{"_id":"617b0374eaa300011d1343e1","slug":"university-check-bounce-given-to-subject-experts-who-came-for-interview-agra-news-agr513061438","type":"story","status":"publish","title_hn":"विविः साक्षात्कार लेने आए विषय विशेषज्ञों का चेक बाउंस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विविः साक्षात्कार लेने आए विषय विशेषज्ञों का चेक बाउंस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने विषय विशेषज्ञों के चयन के लिए 21 और 22 अक्तूबर को बाहर से बुलाए गए शिक्षकों को जो चेक दिया था, वह बाउंस हो गया। शिक्षकों के खाते से पेनाल्टी के तौर रुपये कट गए।
विश्वविद्यालय की ओर से करीब 40 विषयों के लिए बाहर से विषय विशेषज्ञ के तौर पर शिक्षकों को बुलाया गया था। इनको 2000 रुपये मानदेय और दूरी के हिसाब से यात्रा भत्ता दिया गया। सर्वाधिक विषय विशेषज्ञ लखनऊ से आए थे। इसके अलावा दिल्ली और अन्य स्थानों से भी आए थे। प्रत्येक को दो-दो चेक दिए गए। लखनऊ के एक शिक्षक ने संबंधित विभाग में बताया कि उसके दोनों चेक बाउंस हो गए। प्रत्येक के लिए 295 रुपये खाते से कट गए। विश्वविद्यालय प्रशासन की गलती से उसकी छवि खराब हो रही है, साथ ही आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर ने बताया कि तकनीक त्रुटि की वजह से बाहर से आए विषय विशेषज्ञों के जिन चेकों का भुगतान नहीं हो पाया, ऐसे सभी विशेषज्ञों को आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है। चेक भुगतान न हो पाने की वजह से बैंक की ओर से लिया गया शुल्क भी मूल भुगतान के साथ दिया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विश्वविद्यालय की ओर से करीब 40 विषयों के लिए बाहर से विषय विशेषज्ञ के तौर पर शिक्षकों को बुलाया गया था। इनको 2000 रुपये मानदेय और दूरी के हिसाब से यात्रा भत्ता दिया गया। सर्वाधिक विषय विशेषज्ञ लखनऊ से आए थे। इसके अलावा दिल्ली और अन्य स्थानों से भी आए थे। प्रत्येक को दो-दो चेक दिए गए। लखनऊ के एक शिक्षक ने संबंधित विभाग में बताया कि उसके दोनों चेक बाउंस हो गए। प्रत्येक के लिए 295 रुपये खाते से कट गए। विश्वविद्यालय प्रशासन की गलती से उसकी छवि खराब हो रही है, साथ ही आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर ने बताया कि तकनीक त्रुटि की वजह से बाहर से आए विषय विशेषज्ञों के जिन चेकों का भुगतान नहीं हो पाया, ऐसे सभी विशेषज्ञों को आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है। चेक भुगतान न हो पाने की वजह से बैंक की ओर से लिया गया शुल्क भी मूल भुगतान के साथ दिया जा रहा है।
विज्ञापन