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कन्हैया के जन्मदिन पर मथुरा में खर्च हुए 10 करोड़

Sat, 19 Aug 2017 03:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा Updated Sat, 19 Aug 2017 03:45 PM IST
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ten crore expenditure on janmashtami in mathura
जन्मस्थान - फोटो : amar ujala
भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर करीब दस करोड़ का खर्च आया है। इसमें एक करोड़ का खर्च तो श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर ही हुआ है। जबकि वृंदावन के श्री बांकेबिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर और राधामण मंदिर पर लाइटिंग में ही लाखों का खर्च है। वहीं, प्रसाद से लेकर व्यवस्था बनाने तक का व्यय जोड़ा जाए तो जिले के सभी बड़े मंदिरों पर पच्चीस से तीस लाख का खर्च आ रहा है।
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भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए करीब 34 लाख लोग पहुंचे थे। यह आंकड़ा वह है जो प्रशासन ने शासन को भेजा था। 14 अगस्त को कृष्ण भक्त मथुरा पहुंचे और 16 को इनकी वापसी हुई। श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 10 लाख रुपये तो लाइटिंग और साउंड पर ही खर्च हुए हैं, जबकि 80 कुंतल फलाहार वाला प्रसाद बना और 25 कुंतल अन्य प्रसाद । 55 किलो चांदी की गाय अभिषेक के लिए आई थी। इसकी कीमत ही 25 लाख होगी। जन्मस्थान संस्थान पर करीब एक करोड़ का खर्च माना जा रहा है। 
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उधर, द्वारिकाधीश मंदिर पर भी दस से बीस लाख का खर्च आया है। जबकि वृंदावन में श्री बांकेबिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिन, राधारमण मंदिर, राधादामोदर मंदिर, प्रियाकांत जू मंदिर, अक्षय पात्र और चंद्रोदय मंदिर। इन सभी मंदिरों में जन्माष्टमी पर सजावट से लेकर ठाकुरजी के प्रसाद तक पर बीस से तीस लाख का खर्च हुआ है। जबकि गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव और गोकुल के मंदिरों में भी पांच से दस लाख का खर्च आया है। मथुरा के प्रमुख मंदिरों के साथ जन्माष्टमी मथुरा के पांच हजार मंदिरों में मनाई गई थी। 
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मथुरा ने चीन को दिया बड़ा झटका

ten crore expenditure on janmashtami in mathura
श्रीकृष्ण जन्मस्थान - फोटो : amar ujala
इस बार मंदिरों ने चीन को बड़ा झटका दिया है। हर साल मंदिरों की सजावट पर चाइनीज आइटम ही इस्तेमाल हुआ करते थे लेकिन इस बार मंदिरों ने अपने देश में बने उपकरणों का ही प्रयोग किया है। जन्मस्थान संस्थान के सचिव कपिल शर्मा का कहना है कि चाइनीज आइटम पूरी तरह से प्रतिबंधित रहे। लाइटिंग और साउंड पर ही दस लाख का खर्च आया है। द्वारिकाधीश मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी का कहना है कि दस से बीस लाख का खर्च आया है। इस बार मंदिर में किसी भी चाइनीज सामान का इस्तेमाल नहीं हुआ है।
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