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जिले में लार्वा टेस्टिंग और सर्वे के नहीं हैं इंतजाम
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कासगंज के सहावर में दवा के छिड़काव करते कर्मी
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। दिन प्रतिदिन बढ़ रहे संक्रामक रोगों से निपटने के लिए भले ही तमाम दावे किए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर हकीकत दूर है। डेंगू मलेरिया के बढ़ते प्रकोप के बीच विभाग लार्वा टेस्टिंग और सर्वे नहीं करा पा रहा है। संसाधनों के अभाव का हवाला देते हुए विभाग अपनी इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता दिख रहा है। जबकि इन दिनों टेस्टिंग और सर्वे की बेहद जरूरत दिख रही है।
यह सर्वे पानी में मच्छरों का होता है। देखा जाता है कि पानी में लार्वा कितने घनत्व में है। उसके बाद टूल किट से लार्वा की जांच होती है। उससे पता चलता है कि यह लार्वा मलेरिया का है या डेंगू का, लेकिन जिले में कभी यह जांच नहीं होती।
लार्वा सर्वे और टेस्टिंग नगरीय मलेरिया इकाई के माध्यम से कराया जाता है, लेकिन जिले में यह इकाई नहीं है। संभावना है कि अभी जल्द ही लार्वा सर्वे के लिए टीम शासन से मिल सकती है। स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे पानी को जमा न होने दें। पानी जमा रहने से मच्छर पनपते हैं और मादा मच्छर लार्वा देती है जिससे मच्छरों की संख्या बढ़ती है। डा. राजकुमार सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी
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यह सर्वे पानी में मच्छरों का होता है। देखा जाता है कि पानी में लार्वा कितने घनत्व में है। उसके बाद टूल किट से लार्वा की जांच होती है। उससे पता चलता है कि यह लार्वा मलेरिया का है या डेंगू का, लेकिन जिले में कभी यह जांच नहीं होती।
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लार्वा सर्वे और टेस्टिंग नगरीय मलेरिया इकाई के माध्यम से कराया जाता है, लेकिन जिले में यह इकाई नहीं है। संभावना है कि अभी जल्द ही लार्वा सर्वे के लिए टीम शासन से मिल सकती है। स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे पानी को जमा न होने दें। पानी जमा रहने से मच्छर पनपते हैं और मादा मच्छर लार्वा देती है जिससे मच्छरों की संख्या बढ़ती है। डा. राजकुमार सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी
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