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फर्जीवाड़ाः गोरखपुर में तैनात शिक्षक के प्रमाणपत्रों पर मिला अन्य छात्र का रोलनंबर
Mon, 15 Jun 2020 10:07 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 15 Jun 2020 10:07 AM IST
सार
- हाईकोर्ट में है यह मामला
- विवि से मांगी गई थी जानकारी
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investigation
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विस्तार
गोरखपुर के परिषदीय विद्यालय में तैनात एक शिक्षक ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के नाम से फर्जी प्रमाणत्रों का इस्तेमाल कर नौकरी पाई है। बीएड के प्रमाणपत्र में जो रोलनंबर दर्शाया है व किसी अन्य छात्र का है। सत्यापन में भी फर्जीवाड़ा किया गया है। शिक्षक का मामला हाईकोर्ट पहुंचा है।
विश्वविद्यालय से पूछे जाने पर अधिकारियों ने शिक्षक की ओर से लगाए गए प्रमाणपत्रों की जांच कराई। शिक्षक ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से खुद को सत्र 2004-05 में बीएड दिखाया है।
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जांच में पता चला कि प्रमाणपत्र पर दर्ज रोलनंबर किसी और विद्यार्थी का है। खास बात यह है कि यह रोलनंबर एसआईटी (विशेष जांच दल) की ओर से तैयार फर्जी अभ्यर्थियों की सूची में भी शामिल नहीं है।
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विश्वविद्यालय से पूछे जाने पर अधिकारियों ने शिक्षक की ओर से लगाए गए प्रमाणपत्रों की जांच कराई। शिक्षक ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से खुद को सत्र 2004-05 में बीएड दिखाया है।
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जांच में पता चला कि प्रमाणपत्र पर दर्ज रोलनंबर किसी और विद्यार्थी का है। खास बात यह है कि यह रोलनंबर एसआईटी (विशेष जांच दल) की ओर से तैयार फर्जी अभ्यर्थियों की सूची में भी शामिल नहीं है।
शिक्षक ने दर्शाया है कि उसके प्रमाणपत्र का सत्यापन विश्वविद्यालय से वर्ष 2019 में हुआ। सत्यापन का पत्रांक दिखवाया गया तो पता चला कि उसमें भी फर्जीवाड़ा है। उस पत्रांक पर बीए के छात्र की सत्यापन रिपोर्ट भेजी गई थी। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि शिक्षक ने प्रमाणपत्र को खुद ही सत्यापित कर रखा है। फर्जीवाड़े की जानकारी दे दी गई है।
स्टाफ की मिलीभगत की आशंका
विश्वविद्यालय में सक्रिय दलालों के कॉकस के माध्यम से तमाम फर्जीवाड़े हुए हैं। सवाल यह उठता है कि बिना विश्वविद्यालय के किसी स्टाफ की मिलीभगत के शिक्षक को यहां किसी और विद्यार्थी का रोलनंबर कैसे मिला। सत्यापन का पत्रांक भी विश्वविद्यालय का ही है, भले ही उस पर किसी और विद्यार्थी की सत्यापन रिपोर्ट भेजी गई हो।
स्टाफ की मिलीभगत की आशंका
विश्वविद्यालय में सक्रिय दलालों के कॉकस के माध्यम से तमाम फर्जीवाड़े हुए हैं। सवाल यह उठता है कि बिना विश्वविद्यालय के किसी स्टाफ की मिलीभगत के शिक्षक को यहां किसी और विद्यार्थी का रोलनंबर कैसे मिला। सत्यापन का पत्रांक भी विश्वविद्यालय का ही है, भले ही उस पर किसी और विद्यार्थी की सत्यापन रिपोर्ट भेजी गई हो।