20 साल में बसपा अर्श से फर्श पर आई है। बीते पांच साल में जिले की 9 में 6 सीटें गवाईं हैं। ऐसे में बसपा के लिए गढ़ में राजनीतिक जमीन बचाने की सबसे बड़ी चुनौती है।
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। तब आगरा की 9 में 6 सीट जीतीं थीं। जनमोर्चा से जीतने के बाद डॉ. धर्मपाल भी बसपा में शामिल हो गए थे। जिसके बाद आगरा में बसपा के सात विधायक हो गए थे। 2012 में बसपा ने पकड़ बरकरार रखी और दोबारा छह सीटें जीत लीं। पहले चरण में 11 जिलों की जिन 58 सीटों पर 10 फरवरी को मतदान होना है, 2012 में उनमें से 27 सीटों पर हाथी खड़ा था। 2017 में मोदी की आंधी में बसपा का जनाधार खिसका और जिले में एक भी सीट नहीं जीत पाई। फतेहाबाद को छोड़कर आठ सीटों पर बसपा दूसरे नंबर पर रही। जबकि 19 सीटों पर बसपा तीसरे नंबर पर रही थी। 
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विधानसभा चुनाव 2017 में 11 जिलों की 58 में दो सीट ही बसपा के खाते में आईं थीं। मथुरा के मांट क्षेत्र से श्याम सुंदर शर्मा और हापुड़ की धौलाना सीट से असलम चौधरी ने बसपा की लाज बचाई थी। 53 सीटों पर भाजपा को एतिहासिक सफलता मिली। पहले चरण में पश्चिम की 30 सीटों पर दलित-पिछड़ों का प्रभाव है। इस चरण के लिए प्रचार अभियान की श्रीगणेश मायावती ने आगरा से किया है। जिसमें आगरा सबसे अधिक नौ सीटों वाला जिला है। सोशल इंजीनियरिंग के सहारे एक बार फिर बसपा ताजनगरी में पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहती है। अंतिम समय पर कई जगह सीटें बदलने से टक्कर रोचक हो गई है।
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पुराने सिपहसालार छोड़ गए साथ
 पांच साल में बसपा के पुराने सिपहसालार भी हाथी का साथ छोड़ गए। 2017 में एत्मादपुर से बसपा की टिकट पर लड़े डॉ. धर्मपाल सिंह और खेरागढ़ से भगवान सिंह कुशवाह इस बार भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। छावनी से बसपा प्रत्याशी रहे गुटियारी लाल दुबेश और ग्रामीण से बसपा प्रत्याशी रहे कालीचरन सुमन भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। बाह से बसपा प्रत्याशी रहे मधुसूदन शर्मा और उत्तर से बसपा प्रत्याशी रहे ज्ञानेंद्र गौतम अब सपा की टिकट पर ताल ठोक रहे हैं। बसपा के दिग्गज नेता पूर्व केबिनेट मंत्री रहे रामवीर उपाध्याय भी सादाबाद से भाजपा प्रत्याशी हैं। इनके अलावा पूर्व एमएलसी सुनील चित्तौड़, धर्म प्रकाश भारतीय भी बसपा छोड़ चुके हैं। 
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