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दृष्टिहीनों का सहारा बनेगा यह नेवीगेटर
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Thu, 18 Dec 2014 07:12 PM IST
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हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी विभाग के तृतीय वर्ष के छात्रों ने दृष्टिहीनों की मदद के लिए एक नेवीगेटर तैयार किया है। इसकी मदद से कोई भी दृष्टिहीन रास्ते में आने वाली बाधाओं का पता लगा सकता है।
छात्र अंकुर सिंह चौहान, अमन अनवारिया, अरिदमन सिंह एवं मनीष कुमार ने बताया कि यंत्र को विकसित करने में केवल दो हजार रुपये की लागत आई है। यह यंत्र बहुत ही आसान, छोटा, हल्का है। यंत्र को कमर में बांध दिया जाता है। यंत्र में लगे संवेदक समूह एक सूक्ष्म दर्शनीय क्षेत्र एवं सामने मौजूद बाधाओं की जानकारी उपलब्ध कराते हैं। इस यंत्र से किरणें निकलती हैं जो सामने किसी बाधा के आने पर टकराकर लौट आती हैं। यह चमगादड़ के रात में उड़ने के वैज्ञानिक सिद्घांत पर निर्भर है। विभागाध्यक्ष शंकर थाकर के मुताबिक इस यंत्र में अभी और सुधार की संभावना है। इस यंत्र के पूर्ण विकसित होने का मतलब समाज के नेत्रहीन लोगों की मदद के लिए एक कदम बढ़ाते हुए उन्हें नेत्रदान करने जैसा है।
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छात्र अंकुर सिंह चौहान, अमन अनवारिया, अरिदमन सिंह एवं मनीष कुमार ने बताया कि यंत्र को विकसित करने में केवल दो हजार रुपये की लागत आई है। यह यंत्र बहुत ही आसान, छोटा, हल्का है। यंत्र को कमर में बांध दिया जाता है। यंत्र में लगे संवेदक समूह एक सूक्ष्म दर्शनीय क्षेत्र एवं सामने मौजूद बाधाओं की जानकारी उपलब्ध कराते हैं। इस यंत्र से किरणें निकलती हैं जो सामने किसी बाधा के आने पर टकराकर लौट आती हैं। यह चमगादड़ के रात में उड़ने के वैज्ञानिक सिद्घांत पर निर्भर है। विभागाध्यक्ष शंकर थाकर के मुताबिक इस यंत्र में अभी और सुधार की संभावना है। इस यंत्र के पूर्ण विकसित होने का मतलब समाज के नेत्रहीन लोगों की मदद के लिए एक कदम बढ़ाते हुए उन्हें नेत्रदान करने जैसा है।
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