आगरा-मथुरा के तीन बुलियन कारोबारियों की जांच में निकला 600 करोड़ का खेल
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मथुरा और आगरा के तीन बुलियन कारोबारियों पर आयकर विभाग के छापे में 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का खेल सामने आया है। अब तक आयकर के इन्वेस्टिगेशन विंग के पास जो कागजात हैं, उसमें से कुछ की जांच में ही यह खेल 600 करोड़ रुपये का निकला है, जबकि अभी कई सील किए गए प्रतिष्ठानों से पीओ (प्रोहिबटरी आर्डर) खुलने बाकी हैं।
नोटबंदी के दौरान बुलियन कारोबारियों के कॉकस के कारनामे बैंक खातों, बेनामी संपत्ति के कागजात, लॉकर और डायरियों की जांच में सामने आए हैं। आयकर विभाग ने 31 से ज्यादा प्रतिष्ठानों पर 300 अधिकारियों के साथ जुलाई में आरएस बुलियन, अजय अवागढ़ और सुशीला चौहान पर छापा मारा था। जांच शाखा के अधिकारियों ने उस दौरान मुंबई की फर्म से 123 करोड़ के फर्जी लोन लेन और एक दिन में 37 करोड़ रुपये की फुटकर बिक्री को पकड़ा था।
नोटबंदी के दौरान तीनों ने 600 करोड़ रुपये का खेल किया। इसकी वसूली की कवायद भी शुरू हो रही है। आयकर अधिकारियों द्वारा हर दिन पीओ खोलने के बाद जिन कागजातों की जांच की जा रही है, उसमें इस रकम के सबूत भी मिल रहे हैं। जांच शाखा अधिकारियों को कई ऐसे कागजात हाथ लगे हैं, जिनसे टैक्स चोरी के इस मामले के अब तक के सबसे बड़े होने की उमीद है।
दो कारोबारियों के खुल चुके लॉकर
मथुरा के आरएस बुलियन और आगरा के अजय अवागढ़ के छापे के दौरान सीज किए गए लॉकरों को खोला जा चुका है। इन लॉकरों में काफी सोना और जेवर मिले हैं, जिनका ब्योरा न मिलने पर इसे सीज कर दिया गया है। अभी बुलियन कारोबारी सुशीला चौहान के लॉकर खुलने बाकी है। सुशीला के कई प्रतिष्ठानों पर अभी भी पीओ (प्रोहिबटरी आर्डर) लगा हुआ है। आयकर विभाग ने जांच के दौरान कागजात ज्यादा होने से 24 जगहों पर पीओ लगाया था, जिनमें से हर दिन एक पीओ हटाया जा रहा है।
सुशीला से जुड़े 40 सराफ निशाने पर
अजय अवागढ़ और आरएस बुलियन के लॉकर और प्रतिष्ठान के पीओ खुल चुकेहैं, लेकिन इससे पहले सुशीला चौहान से जुड़े 40 सराफ ऐसे हैं जो अब आयकर विभाग के निशाने पर हैं। आयकर छापे के दौरान भी सबसे ज्यादा लिंक सर्वे सुशीला के लेन-देन वालों पर ही हुए। एक महीने तक दस्तावेजों की जांच के बाद जांच अधिकारियों को कई सराफों के लेन-देन संदिग्ध मिले हैं। आयकर के निशाने पर आए इन सराफों पर इसी महीने बड़ी कार्रवाई हो सकती है। इनमें से कई का नाम सुशीला के खास रहे लोगों ने ही कबूला था।
मिल रहीं बेनामी संपत्तियां
बैंक लॉकरों में और पीओ खुलने के बाद कई दस्तावेज मिले हैं, जिनमें बुलियन कारोबारियों की बेनामी संपत्तियां मिल रही है। पॉश इलाकों में बेनामी संपत्तियों को 2004 से 2015 के बीच खरीदा गया है। सुशीला चौहान के पास रियल इस्टेट में निवेश और जमीनों के कागजात मिले हैं।