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बीएड फर्जीवाड़ाः मार्कशीट के कारण नौकरी खोने वाले ने किया पूरे रैकेट का भंडाफोड़

Sat, 28 Oct 2017 01:13 PM IST
चंद्रमोहन शर्मा/अमर उजाला आगरा
चंद्रमोहन शर्मा/अमर उजाला आगरा Updated Sat, 28 Oct 2017 01:13 PM IST
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the man who open the fake marksheet racket of agra university
बीएड की मार्कशीट का फर्जीवाड़ा - फोटो : अमर उजाला
डाक्टर बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी की बीएड की मार्कशीट का यह फर्जीवाड़ा 84 कॉलेजों में मनमाने ढंग से प्रबंधन कोटा बढ़ाकर किया गया था। इन निजी कॉलेजों में 15 फीसदी कोटा था। उस समय बीएड की भारी डिमांड थी। 
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मोटे पैसे मिल रहे थे दाखिले के। इसी लालच में कॉलेजों ने अपनी मर्जी से कोटा बढ़ाकर 50 फीसदी कर लिया था। बाद में कोटे के 35 फीसदी छात्रों को फर्जी अंकपत्र दिए गए।
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यह खुलासा मैनपुरी के युवक सुनील कुमार की हाईकोर्ट में की गई याचिका से हुआ था। उसे बीएड में अंक कम आए थे जबकि पेपर अच्छे हुए थे। वह यूनिवर्सिटी में अंकतालिका ठीक कराने के लिए आया था। उसे क्लर्क ने एक और तालिका दे दी।
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इसमें अंक ज्यादा थे। सुनील की एक निजी कंपनी में नौकरी लगी थी। उसने नई तालिका वहां जमा कर दी। कंपनी को उस पर शक हो गया। उसकी नौकरी चली गई। इस पर वह हाईकोर्ट गया। वहां उसने दोनों अंकतालिकाएं रख दीं। 

दोनों का रिकार्ड यूनिवर्सिटी के चार्ट पर चढ़ा था। इस पर हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि इस मामले की एसआईटी जांच कराई जाए। एसआईटी ने 2015 के शुरू में केस (तीन / 2015) दर्ज किया। 

इसकी जांच में 4500 डिग्रियां फर्जी पाई गई। इसमें सबसे बड़ा साक्ष्य यह बना कि विवि. ने रिजल्ट ही आठ हजार अभ्यर्थियों का जारी किया था। रिकार्ड में 12500 थीं। इस तरह 4500 डिग्री फर्जी साबित हुईं।

अमर उजाला ने किया हर खुलासा

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ब्रेकिंग
फर्जी डिग्री प्रकरण की जांच एसआईटी को दे दी गई है। यह खुलासा ‘अमर उजाला’ ने किया। इसके बाद 4500 मार्कशीट जांच में फर्जी पाई गईं। यह खबर भी सिर्फ ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित हुई। विवि के कुलपति ने फर्जी मार्कशीट पर कार्रवाई से इंकार किया तो एसआईटी ने इनका ब्योरा हाईकोर्ट के सामने रख दिया। 

ये खबर और फर्जी डिग्री से नौकरी पाने वाले सहायक अध्यापकों की बर्खास्तगी की खबर भी केवल ‘अमर उजाला’ में ही छपी थी। एसआईटी ने पहले यह रिपोर्ट विवि. को दी थी कि 2004-05 की सभी 12000 मार्कशीट निरस्त कर दी जाएं। 

इस पर विवि ने तर्क दिया कि इस तरह तो असली छात्र बेवजह मुसीबत में आ जाएंगे। इसके बाद एसआईटी ने केवल उन मार्कशीट का ब्योरा दिया, जो फर्जी थी, यह खबर भी ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से दी।
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