इस रोग के अभी भी हैं कई शिकार, स्कूल के दरवाजे भी हुए बंद
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आगरा जिले के बाह में जन्म के कुछ दिन बाद ही दो बहनें चर्मरोग की चपेट में आ गई थीं। बेटियों के इलाज के लिए मां-बाप ने गाड़ी, भैंस बेंच दी। कर्ज भी लिया। अब तक लाखों रुपये दवा में खर्च कर चुके हैं। पर, आराम नहीं मिला। जख्मों से अब भी खून रिसता रहता है। उनके दर्द से मां-बाप भी तड़प रहे हैं। दूसरे बच्चों की तरह प्रियंका और शिवानी को गांव के स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा गया था। कुछ दिन तो अन्य बच्चों से इन्हें दूर बैठाया गया। फिर यह कहकर भेज दिया गया कि इलाज कराओ, ठीक हो जाने पर स्कूल भेजना।
जैतपुर के मुकुटपुरा गांव के सुखराम और उमा देवी की प्रियंका (15) और शिवानी (10) बेटियां हैं। दोनों को जन्म के दो दिन बाद ही चर्मरोग ने अपनी चपेट में ले लिया। उनके पूरे शरीर पर फफोले निकल आए। फूटने पर जख्म बन गए। तब से लगातार इलाज कराया जा रहा है। कुष्ठ की जांच कराई गई। चर्मरोग की पुष्टि होने पर जैतपुर, फतेहाबाद, इटावा, आगरा के अस्पतालों में इलाज कराया। इलाज के लिए अपनी तीन भैंस और गाड़ी बेच दी। तमाम रिश्तेदारों से कर्ज भी लिया। पीड़ित के मुताबिक दोनों बेटियों के इलाज में अब तक करीव 20 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। पर, कोई फायदा नहीं हुआ।
झाड़ फूंक भी कराया। देशी वैद्यों को दिखाया। अब भी बेटियों के जख्म से खून रिसता है। दर्द से बेटियों के रोने पर सुखराम और उमा भी तड़प उठते हैं। छह दिन से फिर तकलीफ बढ़ी, तो इलाज के लिए आगरा के लोटस हॉस्पिटल में ले गए। जहां 6 दिन में 60 हजार रुपये खर्च हो गए। मजबूरी में दोनों फिर बेटियों को लेकर घर चले आए। कहा कि वे लाचार हैं। मां-बाप ने सरकार के सामने झोली फैलाई है। चिट्ठी भेजकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है।
जन्मजात नहीं है रोग, बेटा बिल्कुल सही
शिवानी और प्रियंका का चर्मरोग जन्मजात नहीं है। सुखराम ने बताया कि आगरा में डॉक्टरों ने उसका और पत्नी उमा के खून की भी जांच की थी। बताया कि दोनों बेटियों के बाद बेटा कान्हा ननिहाल फतेहाबाद के बरना गांव में पैदा हुआ। वह बिल्कुल ठीक है।
नाना बोले मन करता है बच्चियों संग जान दे दूं
बेटियों के सिर ऊपरी बाधा के शक में भी दिखाया। कुछ लोगों ने घर में वास्तुदोष कहा। इस पर इस परिवार ने अब तक चार घर बदला, लेकिन बेटियों के जख्मों से रिसता खून बंद नहीं हो रहा है। नाना रामबाबू ने बताया कि उनसे शिवानी और प्रियंका का दर्द देखा नहीं जाता। इलाज के लिए अब तो रुपये भी नहीं है। मन करता है कि बच्चियों संग जान दे दूं।