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कई माननीयों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी

Thu, 22 Apr 2021 11:35 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 22 Apr 2021 11:35 PM IST
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The reputation of many honorable people was at stake
फिरोजाबाद। चुनाव भले ही पंचायत का हो लेकिन इसमें जिले के कई माननीयों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। चुनाव जीतने को वह एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। किसी की पत्नी तो किसी का बेटा पहली बार चुनाव मैदान में हाथ आजमा रहा है। कुछ माननीयों की पुत्रवधू प्राथमिक राजनीति में हाथ आजमाने को उतरी हैं।
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पंचायत चुनाव का प्रचार इन दिनों जोरों पर है। एक-एक वोट को अपने पक्ष में करने की जोर अजमाइश चल रही है। अच्छे-अच्छे नेता घरों पर दस्तक दे रहे है। यह नजारा इन दिनों गांव-गांव में नजर आ रहा है। प्रधान बनने के लिए बिसात बिछाई जा रही है। जिले के माननीयों की प्रतिष्ठा दांव पर है। पूर्व मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह की पुत्रवधू हर्षिता सिंह वार्ड संख्या 15 से उम्मीदवार है।
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ऐसे में खुद पूर्व मंत्री को क्षेत्र में जाकर रणनीति बनानी पड़ रही है। सिरसागंज विधायक हरिओम यादव की पत्नी रामसखी यादव वार्ड संख्या तीस, उनके पुत्र विजय प्रताप उर्फ छोटू वार्ड 29 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में है। विपक्षी सपा, बसपा एवं भाजपा के समर्थित प्रत्याशी उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। जसराना के पूर्व विधायक रामवीर यादव की पत्नी मीरा देवी को वार्ड संख्या 11 से भाजपा ने समर्थन दिया है तरे उनके पुत्र पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अमोल यादव वार्ड नंबर नौ से निर्दलीय हाथ आजमा रहे हैं।
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सपा, बसपा एवं कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार सहित विपक्षी उनकी मुश्किलें बढ़ाने में जुटे हैं। जसराना के पूर्व विधायक रामप्रकाश यादव के पुत्र को सपा ने प्रत्याशी बनाया है। टूंडला के पूर्व विधायक मोहन देव शंखवार के पुत्र रोहित शंखवार जिला पंचायत के वार्ड संख्या 16 से भाजपा के समर्थन से किस्मत आजमाने उतरे हैं। राज्य महिला आयोग की सदस्य सुमन चतुर्वेदी को वार्ड संख्या तीन से प्रत्याशी होने के कारण काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। पूर्व विधायक शिवमंगल सिंह की पुत्रवधू चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में कई सीटों पर चुनाव काफी रोचक हो गया है।

जातिगत विरोधी बताने का चल रहा हथकंडा
शहर के कई नेता एक दूसरे को जातिगत विरोधी बता रहे हैं। कोई किसी को ब्राह्मण विरोधी बता रहा है, तो कोई क्षत्रिय विरोधी। इसके लिए नेताजी ने अपने गुर्गे तक सेट कर दिए हैं। आगरा के एक बड़े नेता ने तो जिले में अपने गुर्गे को सेट कर दिया है कि उनकी जाति का एक भी वोट नहीं दिया जाए। भले ही दूसरे दल में चला जाए।
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