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आगरा: फर्जी दस्तावेज से सेना में भर्ती होने आए 10 युवक पकड़े, बोली से हुआ खुलासा

Wed, 17 Feb 2021 11:27 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 17 Feb 2021 11:27 AM IST
सार

  • खुद को बता रहे थे कासगंज का, बोली बोल रहे थे मेरठ की
  • पुलिस के पूछने पर कासगंज के मोहल्ले भी न बताए गए पकड़े गए युवक 
  • कोरोना की फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार करने वाले चार और एक रिपोर्ट बनवाने वाला भी गिरफ्तार

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ten youths arrested with fake documents in sena bharti rally agra
आगरा: फर्जीवाड़े के आरोप में पकड़े गए युवक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में फर्जी दस्तावेज से सेना में भर्ती होने आए दस युवकों को पुलिस ने मंगलवार सुबह पकड़ लिया। ये नोएडा, हापुड़ और बुलंदशहर के निवासी हैं जबकि फर्जी दस्तावेज कासगंज के  पते से तैयार कराए थे। इनमें से आठ फिजिकल परीक्षा पास कर चुके थे। इनके अलावा भर्ती स्थल के पास से ही चार युवक कोरोना की फर्जी जांच रिपोर्ट बनाते और एक  बनवाते हुए पकड़ा गया। दोनों मामलों में सिकंदरा थाना में केस दर्ज कर सभी 15 आरोपियों को को जेल भेज दिया गया।

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एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि कीठम के आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज के मैदान में चल रही सेना भर्ती में शामिल होने आए 10 युवकों से फर्जी आधार कार्ड और फर्जी निवास प्रमाणपत्र मिले हैं। इनमें से चार बुलंदशहर के लवकुश चौधरी, हितेश, रोहित, जय प्रकाश, पांच हापुड़ के प्रदीप, सनी, गौरव, विनीत, सचिन और एक गौतमबुद्ध नगर का कुलदीप है। 
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फर्जी कोरोना जांच रिपोर्ट बनाने वाले गिरोह के सदस्य सोनू खान, नवीन, फिरोजा, मुनीर सिकंदरा के अरसेना गांव के हैं। इनसे रिपोर्ट बनवाते हुए पकड़ा गया युवक शिवकुमार फर्रुखाबाद का है। गिरोह के पास पास से लैपटॉप, फर्जी कोरोना जांच रिपोर्ट मिली है।

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ऐसे हुआ खुलासा

फर्जी आधार कार्ड और फर्जी निवास प्रमाणपत्र लेकर आए युवक खुद को बता तो रहे थे कासगंज का निवासी जबकि सैन्य अफसरों को उनकी बोली लग रही थी मेरठ की तरफ की। इसी से उन पर शक हुआ। सूचना पुलिस को दी गई। 

पुलिस ने उनसे कासगंज के मोहल्ले पूछे तो बगलें झांकने लगे। इसके बाद सख्ती से पूछताछ हुई तो फर्जीवाड़े की कहानी बयां कर दी। कहने लगे, हमारी तरफ के जिलों की भर्ती नहीं हो रही थी, इसलिए कासगंज के दस्तावेज बनवा लिए।

एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि मेरठ और कासंगज की बोली में थोड़ा सा फर्क है। पकड़े गए अभ्यर्थी मेरठ के आसपास के जिलों हापुड़, गौतमबुद्धनगर और बुलंदशहर के हैं। इनकी बोली से ही सैन्य अफसरों को शक हुआ। उनसे सूचना मिली तो पुलिस को लगाया गया। 

पुलिस टीम ने पाया कि शक बिल्कुल सही है, इनकी बोली कासगंज की नहीं लग रही है। पहले दो को पकड़ा गया। उन्होंने पूछताछ में आठ और के नाम बताए। इस तरह दस की जानकारी मिल गई। 

सैन्य अफसरों से बात की गई तो पता चला कि  लवकुश, हितेश कुमार, सचिन, रोहित कुमार, विनीत, गौरव, सनी, प्रदीप कुमार ने फिजीकल टेस्ट पास कर लिया था। ये चरित्र प्रमाणपत्र और अन्य के सत्यापन का कार्य करा रहे थे। जयप्रकाश फिजिकल टेस्ट पास नहीं कर पाया। कुलदीप तेवतिया की भर्ती मंगलवार को होनी थी।

एसएसपी ने कहा कि सेना भर्ती में जालसाजों के सक्रिय होने की आशंका पर पुलिस और आर्मी इंटेलीजेंस की टीम सक्रिय है। इसलिए युवाओं से अपील है कि वह फर्जीवाड़े से भर्ती में शामिल न हों। उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

ये हुई बरामदगी
- फर्जी दस्तावेज, 11 आधार कार्ड, दो एडमिट कार्ड।
- आठ निवास प्रमाणपत्र, छह शपथ पत्र, छह जाति प्रमाणपत्र, तीन अविवाहित प्रमाणपत्र आदि।
- फर्जी आधार कार्ड, जाति प्रमाणपत्र, मूल निवास प्रमाणपत्र, कोविड -19 जांच रिपोर्ट, दो लैपटॉप, कलर प्रिंटर, दो एडेप्टर सहित प्रमाणपत्र।

दो हजार रुपये में देते कोरोना जांच की फर्जी निगेटिव रिपोर्ट
भर्ती स्थल के पास ही सम्राट हॉस्पिटल की दीवार के सहारे युवक फर्जी दस्तावेज तैयार कर रहे थे। यहां से पकड़े गए सोनू, नवीन, मुनीर और फिरोज ने बताया कि उनके पास कोरोना की एक निगेटिव जांच रिपोर्ट लैपटॉप में सेव थी। इसमें नाम, पता बदलकर दे देते थे। इसके बाद लैपटॉप की मदद से अभ्यर्थी का नाम और भर्ती वाले जिले का पता लिख देते थे। 

कलर प्रिंटर की मदद से प्रिंट निकाल लेते थे। उनके पास से फर्जी दस्तावेज मिले हैं। क्योंकि भर्ती में कोरोना जांच रिपोर्ट आवश्यक है। इसके लिए इसकी बहुत मांग थी। वह एक अभ्यर्थी से दो हजार रुपये ले रहे थे। पुलिस की कार्रवाई के समय शिव कुमार यहां फर्जी रिपोर्ट लेने आया था।

अब फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह की तलाश
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कासगंज जिले की भर्ती में शामिल होना चाहते थे। इसके लिए फर्जी निवास प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और जाति प्रमाणपत्र बनवाए थे। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह की जानकारी मिली है। उसकी तलाश की जा रही है।
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