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तुलसी या ब्रज में, कहा राम सौं बैर, राधे-राधे रटत हैं...
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वृंदावन अयोध्या में राम मंदिर बनने की खुशी में सुदामा कुटी में एक विशाल हवन यज्ञ का आयोजन किया गय?
- फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन (मथुरा)। ज्ञानगूदड़ी के तुलसी भवन स्थित राम मंदिर में बुधवार को उत्सव मनाया गया। सेवायतों के साथ भक्तों ने अवध नरेश राजाराम का विशेष अभिषेक किया। घंटे-घड़ियाल के साथ भगवान राम की जय जयकार की। कहते हैं कि ये वही स्थल है जहां ब्रज यात्रा पर वृंदावन आए श्रीराम भक्त तुलसीदास को श्रीकृष्ण ने श्रीराम के स्वरूप में दर्शन दिए थे।
वृंदावन शोध संस्थान के निदेशक सतीश चंद्र दीक्षित बताते हैं कि करीब साढ़े चार दशक पहले ब्रज यात्रा पर जब गोस्वामी तुलसीदास आए तो उन्हें यहां राम नाम नहीं लोग राधे-राधे रटते हुए नजर आए। उन्होंने लिखा है कि तुलसी या ब्रज में, कहा राम सौं बैर, राधे-राधे रटत हैं, आक ढाक अरू कैर। गोस्वामी जी की भक्ति के वशीभूत भगवान श्रीकृष्ण ने तुलसीदास के आग्रह पर राम स्वरूप में दर्शन दिए। यह स्थल आज भी इसका साक्षी है।
संस्थान के प्रकाशक अधिकारी डॉ. राजेश शर्मा बताते हैं कि ब्रज यात्रा को पधारे रामभक्त तुलसीदास जी को कृष्ण भूमि खूब भाई थी।
तुलसी भवन में श्रीराम उत्सव का उल्लास
ज्ञानगूदड़ी के सेवायत डॉ. संजय कृष्ण सलिल बताते हैं कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का भूमि पूजन होने पर श्रीकृष्ण की लीला भूमि में भी श्रीराम का उत्सव मनाया गया। मंदिर में ठाकुरजी का विशेष शृंगार किया गया। ठाकुरजी का अभिषेक किया गया। प्रात:कालीन सेवा के दौरान तुलसी भवन में भी उत्सव की गूंज सुनाई दी।
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वृंदावन शोध संस्थान के निदेशक सतीश चंद्र दीक्षित बताते हैं कि करीब साढ़े चार दशक पहले ब्रज यात्रा पर जब गोस्वामी तुलसीदास आए तो उन्हें यहां राम नाम नहीं लोग राधे-राधे रटते हुए नजर आए। उन्होंने लिखा है कि तुलसी या ब्रज में, कहा राम सौं बैर, राधे-राधे रटत हैं, आक ढाक अरू कैर। गोस्वामी जी की भक्ति के वशीभूत भगवान श्रीकृष्ण ने तुलसीदास के आग्रह पर राम स्वरूप में दर्शन दिए। यह स्थल आज भी इसका साक्षी है।
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संस्थान के प्रकाशक अधिकारी डॉ. राजेश शर्मा बताते हैं कि ब्रज यात्रा को पधारे रामभक्त तुलसीदास जी को कृष्ण भूमि खूब भाई थी।
तुलसी भवन में श्रीराम उत्सव का उल्लास
ज्ञानगूदड़ी के सेवायत डॉ. संजय कृष्ण सलिल बताते हैं कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का भूमि पूजन होने पर श्रीकृष्ण की लीला भूमि में भी श्रीराम का उत्सव मनाया गया। मंदिर में ठाकुरजी का विशेष शृंगार किया गया। ठाकुरजी का अभिषेक किया गया। प्रात:कालीन सेवा के दौरान तुलसी भवन में भी उत्सव की गूंज सुनाई दी।
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