{"_id":"5f202c2c8ebc3e63785ee8ee","slug":"university-will-decide-on-814-b-ed-candidates-today","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बीएड के 814 अभ्यर्थियों पर फैसला लेगा विश्वविद्यालय, एसआईटी ने बताए थे फर्जी प्रमाणपत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएड के 814 अभ्यर्थियों पर फैसला लेगा विश्वविद्यालय, एसआईटी ने बताए थे फर्जी प्रमाणपत्र
Wed, 29 Jul 2020 05:13 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 29 Jul 2020 05:13 AM IST
सार
- एसआईटी की सूची में शामिल थे बीएड सत्र 2004-05 के फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों के नाम
- विश्वविद्यालय के समक्ष रखा था अपना पक्ष
विज्ञापन
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार मित्तल ने बुधवार को कार्य परिषद की आपात बैठक बुलाई है। इसमें उन 814 अभ्यर्थियों पर फैसला लिया जाना है, जिनका नाम एसआईटी की ओर से तैयार विश्वविद्यालय के बीएड सत्र 2004-05 के फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों की सूची में शामिल था। इन अभ्यर्थियों ने विभिन्न माध्यम से विश्वविद्यालय के समक्ष अपना पक्ष रखा था।
हाईकोर्ट ने प्रकरण में विश्वविद्यालय प्रशासन को तीन माह के अंदर निर्णय लेने का आदेश दिया था। यह अवधि 29 जुलाई को पूरी हो रही है। इस दिन कार्य परिषद की बैठक सुबह 11 बजे बुलाई गई है। अभ्यर्थियों पर निर्णय लेने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से रिपोर्ट हाईकोर्ट में भेजी जाएगी। कुलपति ने बताया कि अपना पक्ष रखने वाले अभ्यर्थियों की जांच के लिए समिति बनाई गई थी।
बुधवार को कार्य परिषद में जांच समिति की रिपोर्ट ही प्रस्तुत की जानी है। सूत्रों के मुताबिक जांच में पांच से भी कम अभ्यर्थियों ने जरूरी साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं। करीब 810 अभ्यर्थी न तो जरूरी साक्ष्य दे सके हैं और न ही उनका रिकार्ड विश्वविद्यालय और संबंधित कॉलेज में मिला है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने प्रकरण में विश्वविद्यालय प्रशासन को तीन माह के अंदर निर्णय लेने का आदेश दिया था। यह अवधि 29 जुलाई को पूरी हो रही है। इस दिन कार्य परिषद की बैठक सुबह 11 बजे बुलाई गई है। अभ्यर्थियों पर निर्णय लेने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से रिपोर्ट हाईकोर्ट में भेजी जाएगी। कुलपति ने बताया कि अपना पक्ष रखने वाले अभ्यर्थियों की जांच के लिए समिति बनाई गई थी।
विज्ञापन
बुधवार को कार्य परिषद में जांच समिति की रिपोर्ट ही प्रस्तुत की जानी है। सूत्रों के मुताबिक जांच में पांच से भी कम अभ्यर्थियों ने जरूरी साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं। करीब 810 अभ्यर्थी न तो जरूरी साक्ष्य दे सके हैं और न ही उनका रिकार्ड विश्वविद्यालय और संबंधित कॉलेज में मिला है।
विज्ञापन