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दबंगों ने नौ महीने से नहीं खुलने दी दुकान
अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 18 Jun 2016 01:42 AM IST
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दबंगों ने नौ महीने से नहीं खुलने दी दुकान
- फोटो : Amar Ujala
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बिल्लोचपुरा के पूरे परिवार की रोजी-रोटी का है साधन, पलायन की तैयारी
कारबान गली में भी असुरक्षा का माहौल
बिल्लोचपुरा में समुदाय विशेष के दबंग लोगों से दहशतजदां हिंदू परिवार व्यापार तक नहीं कर पा रहे हैं। क्षेत्र में प्रवेश करते ही मुख्य सड़क से बमुश्किल 20 कदम की दूरी पर राजकुमार सब्जीवाले की थोक की दुकान है। यह पिछले नौ महीने से बंद पड़ी है। पूरे परिवार की रोजीरोटी का साधन यही दुकान थी। मगर, दबंग इसे नहीं खुलने देते। जैसे-तैसे हिम्मत जुटाकर दुकान खोल लेते हैं तो ये लोग फिर से बंद करा जाते हैं। पुलिस आपसी विवाद बताकर पल्ला झाड़ लेती है। मगर, परेशानी पूरा परिवार झेलता है।
विहिप की टीम शुक्रवार को जब क्षेत्र में पलायन करने वाले परिवारों के बारे में पूछताछ कर रही थी तभी यह मामला प्रकाश में आया। बंद दुकान के बाहर बैठे 72 वर्षीय प्रहलाद (राजकुमार के पिता) का कहना था कि उसके पौत्र से एक गलती हो गई थी। तब से समुदाय विशेष के दबंगों ने उनकी दुकान नहीं खुलने दी। उन्होंने बताया कि पुलिस से शिकायत करते हैं तो वह इसे गंभीरता से नहीं लेती। ऐसी परिस्थिति में उन्हें क्षेत्र छोड़ना ही पड़ेगा। पड़ोसी दुकानदार सब कुछ जानते हुए भी भय के कारण जुबान बंद रखते हैं।
बिल्लोचपुरा से ही थोड़ी ही दूर स्थित कारबान गली के लोग भी दबंगों से परेशान हैं। कई साल पूर्व गोली के हमले से बच चुके अशोक माहौर कहते हैं कि अब यह क्षेत्र सुरक्षित नहीं रहा। अधिकांश हिंदू परिवार पलायन कर चुके हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए वे भी यहां से जाने की तैयारी में हैं। खातीपाड़ा के अर्जुन भी अपना घर बेचकर जाना चाहते हैं। उनका कहना है कि चार साल पहले तक उनकी गली में लगभग 60 हिंदू परिवार थे, अब कुछ ही बचे हैं।
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कारबान गली में भी असुरक्षा का माहौल
बिल्लोचपुरा में समुदाय विशेष के दबंग लोगों से दहशतजदां हिंदू परिवार व्यापार तक नहीं कर पा रहे हैं। क्षेत्र में प्रवेश करते ही मुख्य सड़क से बमुश्किल 20 कदम की दूरी पर राजकुमार सब्जीवाले की थोक की दुकान है। यह पिछले नौ महीने से बंद पड़ी है। पूरे परिवार की रोजीरोटी का साधन यही दुकान थी। मगर, दबंग इसे नहीं खुलने देते। जैसे-तैसे हिम्मत जुटाकर दुकान खोल लेते हैं तो ये लोग फिर से बंद करा जाते हैं। पुलिस आपसी विवाद बताकर पल्ला झाड़ लेती है। मगर, परेशानी पूरा परिवार झेलता है।
विहिप की टीम शुक्रवार को जब क्षेत्र में पलायन करने वाले परिवारों के बारे में पूछताछ कर रही थी तभी यह मामला प्रकाश में आया। बंद दुकान के बाहर बैठे 72 वर्षीय प्रहलाद (राजकुमार के पिता) का कहना था कि उसके पौत्र से एक गलती हो गई थी। तब से समुदाय विशेष के दबंगों ने उनकी दुकान नहीं खुलने दी। उन्होंने बताया कि पुलिस से शिकायत करते हैं तो वह इसे गंभीरता से नहीं लेती। ऐसी परिस्थिति में उन्हें क्षेत्र छोड़ना ही पड़ेगा। पड़ोसी दुकानदार सब कुछ जानते हुए भी भय के कारण जुबान बंद रखते हैं।
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बिल्लोचपुरा से ही थोड़ी ही दूर स्थित कारबान गली के लोग भी दबंगों से परेशान हैं। कई साल पूर्व गोली के हमले से बच चुके अशोक माहौर कहते हैं कि अब यह क्षेत्र सुरक्षित नहीं रहा। अधिकांश हिंदू परिवार पलायन कर चुके हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए वे भी यहां से जाने की तैयारी में हैं। खातीपाड़ा के अर्जुन भी अपना घर बेचकर जाना चाहते हैं। उनका कहना है कि चार साल पहले तक उनकी गली में लगभग 60 हिंदू परिवार थे, अब कुछ ही बचे हैं।
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