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Agra News: ट्राॅमा सेंटर को नहीं मिल सका डॉक्टर और स्टाफ, कैसे मिले आघात से राहत

Fri, 17 Oct 2025 12:45 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Fri, 17 Oct 2025 12:45 AM IST
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The trauma center couldn't find doctors and staff, how could trauma relief be achieved?
मैनपुरी। अचानक होने वाली दुर्घटनाओं के मरीजों की जान बचाने के लिए जिले में दो साल पहले 5 करोड़ की लागत से 6 बेड के ट्राॅमा सेंटर की स्थापना की गई थी। 2 साल में यह ट्राॅमा सेंटर बनकर तैयार हुआ, लेकिन इसे डॉक्टर और स्टाफ नहीं मिल सके हैं। इसके चलते जिले में होने वाली दुर्घटनाओं के मरीजों को समय से उपचार नहीं मिल पाता है। इससे हर महीने 15 से 20 लोगों की जान जा रही है। वर्ष 2023 में महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में 5 करोड़ की लागत से ट्राॅमा सेंटर की स्थापना कराई गई थी। ट्राॅमा सेंटर की स्थापना अचानक हुए आघात और दुर्घटना में घायल होने वाले मरीजों को समय से उपचार दिलाने के उद्देश्य से की गई थी। दो साल पहले छह बेड का ट्राॅमा सेंटर बनकर तैयार भी हो गया लेकिन इसके लिए स्टाफ नहीं मिल सका। इसके चलते जिले में दुर्घटनाओं में घायल होकर पहुंचने वाले मरीजों और अचानक आघात से पीड़ित मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल के रिकाॅर्ड पर यदि नजर डाली जाए तो यहां हर महीने 100 से 200 पीड़ित सड़क दुर्घटनाओं और अन्य आघात से गंभीर हालत में पहुंचते हैं। यहां उपचार की उचित व्यवस्था न होने के कारण या तो इमरजेंसी में या मेडिकल ले जाते समय पीड़ित की मौत हो जाती है। हर महीने 15 से 20 मरीजों की समय से उपचार के अभाव में मौत हो रही है।
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समय से उपचार के अभाव में दिव्यांग होने का रहता है खतरा
पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमरपाल यादव का कहना है कि इमरजेंसी सुविधा, तत्काल एडवांस सर्जरी सहित अन्य सुविधा के साथ ट्राॅमा सेंटर विकसित होना चाहिए। उनका का कहना है कि दुर्घटना के बाद मरीज के लिए हर मिनट कीमती होता है। यदि उसे समय पर उपचार न मिले तो वह ठीक होने के बाद भी जिंदगी भर के लिए दिव्यांग बन सकता है। इसके अलावा अंग कटने की स्थिति में चार घंटे के अंदर सर्जरी न हो तो उक्त अंग खराब हो सकता है।
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20 प्रतिशत बुजुर्ग हो रहे आघात का शिकार
जिला अस्पताल में आघात से आने वाले कुल मरीज में करीब 20 प्रतिशत बुजुर्ग हैं। इन मामलों में मरीज की कूल्हे की सर्जरी करनी पड़ती है। डॉक्टरों की माने तो अक्सर देखा गया है कि बुजुर्ग देखभाल या दूसरे कारणों से दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। वह अपने घर या दूसरी जगह पर गिर जाते हैं इसमें उनका कूल्हा तक बदलना पड़ता है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. ललित कुमार का कहना है कि प्रतिदिन 15 से 20 बुजुर्ग इस समस्या को लेकर अस्पताल आ रहे हैं।
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लापरवाही है आघात का बड़ा कारण
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आदर्श सेंगर बाते हैं कि निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर लापरवाही दुर्घटना का बड़ा कारण बनती है। इसके अतिरिक्त सड़क दुर्घटना में भी हेलमेट न पहनना, सड़क नियम का पालन न करना, फुटपाथ पर गाड़ी चलाना, सड़क पर पैदल चलना सहित दूसरे कारणों से हर साल जिले में सैकड़ों घायल होते हैं। इनमें कई की मौत हो जाती है।
ट्राॅमा बनाने का उद्देश्य
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय कुमार गुप्ता बताते हैं कि दुनियाभर में 17 अक्तूबर को विश्व ट्रॉमा दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद ट्रॉमा के कारण, लक्षण और इसके रोकथाम के उपायों के बारे में लोगों को जागरूक करना है। ट्रॉमा किसी भी उम्र में व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। यह शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से लोगों को प्रभावित करती है।

ट्राॅमा सेंटर के संचालन के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। डॉक्टर और स्टाफ की मांग की गई है। डॉक्टर और स्टाफ मिलते ही संचालन शुरू करा दिया जाएगा।
- डॉ. आरसी गुप्ता, सीएमओ
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