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तय समय के बाद जेल में हो बंदियों की वापिसी

Mon, 21 Jun 2021 10:40 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 21 Jun 2021 10:40 PM IST
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The prisoners should be returned to the jail after the stipulated time.
मैनपुरी। कोरोना काल में जेल से अंतरिम जमानत और पेरोल पर छोड़े गए बंदियों की सोमवार को विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सत्येंद्र कुमार सिंह ने समीक्षा की। जेल अधीक्षक से कहा जेल से छोड़े गए बंदियों की तय समय के बाद हर हाल में जेल में वापसी होनी चाहिए।
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हाईकोर्ट की गाइड लाइन के तहत कोरेाना काल में जेल से बंदियों की रिहाई की गई है। सात साल से कम सजा वाले 115 बंदी तय शर्तों के आधार पर जेल से छोड़े जा चुके हैं। 28 बंदियों को पेरोल पर रिहा किया गया है। सोमवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सत्येंद्र कुमार सिंह ने जेल से छोड़े गए बंदियों की समीक्षा की। उनका पूरा ब्यौरा लिया।
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जेल अधीक्षक हरीओम शर्मा से कहा जेल से छोड़े गए बंदियों को तय शर्तो का पालन करना है। जेल से छोड़ते समय उन्हें शर्तो का पालन करने की हिदायत दी जाए। बंदियों को निश्चित समय के लिए अंतरिम जमानत और पेरोल पर रिहा किया गया है। इस मौकेे पर जेल अधीक्षक हरीओम शर्मा, जेलर जेपी दुबे, डिप्टी जेलर मोनिका वर्मा मौजूद रहे।
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एक और बंदी को मिली अंतरिम जमानत
सात साल से कम सजा वाले मामलों में एक और बंदी को सोमवार को जेल से रिहा कर दिया गया। अब तक 114 बंदी रिहा किए जा चुके हैं।
हाईपावर कमेटी के चेयरमैन जिला जज तेजप्रताप तिवारी के निर्देश पर जेल अधीक्षक हरीओम शर्मा ने एक बंदी का अंतरिम जमानत के लिए प्रार्थनापत्र मजिस्ट्रेट कोर्ट में दिया। सुनवाई के बाद उनको अंतरिम जमानत दे दी गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सत्येंद्र कुमार चौधरी ने बताया अंतरिम जमानत पाने वाले बंदियों को तय शर्तों का पालन नहीं करने पर अंतरिम जमानत निरस्त किए जाने की हिदायत दी गई है। संवाद

दस जुलाई को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर दीवानी परिसर में दस जुलाई को राष्ट्रीय लोक अदालत लगेगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष तेजप्रताप तिवारी ने सभी कार्यालयों और न्यायालयों को राष्ट्रीय लोक अदालत में समझौते से मामले निस्तारित कराने के लिए अधिक से अधिक मामलों की सूची अतिशीघ्र भेजने के निर्देश दिए हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सत्येंद्र कुमार चौधरी ने बताया राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों की आपसी सहमति से ही मामले निपटाए जाते हैं। राष्ट्रीय लोक अदालत में अपराध, सिविल, राजस्व, चकबंदी, पारिवारिक, मोटर दुर्घटना, निकाय, परिवहन, पूर्ति विभाग, वन विभाग, दूरसंचार के मामले निस्तारित होंगे। संवाद
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