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31 दिसंबर तक जमा होगा वाणिज्य कर रिटर्न

Fri, 04 Nov 2016 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 04 Nov 2016 11:32 PM IST
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The tax return must be submitted by December 31 Commerce
tax evasion
वाणिज्य कर विभाग में वित्तीय वर्ष 2015-16 की वार्षिक विवरणी दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 अक्तूबर से दो महीने के लिए बढ़ा दी गई है। अब व्यापारी 31 दिसंबर तक एनुअल रिटर्न (रूप पत्र 52, 52ए, 52बी) को दाखिल कर सकेंगे।
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वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 1 को दिए गए निर्देश में कहा है कि अक्तूबर में अग्रसेन जयंती, गांधी जयंती, दुर्गा पूजा, दशहरा, मोहर्रम, वाल्मीकि जयंती और दशहरा के त्योहार होने और नवंबर में भैया दौज, गुरु नानक जयंती के कारण व्यापारी वार्षिक विवरणी दाखिल नहीं कर पाए हैं। लगातार अवकाश के कारण जोन स्तर पर वार्षिक विवरणी अपेक्षा के मुताबिक जमा नहीं हो सकीं। ऐसे में वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए वार्षिक विवरणी (रूप पत्र 52, 52ए, 52बी) को दो महीने के लिए बढ़ाकर 31 दिसंबर को आखिरी तारीख कर दी गई है। यह तारीख अब नहीं बढ़ाई जाएगी। जोन के सभी व्यापारिक संगठनों, अधिवक्ता संगठनों को बैठक कर सभी व्यापारियों की विवरणी जमा कराने को कहा गया है। इसके बाद अर्थ दंड लगाया जाएगा।
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पैन अपडेट नहीं तो ई-सेवाएं नहीं
जीएसटी लागू करने से पहले पंजीकृत व्यापारियों को जीएसटीएन जनरेट कर दिया जाना है लेकिन व्यापारियों ने अभी तक पैन कार्ड नंबर ही उपलब्ध नहीं कराए हैं। वाणिज्य कर एडिशनल कमिश्नर विवेक कुमार के मुताबिक, जिन व्यापारियों का पैन नंबर नहीं है, उन्हें जीएसटीआईएन उपलब्ध नहीं कराया जा सकेगा। ऐसे व्यापारियों को जीएसटी में रजिस्ट्रेशन नहीं मिल पाएगा। दरअसल, जीएसटी में सभी प्रक्रियाए ऑनलाइन होनी हैं। इसके लिए हर पंजीकृत व्यापारी को एक लॉग इन आईडी और पासवर्ड जीएस टिन के पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा, जो उनके ई-मेल आईडी और फोन नंबर पर भेजा जाएगा। पैन अपडेट करने के लिए वाणिज्य कर विभाग कई बार पंजीकृत व्यापारियों को उनके मोबाइल और आईडी पर एसएमएस भेज चुका है। 21 अक्तूबर से वाणिज्य कर विभाग ने पैन नंबर अपडेट न करने वालों की ई सर्विसेज भी रोक दी है। ऐसे व्यापारियों को मैनुअल रसीद भी जारी नहीं की जा रहीं। एडिशनल कमिश्नर विवेक कुमार के मुताबिक, जिन व्यापारियों की ई-मेल आईडी नहीं है, उनकी आईडी आफिस में बने व्यापारी सुविधा केंद्र में तुरंत बना दी जाए और पैन नंबर अपडेट कर तत्काल रसीद दे दी जाए। जिन व्यापारियों का सही पैन नंबर उपलब्ध नहीं होगा, वह जीएसटी में माइग्रेट नहीं हो पाएंगे और रजिस्ट्रेशन तक नहीं करा सकेंगे।
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