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Firozabad: राम भरोसे टीबी रोगी, समय से नहीं शुरू हो पा रहा उपचार, जानें वजह 

Fri, 20 May 2022 04:29 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 20 May 2022 04:29 PM IST
सार

फिरोजाबाद में टीबी रोगियों को समय से उपचार नहीं मिल पा रहा है। कारण है कि एमडीआर (मल्टीड्रग रेसिस्टेंट) जांच मशीन पिछले एक माह से बंद है, जिसके चलते इलाज भी समय से शुरू नहीं हो पा रहा है।
 

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Treatment of TB patients is not being started on time know reason
सीबी नेट प्रयोगशाला और खाली पड़ा एमडीआर वार्ड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त करने में स्वास्थ्य विभाग जुटा है,  इसके बावजूद जिले में टीबी से जुड़ी जांच एमडीआर (मल्टीड्रग रेसिस्टेंट) एक माह से बंद है। इसका कारण सीबी नेट मशीन चालू न होना बताया जा रहा है। जांच न होने से टीबी मरीजों में एमडीआर होने की पुष्टि नहीं हो पा रही है। इस कारण इलाज भी समय से शुरू नहीं हो पा रहा है। मेडिकल कॉलेज परिसर में बना एमडीआर वार्ड खाली है। इधर, टीबी के सामान्य मरीजों के लिए अस्पताल में भी दवाएं नहीं हैं। वार्ड में भर्ती सामान्य टीबी रोगी बाहर से दवाएं खरीदकर इलाज कराने को मजबूर हैं।

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जिले में 3660 टीबी मरीज 

जनपद में 3660 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। टीबी मरीजों का स्वास्थ्य गंभीर होने पर यह एमडीआर के रूप में बदल जाती है। वर्तमान में 162 एमडीआर रोगी जनपद में हैं। करीब एक माह से एमडीआर जांच नहीं हो पा रही है। सीबी नेट मशीन कब तक चालू हो सकेगी, इस बात से अधिकारी भी अंजान हैं। उधर, जिन मरीजों की तबीयत खराब हो जाती है, उनको वार्ड में भर्ती कर लिया जाता है। हालत यह है कि वार्ड में भर्ती सामान्य टीबी रोगी भी बाहर से दवाएं खरीदकर ला रहे हैं। तब जाकर सही इलाज मिल पा रहा है।

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समाजसेवियों के भरोसे टीबी रोगी

जनपद में 1023 टीबी रोगियों को समाजसेवियों ने गोद ले रखा है। इसमें 220 बाल, 346 वयस्क महिला और 457 वयस्क क्षय रोगी हैं। 98 समाजसेवियों ने इन लोगों के खानपान और समय से दवा दिलाने की जिम्मेदारी ले रखी है।

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ये कहना है मरीजों का 

सिरसागंज के रहने वाले रमेशचंद्र ने बताया कि  टीबी से पीड़ित हूं। खांसी के साथ खून आ रहा है तो टीबी वार्ड में भर्ती कर लिया। अस्पताल में दवा नहीं है तो डॉक्टर ने बाहर से दवा लिख दी हैं। दवा खरीदकर अपना इलाज करा रहे हैं। रैपुरा की रहने वाली सोनी ने बताया कि 'मेरे भाई को टीबी है। कुछ दवाएं तो अस्पताल में मिल गईं, कुछ बाहर से मंगाई गईं हैं। टीबी की दवाएं महंगी होती हैं। मगर जल्द फायदा मिले, इसलिए दवा खरीदकर इलाज करा रहे हैं।

इस वजह से आ रही समस्या

जिला क्षय रोग के प्रभारी अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि सीबी नेट मशीन केंद्र सरकार द्वारा संचालित की जाती है। जिस कंपनी का टेंडर था, उस कंपनी रिन्यूअल नहीं हुआ है। इस कारण एक माह से एमडीआर जांच नहीं हो पा रही है। हमने विकल्प के तौर पर जसराना से ट्रूनेट मशीन मंगा ली है। उससे अब एमडीआर की जांच कराई जाएगी। 

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