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बदहाल सिस्टमः तीन दिन दवा के लिए तड़पा, फिर तोड़ दिया दम, परिवार में मचा कोहराम
Fri, 15 May 2020 12:28 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 15 May 2020 12:28 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Flickr
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आगरा में सीता नगर निवासी राकेश कुमार (35) पुत्र ओम प्रकाश नुनिहाई में एक अलमारी कारखाने में काम करते थे। छह माह से टीबी की दवाएं ले रहे थे। लॉकडाउन में एक तरफ काम बंद हुआ, दूसरी तरफ दवाएं नहीं मिलीं। 20 अप्रैल की रात 10 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।
सीता नगर में किराये के मकान में रहने वाली मृतक की पत्नी बबीता गोद में चार माह के बेटे को लेकर किस्मत को कोस रही है। उसके चार बच्चे हैं। 10 साल की बड़ी बेटी तनु, आठ साल का शिव और तीन साल की बेटी नहना और चार माह का विवेक। बबीता ने बताया कि राकेश तीन दिन दवा के लिए तड़पे। कहीं दवा नहीं मिली। पड़ोस में एक और टीबी मरीज के घर गईं। उन्होंने अपनी दवा में से एक गोली दी। बताया कि उनके पास भी छह दिन की दवा है, ज्यादा नहीं दे सकता।
बबीता ने बताया कि 18 अप्रैल को उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ गई। वह सांस नहीं ले पा रहे थे। पड़ोसी उनको उपचार के लिए एसएन इमरजेंसी ले गए। वहां भर्ती नहीं किया। फिर 20 अप्रैल को सुबह से शाम तक दवा के लिए जगह-जगह भटके। कहीं दवा नहीं मिलीं। रात 10 बजे उन्होंने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
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घर में खाना नहीं है
मृतक के भाई रिंकू ने बताया कि घर में खाने के लिए एक दाना नहीं। वह 1500 रुपये सप्ताह कमाता था, लेकिन अब काम बंद हैं। पड़ोसी आटा दे जाते हैं, उसी से गुजर हो रही है।
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सीता नगर में किराये के मकान में रहने वाली मृतक की पत्नी बबीता गोद में चार माह के बेटे को लेकर किस्मत को कोस रही है। उसके चार बच्चे हैं। 10 साल की बड़ी बेटी तनु, आठ साल का शिव और तीन साल की बेटी नहना और चार माह का विवेक। बबीता ने बताया कि राकेश तीन दिन दवा के लिए तड़पे। कहीं दवा नहीं मिली। पड़ोस में एक और टीबी मरीज के घर गईं। उन्होंने अपनी दवा में से एक गोली दी। बताया कि उनके पास भी छह दिन की दवा है, ज्यादा नहीं दे सकता।
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बबीता ने बताया कि 18 अप्रैल को उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ गई। वह सांस नहीं ले पा रहे थे। पड़ोसी उनको उपचार के लिए एसएन इमरजेंसी ले गए। वहां भर्ती नहीं किया। फिर 20 अप्रैल को सुबह से शाम तक दवा के लिए जगह-जगह भटके। कहीं दवा नहीं मिलीं। रात 10 बजे उन्होंने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
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घर में खाना नहीं है
मृतक के भाई रिंकू ने बताया कि घर में खाने के लिए एक दाना नहीं। वह 1500 रुपये सप्ताह कमाता था, लेकिन अब काम बंद हैं। पड़ोसी आटा दे जाते हैं, उसी से गुजर हो रही है।