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Agra News: अव्यवस्था का टापू बना ऐतिहासिक पालीवाल पार्क, डिजिटल दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर, चार महीने से टूटा पड़ा है मुख्य पुल, गंदगी और बदबू के बीच भारी-भरकम शुल्क वसूली से लोग परेशान
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आगरा। शहर के बीचों-बीच स्थित ऐतिहासिक पालीवाल पार्क अपनी खूबसूरती खो चुका है। पार्क की दुर्दशा का आलम यह है कि यहां आने वाले पर्यटकों को सुविधाओं के नाम पर सिर्फ निराशा हाथ लग रही है। ताज्जुब की बात यह है कि सुविधाओं के अभाव के बावजूद दर्शकों से 50 रूपये का भारी-भरकम टिकट वसूला जा रहा है। झील में पर्यटकों के लिए उपलब्ध तीन नावों में से दो पूरी तरह टूट चुकी हैं और किनारे पर बेकार पड़ी हैं। मात्र एक नाव के भरोसे पूरी वोटिंग व्यवस्था चल रही है। जिसके कारण घंटों इंतजार करना पड़ता है। इतना ही नहीं पार्क के भीतर बना मुख्य पुल पिछले चार महीनों से क्षतिग्रस्त है। जिससे किसी भी वक्त बड़ा हादसा होने का डर बना रहता है। पार्क घूमने आने वाले लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल पैसा वसूलने में रुचि रख रहा है। गंदगी, बदबू और टूटी बेंचों के बीच 50 रूपये का शुल्क कतई तर्कसंगत नहीं है।
रामबाग निवासी सुमित परमार ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो सुंदरता दिखाई गई है। वास्तविकता उससे कोसों दूर है। जमीनी स्तर पर टूटी नावें, क्षतिग्रस्त पुल और गंदगी का अंबार है। डिजिटल दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है।
शाहगंज निवासी निशा ने पार्क की दुर्दशा पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि जिस पार्क को कभी ताजनगरी का हृदय कहा जाता था, आज उसकी हालत देख पति के सामने शर्मिंदगी महसूस हो रही है। बचपन की यादों वाला यह खूबसूरत पार्क अब अव्यवस्थाओं और गंदगी का केंद्र बनकर रह गया है।
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रामबाग निवासी सुमित परमार ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो सुंदरता दिखाई गई है। वास्तविकता उससे कोसों दूर है। जमीनी स्तर पर टूटी नावें, क्षतिग्रस्त पुल और गंदगी का अंबार है। डिजिटल दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है।
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शाहगंज निवासी निशा ने पार्क की दुर्दशा पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि जिस पार्क को कभी ताजनगरी का हृदय कहा जाता था, आज उसकी हालत देख पति के सामने शर्मिंदगी महसूस हो रही है। बचपन की यादों वाला यह खूबसूरत पार्क अब अव्यवस्थाओं और गंदगी का केंद्र बनकर रह गया है।
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