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कीठम में कलरव, बाह में सरकारी कोलाहल
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Sat, 05 Dec 2015 01:49 AM IST
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देश के पहले बर्ड फेस्टिवल का ‘तमाशा’ शुरू हो गया है। इससे जहां शहर से 70 किमी दूर बाह क्षेत्र में ‘सरकारी कोलाहल’ मचा हुआ है वहीं, देशी-विदेशी हजारों पक्षियों के कलरव से गूंज रहा कीठम सन्नाटे में डूबा है।
वन विभाग ने फेस्टिवल के तहत कीठम में वर्ड वाचिंग का आयोजन तो किया लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में पहले दिन गिने-चुने लोग ही पहुंचे। दूसरी ओर, चंबल सेंक्च्युरी में तड़के पक्षियों को देखने निकले विदेशी मेहमानों को घड़ियाल देखकर ही संतोष करना पड़ा। सब छोड़िए, आमंत्रण पत्र से लेकर वेबसाइट तक में दी गई सूचनाएं गड़बड़ हैं।
आमंत्रण पत्र पर छपे प्रदेश सरकार के लोगो तक से खिलवाड़ हुआ है।
शहर से लगा कीठम पक्षी विहार आखिर कैसे आबाद हो। जिस सरकारी सिस्टम पर इसको विकसित करने की जिम्मेदारी है, वही इसकी उपेक्षा में लगा है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर में बर्ड सेंक्च्युरी के लिए पहचाने जाने वाले कीठम की बजाय ‘बर्ड फेस्टिवल’ का मुख्य समारोह चंबल स्थित क्रोकोडाइल सेंक्च्युरी में हो रहा है।
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स्थलचयन में गलती का नतीजा भी शुक्रवार को फेस्टिवल के शुभारंभ पर ही सामने आ गया जब सेंक्च्युरी पक्षियों के दीदार को विदेशी मेहमान निकले तो उन्हें घड़ियाल दिखे।
तीन दिवसीय बर्ड फेस्टिवल कीठम में भी शुरू हुआ। पहले दिन वन विभाग ने यहां भी बर्ड वॉचिंग कराई। इसमें शहर के चुनिंदा लोग आमंत्रित किए गए थे। इन्हीं के ग्रुप बनाकर शुक्रवार सुबह छह बजे से बर्ड वॉचिंग शुरू की गई। जैसे-जैसे कोहरा छंटता गया, झील किनारे और टापू पर देशी-विदेशी पक्षियों का जमघट लगने लगा।
सुबह साढ़े सात बजे तक तो किनारे पक्षियों से घिर गए। सुनहरी किरणों के बीच रंग-बिरंगे पक्षी सहज ही सभी को आकर्षित कर रहे थे। मगर, देखने वाले ही अपेक्षित संख्या में नहीं पहुंचे।
प्रचार तक नहीं
पूरा सरकारी सिस्टम चंबल सेंक्च्युरी के आयोजन के प्रचार-प्रसार में जुटा है। असल पक्षी विहार की तरफ किसी का ध्यान नहीं रहा। कीठम में बर्ड वॉचिंग प्रचार-प्रसार भी ढंग से हुआ होता तो बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमी ‘विदेशी मेहमानों’ को देखने कीठम पहुंच सकते थे। साथ ही पर्यटन को भी पंख मिलते। इसके जरिए बड़ी संख्या में आगरा आने वाले देशी-विदेशी तमाम पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता था।
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वन विभाग ने फेस्टिवल के तहत कीठम में वर्ड वाचिंग का आयोजन तो किया लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में पहले दिन गिने-चुने लोग ही पहुंचे। दूसरी ओर, चंबल सेंक्च्युरी में तड़के पक्षियों को देखने निकले विदेशी मेहमानों को घड़ियाल देखकर ही संतोष करना पड़ा। सब छोड़िए, आमंत्रण पत्र से लेकर वेबसाइट तक में दी गई सूचनाएं गड़बड़ हैं।
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आमंत्रण पत्र पर छपे प्रदेश सरकार के लोगो तक से खिलवाड़ हुआ है।
शहर से लगा कीठम पक्षी विहार आखिर कैसे आबाद हो। जिस सरकारी सिस्टम पर इसको विकसित करने की जिम्मेदारी है, वही इसकी उपेक्षा में लगा है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर में बर्ड सेंक्च्युरी के लिए पहचाने जाने वाले कीठम की बजाय ‘बर्ड फेस्टिवल’ का मुख्य समारोह चंबल स्थित क्रोकोडाइल सेंक्च्युरी में हो रहा है।
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स्थलचयन में गलती का नतीजा भी शुक्रवार को फेस्टिवल के शुभारंभ पर ही सामने आ गया जब सेंक्च्युरी पक्षियों के दीदार को विदेशी मेहमान निकले तो उन्हें घड़ियाल दिखे।
तीन दिवसीय बर्ड फेस्टिवल कीठम में भी शुरू हुआ। पहले दिन वन विभाग ने यहां भी बर्ड वॉचिंग कराई। इसमें शहर के चुनिंदा लोग आमंत्रित किए गए थे। इन्हीं के ग्रुप बनाकर शुक्रवार सुबह छह बजे से बर्ड वॉचिंग शुरू की गई। जैसे-जैसे कोहरा छंटता गया, झील किनारे और टापू पर देशी-विदेशी पक्षियों का जमघट लगने लगा।
सुबह साढ़े सात बजे तक तो किनारे पक्षियों से घिर गए। सुनहरी किरणों के बीच रंग-बिरंगे पक्षी सहज ही सभी को आकर्षित कर रहे थे। मगर, देखने वाले ही अपेक्षित संख्या में नहीं पहुंचे।
प्रचार तक नहीं
पूरा सरकारी सिस्टम चंबल सेंक्च्युरी के आयोजन के प्रचार-प्रसार में जुटा है। असल पक्षी विहार की तरफ किसी का ध्यान नहीं रहा। कीठम में बर्ड वॉचिंग प्रचार-प्रसार भी ढंग से हुआ होता तो बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमी ‘विदेशी मेहमानों’ को देखने कीठम पहुंच सकते थे। साथ ही पर्यटन को भी पंख मिलते। इसके जरिए बड़ी संख्या में आगरा आने वाले देशी-विदेशी तमाम पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता था।