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आगरा: वैज्ञानिक ढंग से खेती की तो दोगुनी हुई आलू की पैदावार, अब विदेश में कर रहे निर्यात

Sun, 21 Feb 2021 12:07 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 21 Feb 2021 12:07 AM IST
सार

  • शमसाबाद के उन्नत किसान युवराज परिहार 80 एकड़ में कर रहे हैं खेती
  • बीते साल प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ आलू निर्यातक किसान के रूप में भी हो चुके हैं सम्मानित

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thriving farmers adopted scientific techniques for potato farming in agra
आलू की फसल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा जिले के शमसाबाद क्षेत्र के गांव बांगुरी के उन्नत किसान युवराज परिहार वैज्ञानिक ढंग से खेती कर आलू की दोगुनी पैदावार कर रहे हैं। यह विदेशों में आलू निर्यात करते हैं। बीते साल जनवरी में गुजरात में हुए अंतरराष्ट्रीय आलू महोत्सव में प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ किसान के रूप में सम्मानित भी हो चुके हैं।

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किसान युवराज परिहार ने बताया कि करीब आठ-दस साल से आलू की खेती कर रहा हूं। परंपरागत और वैज्ञानिक तरीके को मिलाकर खेती करने से दोगुनी पैदावार हो रही है। हरी-गोबर की खाद, मिट्टी की जांच कराके आवश्यकतानुसार खाद और हर साल नए बीज लगाता हूं। 
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अंतरराष्ट्रीय और केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र के विज्ञानियों की भी मदद ली। इससे पहले 250 से 300 पैकेट प्रति एकड़ आलू पैदा होता था, जो अब 400 से 450 पैकेट तक पहुंच गया है। बेहतर गुणवत्ता के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है। रूस, कुबैत, दुबई, मॉरीशस समेत आठ देशों में आलू का निर्यात कर रहा हूं। 

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मिट्टी की जांच और उन्नत बीज से मुनाफे का सौदा बनी खेती
खंदौली के हसनपुर गांव निवासी माधवेंद्र सिंह भी उन्नतीशील किसान हैं। इन्होंने बताया कि वह 80 एकड़ से अधिक जमीन पर आलू की फसल कर रहे हैं। कृषि विज्ञानियों के संपर्क में आने के बाद उन्होंने भी वैज्ञानिक तरीके से खेती करना शुरू किया। मिट्टी की जांच कराके सही मात्रा में खाद दी। 

उन्होंने देसी खाद को ही प्राथमिकता दी। उन्नत किस्म का बीज खरीदकर बुवाई की। इससे साल दर साल पैदावार लगभग दोगुनी हुई। अच्छी गुणवत्ता का आलू भी हुआ, इसे मुंबई, पुणे, हैदराबाद समेत 10 राज्यों की मंडी में उनका आलू हाथों-हाथ बिकता है और कीमत भी अच्छी मिलती है। 

जिला कृषि अधिकारी डॉ. रामप्रवेश वर्मा ने बताया कि मिट्टी में अंधाधुंध खाद-कीटनाशक से पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसे में मिट्टी की जांच कर पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलने के बाद उसी के अनुपात में खाद और बीज डाला जाता है। उन्नत किस्म के बीज, बीमारियों से बचाने, उसकी गुणवत्ता की जांच करने के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को प्रशिक्षण और जानकारी देते हैं। समय-समय पर खेती का सर्वे भी करते हैं।

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