Turtle: चंबल में बढ़ा संकटग्रस्त साल कछुओं का कुनबा, करीब 6000 बच्चे जन्मेंगे
टीएसए के प्रोजेक्ट ऑफीसर पवन पारीक ने बताया कि कछुआ संरक्षण केंद्र गढ़ायता में हेचरी बनाई है। जिसमें 300 नेस्ट संरक्षित किए गए हैं। जिनसे करीब 6000 बच्चे जन्मेंगे।
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आगरा के बाह की चंबल नदी में कछुओं की आठ संकटग्रस्त प्रजातियां पल रही हैं। इनमें से साल प्रजाति के कछुए सिर्फ चंबल नदी में बचे हैं। बाह रेंज में कछुओं की नेस्टिंग हो चुकी है। रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि पिछले साल 10 हजार से ज्यादा कछुओं की हैचिंग हुई थी। पिछले साल के मुकाबले इस साल कछुओं की नेस्टिंग ज्यादा हुई है।
बताया कि चंबल नदी में दुनिया से लुप्त हुए साल प्रजाति के कछुए संरक्षित हो रहे हैं। साल के अलावा ढोर, पचेड़ा, कटहवा, स्योत्तर, सुंदरी, मोरपंखी कछुओं की नेस्टिंग हुई है। एक नेस्ट में कछुओं ने 10-30 तक अंडे दिए हैं। नदी किनारे की बालू और मिट्टी में कछुओं के नेस्टों की सुरक्षा के लिए कुछ इलाकों में जाली लगाई गई है। मई में हैचिंग होगी।
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हेचरी में 300 नेस्ट, जन्मेंगे 6000 बच्चे
कछुओं के संरक्षण पर टर्टल सर्वाइवल एलायंस (टीएसए) काम कर रही है। टीएसए के प्रोजेक्ट ऑफीसर पवन पारीक ने बताया कि कछुआ संरक्षण केंद्र गढ़ायता में हेचरी बनाई है। जिसमें 300 नेस्ट संरक्षित किए गए हैं। जिनसे करीब 6000 बच्चे जन्मेंगे। पिछले साल 311 नेस्ट संरक्षित हुए थे। जिसमें जन्मे 5 हजार से ज्यादा नन्हे मेहमान नदी में छोड़े गए थे।