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पर्यावरण और जरा सी चूक से जिंदगी के लिए भी खतरा
अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 15 May 2016 01:52 AM IST
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बढ़ते प्रदूषण के कारण पेड़-पौधे सूख गए हैं
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पर्यावरण के लिए खतरा बने एयरकंडीशनर (एसी) अब जान का भी खतरा बनने लगे हैं। गाजियाबाद में हुआ हादसा इसका ताजा उदाहरण है। इस घटना ने एसी में रहने वाले लोगों की धड़कन बढ़ा दी है। ऐसा लाजमी भी है। क्योंकि सवाल जिंदगी का है। एसी की जो गैस ठंड का अहसास कराती है वही, जानलेवा साबित हो रही है। इनमें भी विंडो एसी ज्यादा खतरनाक साबित हो रहे हैं।
बढ़ते चलन और जरूरत ने एसी की डिमांड भी बढ़ा दी है। शहर में भी अधिकांश घरों और दफ्तरों में एसी लगे हैं। मगर, कम ही लोग हैं जो सुरक्षा मानकों से परिचित हैं और उसीके अनुरूप एसी का प्रयोग करते हैं। जानकारों की मानें तो एसी में प्रयोग होने वाली क्लोरोफ्लोरो गैस काफी खतरनाक होती है। लीकेज होने पर कम्प्रेशर में ब्लास्ट कर सकती है। यह ब्लास्ट एसी की बिजली वायरिंग में स्पार्किंग या वातावरण और कम्प्रेशर के तापमान दोनों से पैदा होने वाली हीट से हो सकता है। अपने शहर में अधिक तापमान होने से ब्लास्ट की संभावना अधिक है। ऐसे में जरूरी है कि सावधानी के साथ एसी का प्रयोग किया जाए।
तापमान बन रहा खतरा
शहर का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता है। यह वह स्थिति है जिसमें लगता है कि आसमान से आग बरस रही है। घर से बाहर की ओर निकले होने के कारण एसी पर पूरे दिन धूप पड़ती रहती है। लगातार चलने के कारण भी विंडो एसी का कम्प्रेशर काफी गर्म हो जाता है। वातावरण और कम्प्रेशर का तापमान दोनों मिलकर काफी हीट पैदा करते हैं, इससे ब्लास्ट की संभावना अधिक रहती है।
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- डा. अमित अग्रवाल, प्रवक्ता, रसायन विभाग आगरा कालेज
लीकेज से हो सकता है हादसा
एसी में क्लोरो फ्लोरो कार्बन गैस प्रयोग होती है। यह ज्वलनशील गैस है। लीक होने पर एसी के अंदर बिजली की वायरिंग से स्पार्क होने पर ब्लास्ट कर सकती है। ऐसे में एसी में गैस लीकेज न हो इसका ध्यान रखना पड़ता है।
- प्रो. हेमंत कुलश्रेष्ठ, रसायन विभागाध्यक्ष, सेंट जोंस कॉलेज
असेंबल्ड एसी ज्यादा खतरनाक
शहर में एसी असेंबल करने का काम भी धड़ल्ले से चल रहा है। लोकल पार्ट्स लगाकर ऐसे एसी तैयार किए जा रहे हैं। ये सस्ते होते हैं पर इनकी कोई गारंटी नहीं होती। इधर-उधर से काम चलाऊ पार्ट्स लगाकर इससे कूलिंग की व्यवस्था कर दी जाती है। मगर, इसका कम्प्रेशर इतना कमजोर होता है कि वह कभी भी ब्लास्ट कर सकता है। गैस लीक होने की भी आशंका बनी रहती है।
वेंटीलेशन है जरूरी
विंडो एसी के लिए वेंटीलेशन जरूरी है। मगर, अधिकांश लोगों ने इसको ध्यान में रखे बगैर ही संकरी जगहों पर विंडो एसी फिट करा लिए हैं। ऐसे में एसी चलने पर इनसे निकलने वाली हीट को कंट्रोल करने के लिए शुद्ध हवा नहीं मिल पाती। एसी की गर्म हवा ही इसके आसपास घूमती रहती है। इससे इस जगह का तापमान अन्य खुली जगहों से और बढ़ जाता है। इससे हादसे की संभावना और अधिक हो जाती है।
इसका रखें ध्यान
. गर्मियों में ऐसी का प्रयोग शुरू करने से पहले इसकी सर्विस जरूर कराएं।
. समय-समय पर इसके फिल्टर को पानी से धोकर साफ करें।
. लगातार एसी प्रयोग न करें, दो-तीन घंटे बाद थोड़ी देर के लिए कम्प्रेशर बंद रखें।
. विंडो एसी के ऊपर शेड जरूर लगवाएं, ताकि धूप से बचाया जा सके।
. विंडो एसी को संकरी जगह पर न लगाएं, उसके पीछे खुली जगह होनी चाहिए।
. ड्रेन ट्यूब को एसी से अलग करके ड्रेनेज सिस्टम की सफाई कराएं।
. गैस लीकेज पर तत्काल मैकेनिक से संपर्क करें।
पर्यावरण के लिए एसी और फ्रिज सबसे बड़े खतरे के रूप में उभरकर सामने आ रहे हैं। इनका चलन दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। लोगों को यह नहीं पता कि क्लोरोफ्लोरो कार्बन गैस पर्यावरण के लिए जहर से कम नहीं है। इसके प्रभाव को कम करने के लिए पौधरोपण तो दूर पेड़ों पर आरी चलाई जा रही है। यही वजह है कि साल-दर-साल तापमान बढ़ता जा रहा है।
- डा. केएस राणा, पर्यावरणविद
शहर में वोल्टेज फ्लेक्च्यूएशन की स्थिति न के बराबर है। ओवरलोड या फ्लेक्च्यूएशन होने पर ट्रांसफार्मर ही ट्रिप कर जाता है। ऐसी स्थिति में विद्युत आपूर्ति बंद हो जाती है। इससे घरों में लगे इलेक्ट्रोनिक्स उपकरण पूरी तरह से सुरक्षित रहते हैं।
- भूपेंद्र सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, टोरंट
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बढ़ते चलन और जरूरत ने एसी की डिमांड भी बढ़ा दी है। शहर में भी अधिकांश घरों और दफ्तरों में एसी लगे हैं। मगर, कम ही लोग हैं जो सुरक्षा मानकों से परिचित हैं और उसीके अनुरूप एसी का प्रयोग करते हैं। जानकारों की मानें तो एसी में प्रयोग होने वाली क्लोरोफ्लोरो गैस काफी खतरनाक होती है। लीकेज होने पर कम्प्रेशर में ब्लास्ट कर सकती है। यह ब्लास्ट एसी की बिजली वायरिंग में स्पार्किंग या वातावरण और कम्प्रेशर के तापमान दोनों से पैदा होने वाली हीट से हो सकता है। अपने शहर में अधिक तापमान होने से ब्लास्ट की संभावना अधिक है। ऐसे में जरूरी है कि सावधानी के साथ एसी का प्रयोग किया जाए।
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तापमान बन रहा खतरा
शहर का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता है। यह वह स्थिति है जिसमें लगता है कि आसमान से आग बरस रही है। घर से बाहर की ओर निकले होने के कारण एसी पर पूरे दिन धूप पड़ती रहती है। लगातार चलने के कारण भी विंडो एसी का कम्प्रेशर काफी गर्म हो जाता है। वातावरण और कम्प्रेशर का तापमान दोनों मिलकर काफी हीट पैदा करते हैं, इससे ब्लास्ट की संभावना अधिक रहती है।
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- डा. अमित अग्रवाल, प्रवक्ता, रसायन विभाग आगरा कालेज
लीकेज से हो सकता है हादसा
एसी में क्लोरो फ्लोरो कार्बन गैस प्रयोग होती है। यह ज्वलनशील गैस है। लीक होने पर एसी के अंदर बिजली की वायरिंग से स्पार्क होने पर ब्लास्ट कर सकती है। ऐसे में एसी में गैस लीकेज न हो इसका ध्यान रखना पड़ता है।
- प्रो. हेमंत कुलश्रेष्ठ, रसायन विभागाध्यक्ष, सेंट जोंस कॉलेज
असेंबल्ड एसी ज्यादा खतरनाक
शहर में एसी असेंबल करने का काम भी धड़ल्ले से चल रहा है। लोकल पार्ट्स लगाकर ऐसे एसी तैयार किए जा रहे हैं। ये सस्ते होते हैं पर इनकी कोई गारंटी नहीं होती। इधर-उधर से काम चलाऊ पार्ट्स लगाकर इससे कूलिंग की व्यवस्था कर दी जाती है। मगर, इसका कम्प्रेशर इतना कमजोर होता है कि वह कभी भी ब्लास्ट कर सकता है। गैस लीक होने की भी आशंका बनी रहती है।
वेंटीलेशन है जरूरी
विंडो एसी के लिए वेंटीलेशन जरूरी है। मगर, अधिकांश लोगों ने इसको ध्यान में रखे बगैर ही संकरी जगहों पर विंडो एसी फिट करा लिए हैं। ऐसे में एसी चलने पर इनसे निकलने वाली हीट को कंट्रोल करने के लिए शुद्ध हवा नहीं मिल पाती। एसी की गर्म हवा ही इसके आसपास घूमती रहती है। इससे इस जगह का तापमान अन्य खुली जगहों से और बढ़ जाता है। इससे हादसे की संभावना और अधिक हो जाती है।
इसका रखें ध्यान
. गर्मियों में ऐसी का प्रयोग शुरू करने से पहले इसकी सर्विस जरूर कराएं।
. समय-समय पर इसके फिल्टर को पानी से धोकर साफ करें।
. लगातार एसी प्रयोग न करें, दो-तीन घंटे बाद थोड़ी देर के लिए कम्प्रेशर बंद रखें।
. विंडो एसी के ऊपर शेड जरूर लगवाएं, ताकि धूप से बचाया जा सके।
. विंडो एसी को संकरी जगह पर न लगाएं, उसके पीछे खुली जगह होनी चाहिए।
. ड्रेन ट्यूब को एसी से अलग करके ड्रेनेज सिस्टम की सफाई कराएं।
. गैस लीकेज पर तत्काल मैकेनिक से संपर्क करें।
पर्यावरण के लिए एसी और फ्रिज सबसे बड़े खतरे के रूप में उभरकर सामने आ रहे हैं। इनका चलन दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। लोगों को यह नहीं पता कि क्लोरोफ्लोरो कार्बन गैस पर्यावरण के लिए जहर से कम नहीं है। इसके प्रभाव को कम करने के लिए पौधरोपण तो दूर पेड़ों पर आरी चलाई जा रही है। यही वजह है कि साल-दर-साल तापमान बढ़ता जा रहा है।
- डा. केएस राणा, पर्यावरणविद
शहर में वोल्टेज फ्लेक्च्यूएशन की स्थिति न के बराबर है। ओवरलोड या फ्लेक्च्यूएशन होने पर ट्रांसफार्मर ही ट्रिप कर जाता है। ऐसी स्थिति में विद्युत आपूर्ति बंद हो जाती है। इससे घरों में लगे इलेक्ट्रोनिक्स उपकरण पूरी तरह से सुरक्षित रहते हैं।
- भूपेंद्र सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, टोरंट